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TMC Rift: ममता बनर्जी से मिलने पहुंचे अभिषेक; पार्टी में आंतरिक कलह और मतभेद की अटकलों के बीच दिग्गजों का तंज
Mon, 01 Jan 2024 09:15 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 01 Jan 2024 09:15 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित तौर पर आंतरिक कलह की खबरें सामने आ रही हैं। दिग्गज नेताओं ने अभिषेक बनर्जी पर कटाक्ष किया है। पार्टी में मतभेद की खबरों के बीच टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार शाम पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से मुलाकात की।
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अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी (फाइल)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 27वां स्थापना दिवस मनाया। पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस की युवा ब्रिगेड का नेतृत्व करने वाला माना जाता है। सोमवार को स्थापना के जश्न के बीच टीएमसी के कथित आंतरिक मतभेद भी सामने आ गए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो माने जाने वाले राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को आड़े हाथों लिया। इसके बाद अभिषेक ममता से मिलने पहुंचे।
अभिषेक ने रिटायरमेंट का बयान दिया, शाम में CM से मिलने कालीघाट पहुंचे
दरअसल, विवाद तब सामने आया जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों को उचित सम्मान देने की सलाह दी। उन्होंने इस दावे का खंडन किया कि पुराने नेताओं को सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कार्य कुशलता और उपयोगिता में गिरावट का जिक्र कर, राजनीति में रिटायरमेंट का जिक्र किया। टीएमसी के आंतरिक टकराव के बीच मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। अभिषेक सोमवार शाम लगभग 6 बजे सीएम ममता के कालीघाट आवास पर पहुंचे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अभिषेक के करीबी नेता ने भी दोनों की मुलाकात की पुष्टि की। हालांकि, बैठक का एजेंडा सामने नहीं आया है।
वरिष्ठ नेताओं के बयान
टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी की आयु 73 साल है। ममता बनर्जी के प्रति वफादारी के लिए चर्चित सुब्रत ने खुलेआम कहा है कि डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक इस साल भी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। टीएमसी मुख्यालय में स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। हमें यकीन है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। अगर वह लड़ते हैं, तो चुनाव ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के प्रतीक के तहत ही लड़ा जाएगा।
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अभिषेक के करीबी नेता बोले- पार्टी नेता उनकी राय पर ध्यान दें तो बेहतर
इस टिप्पणी पर टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई महासचिव कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कुणाल को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। कुणाल ने कहा कि सुब्रत बख्शी अपने शब्द वापस लें। उन्होंने कहा, 'मैं प्रदेश अध्यक्ष का सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे उनके शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति है। अभिषेक की उम्मीदवारी विचाराधीन है। अगर पार्टी नेता अभिषेक की बातों और उनकी राय पर ध्यान दें तो यह उनके लिए अच्छा होगा।
वरिष्ठ नेताओं की नसीहत - इतिहास से सीखें युवा तृणमूल नेता
इन दो बयानों के बाद ममता बनर्जी के करीबी फिरहाद हाकिम और सुदीप बंद्योपाध्याय की टिप्पणी ने आग में घी जैसी साबित हुई। सुदीप ने कहा, जैसे ही पार्टी सुप्रीमो ममता, पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगी राज्य में सबकुछ अस्त-व्यस्त हो जाएगा। तृणमूल नेता और कोलकाता के मेयर हाकिम ने कहा, पार्टी के नए नेताओं को टीएमसी के संघर्ष के इतिहास से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें लोगों का भरोसा जीतने और प्रभावी राजनीतिक ताकत बनने में कई साल लगे हैं।
सीएम ममता के नंदीग्राम से चुनाव हारने पर सवाल
हकीम की टिप्पणी पर कुणाल घोष ने कहा, वरिष्ठ लोग व्याख्यान दे रहे हैं कि युवा नेताओं को पार्टी के इतिहास से सीखना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, जब ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार गईं तब ये नेता क्या कर रहे थे? बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में वर्तमान भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ ममता नंदीग्राम सीट से चुनाव हार गई थीं। बाद में ममता ने अपनी पारंपरिक सीट- भवानीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीतने के बाद विधानसभा पहुंचीं।
TMC में ममता के साथ-साथ अभिषेक की भी जरूरत
टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना करते हुए कुणाल घोष ने सवाल किया कि अभिषेक के खिलाफ नकारात्मक अर्थ का इस्तेमाल क्यों हो रहा है। ऐसा करना अपमानजनक है। ऐसे बयान पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने वाले हैं। तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह या सत्ता को लेकर संघर्ष को लेकर बीते दिसंबर में कुणाल ने कहा था कि पुराने और नई पीढ़ी के टीएमसी नेताओं के बीच कोई संघर्ष नहीं है। पार्टी को ममता बनर्जी और अभिषेक दोनों की जरूरत है।
