जानवरों से दरिंदगी के आंकड़े बढ़े, क्या कहता है कानून
- जानवर को मारने पर कितनी सजा?
- क्यों बढ़ रही है जानवरों संग दरिंदगी?
- किसे नहीं मिलती सजा?
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विस्तार
देश में बेजुबान जानवरों के प्रति क्रूरता के मामलों में एकाएक तेजी आई है। पिछले दिनों देहरादून में प्रदर्शन कर रहे नेता ने एक घोड़े की टांग तोड़ दी। दिल्ली में तीन दिन पहले एक सनकी बेजुबान कुत्तों को शिकार बना रहा है। वहीं बंगलोर में एक औरत ने कुत्ते के नवजात पिल्लों को जिंदा ही कब्र में दफना दिया।
ये मामले इस बात के गवाह हैं कि लोग जानवरों के प्रति इतने असंवेदनशील हो गए हैं कि जानवर घर और बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं है। आइए देखते हैं कि देश का कानून इस बारे में क्या कहता है।
जानिए किस कृत्य की कितनी सजा
साधारण पशुओं के प्रति क्रूरता बरतने वाले जैसे सताने, पीटने, ठोकर मारने, कोई अंग तोड़ देने, अत्यधिक सामान लादने, हद से ज्यादा सवारी करने या बैठाने, जहर खिलाने, घाव करने के आरोप में पशु क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 के तहत व्यक्ति पर दस रुपए से लेकर पचास रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।
यदि वही व्यक्ति तीन साल के भीतर फिर किसी पशु के साथ यही दरिंदगी करता है तो अधिनियम के तहत 25 रुपए न्यूनतम से लेकर 100 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।
यदि कोई व्यक्ति महज मनोरंजन के लिए किसी मूक जानवर के साथ दरिंदगी करेगा, पैसा कमाने के उद्देश्य से उसकी दूसरे जानवर से लड़ाई करवाएगा, निशानेबाजी प्रतियोगिता में बतौर निशाना उसे रखेगा तो आरोपी को सौ रुपए जुर्माना और तीन माह की सजा का प्रावधान है।
कम सजा से दरिंदगी बढ़ी
इतनी कम सजा होने के बाद पशुओं के साथ दरिंदगी करने वाले खुले घूमते हैं और उन्हें अपने अपराध पर कोई पछतावा तक नहीं होता।
खिलौनों की तरह बना दिए मूक जानवर
हालांकि पशुओं के साथ होने वाली दरिंदगी को देखते हुए ये सजा बहुत कम है लेकिन प्रशासन कानून से बंधा हुआ है
कौन कौन है दायरे से बाहर
ऐसी सोसाइटी जो पशुओं का प्रदर्शन शैक्षणिक या वैज्ञानिक प्रयोजनों के लिए करती है, इस दायरे से बाहर रहेंगी।