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Bengal: बंगाल सरकार ने मतदाता सूची से जोड़ी सरकारी योजनाएं, ओवैसी बोले- ये सीएम शुभेंदु की निजी चैरिटी नहीं
Sat, 06 Jun 2026 01:37 PM IST
Devesh Tripathi
एएनआई, हैदराबाद
एएनआई, हैदराबाद
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 06 Jun 2026 01:37 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से केंद्र और राज्य की सरकारी योजनाओं को मतदाता सूची से जोड़ा जा रहा है। इसे लेकर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल की शुभेंदु सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। ओवैसी ने कहा कि राशन या कल्याणकारी योजनाओं का लाभ इस बात पर क्यों निर्भर होना चाहिए कि आपका नाम मतदाता सूची में है या नहीं?
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एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस नीति पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को मतदाता सूची से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान बाहर रखे गए कई वास्तविक मतदाता अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन प्राप्त करने से वंचित किए जा रहे हैं।
ओवैसी ने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार ने कल्याणकारी लाभों को मतदाता सूची से जोड़ दिया है, अब एसआईआर के दौरान बाहर किए गए लोगों को पीडीएस राशन और अन्य लाभों से वंचित कर रही है। इनमें अनुपस्थित या स्थानांतरित के रूप में चिह्नित लोग और वे लोग शामिल हैं जिन्हें पिछले चुनाव के दौरान मतदाता पर्ची नहीं मिली थी। लेकिन इन श्रेणियों के कई लोग वास्तविक मतदाता हैं।"
ओवैसी का सवाल- आधार प्रमाणीकरण का क्या मतलब?
एआईएमआईएम सांसद ने सवाल उठाया, "राशन या कल्याणकारी योजनाओं का लाभ इस बात पर क्यों निर्भर होना चाहिए कि आपका नाम मतदाता सूची में है या नहीं? आधार प्रमाणीकरण का क्या मतलब है अगर मतदाता सूची को निर्णायक कारक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है?"
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पश्चिम बंगाल के वर्तमान कल्याण वितरण मॉडल पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने इस बात पर जवाब मांगा कि मतदाता सूचियों का उपयोग लाभार्थियों की जांच के लिए क्यों किया जा रहा है।
योजनाएं जनता के पैसे से, किसी व्यक्ति की चैरिटी नहीं
ओवैसी ने कहा, "सरकारी योजनाएं मतदाताओं के लिए पुरस्कार नहीं हैं। वे सभी पात्र नागरिकों के लिए हैं। यह कदम सत्यापन जैसा कम और लाभार्थी संख्या में कटौती करने तथा सबसे गरीब लोगों, विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जाति और मुसलमानों के लिए जीवन मुश्किल बनाने की कोशिश जैसा ज्यादा लगता है। सरकार ऐसे काम कर रही है जैसे ये योजनाएं राजकुमार शुभेंदु अधिकारी की निजी चैरिटी हों। ऐसा नहीं है। वे जनता के पैसे से वित्त पोषित हैं और हर पात्र नागरिक का अधिकार हैं।"
मंत्री दिलीप घोष ने योजनाओं के पैसों की लूट का लगाया था आरोप
ओवैसी की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) पतन की ओर बढ़ रही है। घोष ने आरोप लगाया कि पार्टी ने केंद्रीय और राज्य कल्याणकारी योजनाओं से पैसा लूटा है। उसे न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।
पत्रकारों से बात करते हुए घोष ने आरोप लगाया कि टीएमसी के भीतर ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार व्याप्त है और दावा किया कि संगठन धीरे-धीरे ढह रहा है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं ने सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं के धन की हेराफेरी करके अकूत संपत्ति अर्जित की है।
कल्याणकारी योजनाओं पर क्या बोले थे दिलीप घोष?