दो साल पहले शुरू हुआ बदलाव का दौर
बता दें कि तृणमूल के कथित सत्ता संघर्ष की अफवाहों के बीच जनवरी 2022 में ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी का राष्ट्रीय महासचिव पद भंग कर दिया था। नई समिति का गठन होने के बाद से अभिषेक बनर्जी को प्रमुखता दी जा रही है। इतना ही नहीं, उन्हें तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार में भी नंबर दो माना जाता है।
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अभिषेक ने रिटायरमेंट का बयान दिया, शाम में CM से मिलने कालीघाट पहुंचे
दरअसल, विवाद तब सामने आया जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों को उचित सम्मान देने की सलाह दी। उन्होंने इस दावे का खंडन किया कि पुराने नेताओं को सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कार्य कुशलता और उपयोगिता में गिरावट का जिक्र कर, राजनीति में रिटायरमेंट का जिक्र किया। टीएमसी के आंतरिक टकराव के बीच मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। अभिषेक सोमवार शाम लगभग 6 बजे सीएम ममता के कालीघाट आवास पर पहुंचे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अभिषेक के करीबी नेता ने भी दोनों की मुलाकात की पुष्टि की। हालांकि, बैठक का एजेंडा सामने नहीं आया है।
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वरिष्ठ नेताओं के बयान
टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी की आयु 73 साल है। ममता बनर्जी के प्रति वफादारी के लिए चर्चित सुब्रत ने खुलेआम कहा है कि डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक इस साल भी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। टीएमसी मुख्यालय में स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। हमें यकीन है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। अगर वह लड़ते हैं, तो चुनाव ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी के प्रतीक के तहत ही लड़ा जाएगा।
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अभिषेक के करीबी नेता बोले- पार्टी नेता उनकी राय पर ध्यान दें तो बेहतर
इस टिप्पणी पर टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई महासचिव कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कुणाल को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। कुणाल ने कहा कि सुब्रत बख्शी अपने शब्द वापस लें। उन्होंने कहा, 'मैं प्रदेश अध्यक्ष का सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे उनके शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति है। अभिषेक की उम्मीदवारी विचाराधीन है। अगर पार्टी नेता अभिषेक की बातों और उनकी राय पर ध्यान दें तो यह उनके लिए अच्छा होगा।
वरिष्ठ नेताओं की नसीहत - इतिहास से सीखें युवा तृणमूल नेता
इन दो बयानों के बाद ममता बनर्जी के करीबी फिरहाद हाकिम और सुदीप बंद्योपाध्याय की टिप्पणी ने आग में घी जैसी साबित हुई। सुदीप ने कहा, जैसे ही पार्टी सुप्रीमो ममता, पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगी राज्य में सबकुछ अस्त-व्यस्त हो जाएगा। तृणमूल नेता और कोलकाता के मेयर हाकिम ने कहा, पार्टी के नए नेताओं को टीएमसी के संघर्ष के इतिहास से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें लोगों का भरोसा जीतने और प्रभावी राजनीतिक ताकत बनने में कई साल लगे हैं।
सीएम ममता के नंदीग्राम से चुनाव हारने पर सवाल
हकीम की टिप्पणी पर कुणाल घोष ने कहा, वरिष्ठ लोग व्याख्यान दे रहे हैं कि युवा नेताओं को पार्टी के इतिहास से सीखना चाहिए। उन्होंने सवाल किया, जब ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार गईं तब ये नेता क्या कर रहे थे? बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में वर्तमान भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ ममता नंदीग्राम सीट से चुनाव हार गई थीं। बाद में ममता ने अपनी पारंपरिक सीट- भवानीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीतने के बाद विधानसभा पहुंचीं।
TMC में ममता के साथ-साथ अभिषेक की भी जरूरत
टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना करते हुए कुणाल घोष ने सवाल किया कि अभिषेक के खिलाफ नकारात्मक अर्थ का इस्तेमाल क्यों हो रहा है। ऐसा करना अपमानजनक है। ऐसे बयान पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने वाले हैं। तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह या सत्ता को लेकर संघर्ष को लेकर बीते दिसंबर में कुणाल ने कहा था कि पुराने और नई पीढ़ी के टीएमसी नेताओं के बीच कोई संघर्ष नहीं है। पार्टी को ममता बनर्जी और अभिषेक दोनों की जरूरत है।
दो साल पहले शुरू हुआ बदलाव का दौर
बता दें कि तृणमूल के कथित सत्ता संघर्ष की अफवाहों के बीच जनवरी 2022 में ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी का राष्ट्रीय महासचिव पद भंग कर दिया था। नई समिति का गठन होने के बाद से अभिषेक बनर्जी को प्रमुखता दी जा रही है। इतना ही नहीं, उन्हें तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार में भी नंबर दो माना जाता है।