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Voter List: बिहार के बाद अब बंगाल में SIR का डर, मालदा-मुर्शिदाबाद में प्रमाणपत्रों की चिंता; बिचौलिये पैसे...

Sun, 31 Aug 2025 02:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मालदा/मुर्शिदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मालदा/मुर्शिदाबाद Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 31 Aug 2025 02:01 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर डर का माहौल है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोग बड़ी संख्या में जन्मस्थान और जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेज लेने के लिए कार्यालयों में उमड़ रहे हैं। इस स्थिति का बिचौलिये भी खूब फायदा उठा रहे हैं। बिचौलिये लोगों से शपथपत्र बनवाने और उसे ऑनलाइन जमा कराने के नाम पर 1900 रुपये तक वसूल रहे हैं। 
 

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West Bengal Malda and Murshidabad people thronged to get birth certificates due to fear of SIR of voter list
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : चैटजीपीटी

विस्तार

बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का डर है। राज्य के दो सीमावर्ती जिले मालदा और मुर्शिदाबाद में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग बड़ी संख्या में नगरपालिकाओं, ग्राम पंचायतों और स्थानीय अदालतों में जन्मस्थान और जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेज लेने के लिए उमड़ रहे हैं। इसकी वजह विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची अपडेट किए जाने का डर है। 

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मालदा में बिचौलिये लोगों से 1,900 रुपये तक वसूल कर शपथपत्र बनवाने और उसे ऑनलाइन जमा कराने में मदद कर रहे हैं। एक स्थानीय वकील ने बताया कि बिचौलिये एक बार में 50–80 लोगों को अदालत ले जाते हैं। वहीं, साइबर कैफे भी जन्म प्रमाणपत्र की कॉपी बनवाने के लिए लोगों की भीड़ से अच्छा खासा पैसा कमा रहे हैं।  वकील के अनुसार, 'पिछले 15–20 दिनों में यह रुझान तेजी से बढ़ा है और ज्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।'
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कर्मचारियों पर बढ़ा काम का बोझ: चेयरमैन 
इंग्लिश बाजार नगरपालिका के चेयरमैन और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्षद शुभमय बसु ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में जन्म प्रमाणपत्र के लिए दबाव अचानक बढ़ा है, जिससे कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि लोग लगातार आ रहे हैं। लंबी कतारें लग रही हैं, जिन्हें संभालने के लिए अतिरिक्त स्टाफ लगाया है और एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया है। कोशिश है कि किसी का काम अधूरा न रहे।
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मालदा की 146 ग्राम पंचायतों से पहुंच रहे लोग 
एक जिलाधिकारी ने बताया कि मालदा की 146 ग्राम पंचायत क्षेत्रों से लोग आ रहे हैं, जिनमें रतुआ, कालियाचक और सुजापुर जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाके भी शामिल हैं। एक पंचायत अधिकारी ने कहा, 'अब केवल नोटरी पब्लिक का शपथपत्र काफी नहीं है। उसे नगरपालिका चेयरमैन, पंचायत प्रधान और न्यायिक मजिस्ट्रेट से सत्यापित कराना जरूरी है। लोग चाह रहे हैं कि यह काम जल्दी निपट जाए, भले ही उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में दिक्कत क्यों न हो। उनके लिए एसआईआर का समाधान सबसे अहम मुद्दा बन गया है।'

मुर्शिदाबाद जिले के इन क्षेत्रों में लगी भीड़
हालांकि, परदेवनपुर सोभापुर की पूर्व ग्राम प्रधान सुलेखा चौधरी का कहना है कि उनके इलाके में इतना दबाव महसूस नहीं हो रहा। एक जिलाधिकारी ने बताया कि मुर्शिदाबाद जिले के जलांगी, रानीनगर, डोमकल, बेलडांगा, हरीहरपाड़ा, सुती, समशेरगंज और फरक्का इलाकों में भी जन्म प्रमाणपत्र लेने और सुधार कराने की भीड़ देखी जा रही है।

लोगों को बांग्लादेश निर्वासित किए जाने का डर: इस्लाम
बेलडांगा के कांग्रेस पंचायत सदस्य अमीरुल इस्लाम ने कहा, पिछले 15-20 दिनों से बीएलओ, बीडीओ, नगरपालिका और पंचायत कार्यालयों में भीड़ बढ़ी है। लोगों के पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड और अन्य कागजात पहले से हैं, लेकिन वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि मतदाता सूची में उनका नाम बना रहे। उन्होंने कहा कि लोगों को डर है कि कहीं उन्हें बांग्लादेश न भेज दिया जाए, जबकि वे पीढ़ियों से यहीं रह रहे हैं। चाय की दुकानों पर होने वाली चर्चाएं और सोशल मीडिया पर चल रही खबरें भी उनके डर को बढ़ा रही हैं।


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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डरने की जरूरत नहीं
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के मुर्शिदाबाद जिला अध्यक्ष और सांसद अबू ताहेर ने कहा, 'पहले लोग SIR को लेकर चिंतित थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डरने की जरूरत नहीं है। किसी का वोट देने का अधिकार नहीं छीना जाएगा।' उन्होंने कहा कि हम लगातार लोगों को समझा रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने दस्तावेज पूरे रखने की जरूरत है। बंगाल में SIR लागू नहीं होने देंगे। यह भाजपा की विभाजनकारी राजनीति है।

गांवों में बुजुर्ग लोगों में अभी भी डर 
ताहेर ने स्वीकार किया कि गांवों में एक छोटा हिस्सा, खासकर बुजुर्ग लोग, अभी भी डर में हैं, लेकिन हम लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। गौरतलब है कि 27 अगस्त को चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव और जिला प्रशासन को मतदाता सूची संशोधन को लेकर पत्र भेजा है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

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