लक्ष्मी भंडार और अन्नपूर्णा भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर बात करते हुए घोष ने कहा था कि ऐसे लाभों के लिए भारतीय नागरिकता जरूरी है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए हिंदू शरणार्थियों पर लागू होता है, जिन्होंने अभी तक नागरिकता प्राप्त नहीं की है।
उन्होंने कहा, "यह सिर्फ लक्ष्मी भंडार या अन्नपूर्णा जैसी योजनाओं के बारे में नहीं है। भारत सरकार की केंद्र और राज्य सरकारें नागरिकों को जो भी लाभ प्रदान करती हैं, उन्हें प्राप्त करने की पहली शर्त यह है कि वह भारतीय नागरिक होना चाहिए। उन लोगों के लिए जिन्होंने नागरिकता प्राप्त नहीं की है या खो दी है - विशेष रूप से बांग्लादेश या पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी - सीएए है।"
उन्होंने आगे लोगों से ऐसे लाभ प्राप्त करने के लिए पंजीकरण कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अन्यथा गैर-नागरिकों को सरकारी कल्याणकारी लाभों से वंचित कर दिया जाएगा।
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ओवैसी ने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार ने कल्याणकारी लाभों को मतदाता सूची से जोड़ दिया है, अब एसआईआर के दौरान बाहर किए गए लोगों को पीडीएस राशन और अन्य लाभों से वंचित कर रही है। इनमें अनुपस्थित या स्थानांतरित के रूप में चिह्नित लोग और वे लोग शामिल हैं जिन्हें पिछले चुनाव के दौरान मतदाता पर्ची नहीं मिली थी। लेकिन इन श्रेणियों के कई लोग वास्तविक मतदाता हैं।"
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ओवैसी का सवाल- आधार प्रमाणीकरण का क्या मतलब?
एआईएमआईएम सांसद ने सवाल उठाया, "राशन या कल्याणकारी योजनाओं का लाभ इस बात पर क्यों निर्भर होना चाहिए कि आपका नाम मतदाता सूची में है या नहीं? आधार प्रमाणीकरण का क्या मतलब है अगर मतदाता सूची को निर्णायक कारक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है?"
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पश्चिम बंगाल के वर्तमान कल्याण वितरण मॉडल पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने इस बात पर जवाब मांगा कि मतदाता सूचियों का उपयोग लाभार्थियों की जांच के लिए क्यों किया जा रहा है।
योजनाएं जनता के पैसे से, किसी व्यक्ति की चैरिटी नहीं
ओवैसी ने कहा, "सरकारी योजनाएं मतदाताओं के लिए पुरस्कार नहीं हैं। वे सभी पात्र नागरिकों के लिए हैं। यह कदम सत्यापन जैसा कम और लाभार्थी संख्या में कटौती करने तथा सबसे गरीब लोगों, विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जाति और मुसलमानों के लिए जीवन मुश्किल बनाने की कोशिश जैसा ज्यादा लगता है। सरकार ऐसे काम कर रही है जैसे ये योजनाएं राजकुमार शुभेंदु अधिकारी की निजी चैरिटी हों। ऐसा नहीं है। वे जनता के पैसे से वित्त पोषित हैं और हर पात्र नागरिक का अधिकार हैं।"
मंत्री दिलीप घोष ने योजनाओं के पैसों की लूट का लगाया था आरोप
ओवैसी की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) पतन की ओर बढ़ रही है। घोष ने आरोप लगाया कि पार्टी ने केंद्रीय और राज्य कल्याणकारी योजनाओं से पैसा लूटा है। उसे न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।
पत्रकारों से बात करते हुए घोष ने आरोप लगाया कि टीएमसी के भीतर ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार व्याप्त है और दावा किया कि संगठन धीरे-धीरे ढह रहा है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं ने सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं के धन की हेराफेरी करके अकूत संपत्ति अर्जित की है।
कल्याणकारी योजनाओं पर क्या बोले थे दिलीप घोष?
लक्ष्मी भंडार और अन्नपूर्णा भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर बात करते हुए घोष ने कहा था कि ऐसे लाभों के लिए भारतीय नागरिकता जरूरी है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए हिंदू शरणार्थियों पर लागू होता है, जिन्होंने अभी तक नागरिकता प्राप्त नहीं की है।
उन्होंने कहा, "यह सिर्फ लक्ष्मी भंडार या अन्नपूर्णा जैसी योजनाओं के बारे में नहीं है। भारत सरकार की केंद्र और राज्य सरकारें नागरिकों को जो भी लाभ प्रदान करती हैं, उन्हें प्राप्त करने की पहली शर्त यह है कि वह भारतीय नागरिक होना चाहिए। उन लोगों के लिए जिन्होंने नागरिकता प्राप्त नहीं की है या खो दी है - विशेष रूप से बांग्लादेश या पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी - सीएए है।"
उन्होंने आगे लोगों से ऐसे लाभ प्राप्त करने के लिए पंजीकरण कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अन्यथा गैर-नागरिकों को सरकारी कल्याणकारी लाभों से वंचित कर दिया जाएगा।