पश्चिम बंगाल: टीएमसी में अंदरूनी कलह तेज, बागी मंत्री सुवेंदु ने दिया सरकारी निगम से इस्तीफा
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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही अंदरूनी रार तेज हो गई है। कई महीने से विद्रोही रुख दिखा रहे परिवहन मंत्री सुवेंदु अधिकारी ने खुद को मनाने के लिए की जा रही कोशिशों के बीच अचानक हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नरेट (एचआरबीसी) के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी ने भी सख्त रवैया अपनाते हुए बुधवार रात दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर गुरुवार शाम को उनकी जगह सांसद कल्याण बनर्जी को तत्काल प्रभाव से नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया। अधिकारी के पास अब भी मंत्री पद के अलावा सिंचाई विभाग का भी चार्ज मौजूद है।
दरअसल मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को बांकुरा में आयोजित एक रैली में खुद को राज्य के सभी जिलों का इकलौता पार्टी ऑब्जर्वर घोषित किया था। सुवेंदु के करीबी सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों में ऑब्जर्वर की भी जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी को ममता की घोषणा पसंद नहीं आई है और उन्होंने इस्तीफा देकर अपना मौन विरोध प्रकट किया है।
बता दें कि सुवेंदु पिछले कई महीने से पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं और बिना पार्टी के झंडे व बैनर के विभिन्न जिलों में रैलियां आयोजित करने के साथ ही वह राज्य कैबिनेट की बैठकों में भी हिस्सेदारी नहीं कर रहे हैं। हालांकि सुवेंदु या टीएमसी के अन्य नेताओं ने इस्तीफा प्रकरण पर पूरी तरह चुप्पी साधी हुई है। एक वरिष्ठ टीएमसी नेता के मुताबिक, नेतृत्व और सुवेंदु के बीच ‘वार ऑफ नर्व्स’ चालू हो गई है। लेकिन हमें उम्मीद है कि इस स्थिति का हल निकल आएगा।
35 से 40 सीटों पर है सुवेंदु अधिकारी का प्रभाव
बता दें कि सुवेंदु अपने गृह जिले पूर्वी मिदनापुर के अलावा पश्चिमी मिदनापुर, बांकुरा, पुरुलिया, झारग्राम और बीरभूम जिले के कुछ भागों में करीब 35 से 40 विधानसभा सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। ऐसे में अगले साल अप्रैल-मई में संभावित विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टीएमसी पिछले रास्ते से उन्हें मनाने की कोशिश भी कर रही है। इसकी जिम्मेदारी वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपध्याय और सांसद सौगत राय को सौंपी गई है, जो सुवेंदु के साथ दो बार वार्ता कर चुके हैं। लेकिन अभी तक वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।