{"_id":"6a245a954ee1abd6e406b3b5","slug":"west-bengal-government-orders-statewide-madrasa-survey-report-by-july-5-2026-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: मदरसों का होगा राज्यव्यापी सर्वे, पांच जुलाई तक मांगी रिपोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: मदरसों का होगा राज्यव्यापी सर्वे, पांच जुलाई तक मांगी रिपोर्ट
Sat, 06 Jun 2026 11:06 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:06 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी मदरसों के कानूनी दर्जे, बुनियादी ढांचे और दस्तावेजों की जांच के लिए व्यापक सर्वेक्षण का आदेश दिया है। जिलाधिकारियों को पांच जुलाई तक रिपोर्ट सौंपनी होगी। सत्ता परिवर्तन के बाद शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।
विज्ञापन
सीएम शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ ही फैसलों का दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने मदरसों के कामकाज, बुनियादी ढांचे और उनकी कानूनी स्थिति की जांच के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पूरे राज्य में मदरसों के व्यापक सर्वेक्षण का आदेश दिया है। इस संबंध में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा पांच जून को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पांच जुलाई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।
क्यों हो रहा है यह सर्वे?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि सभी संस्थान मौजूदा नियमों के तहत चल रहे हैं या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं। यह कदम पश्चिम बंगाल में 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासन के अंत और भाजपा के सत्ता में आने के ठीक एक महीने बाद उठाया गया है।
अधिसूचना के मुताबिक, जिला प्रशासनों को विभिन्न बिंदुओं पर डाटा एकत्र करने के लिए कहा गया है। इसमें मदरसों के स्थान, स्थापना का वर्ष, पंजीकरण का विवरण और वैध दस्तावेजों की उपलब्धता शामिल है। इसके अलावा छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की संख्या का विवरण भी मांगा गया है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: कर्ज के जाल में कर्नाटक!: बोम्मई ने मांगा श्वेत पत्र, कहा-ठेकेदारों के 23,000 करोड़ अटके; किसान भी बेहाल
भविष्य की नीतियों के लिए नया डाटाबेस
राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कवायद का उद्देश्य एक अद्यतन डाटाबेस तैयार करना है। इससे मदरसा शिक्षा क्षेत्र में भविष्य की योजनाओं को तैयार करने में मदद मिलेगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य विशुद्ध रूप से प्रशासनिक है। सरकार राज्य में मदरसा शिक्षा की एक व्यापक तस्वीर चाहती है। इसी सत्यापित जानकारी के आधार पर भविष्य की नीतियां, छात्र कल्याण के उपाय और रखरखाव से जुड़े फैसले लिए जाएंगे। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करना होगा कि ये संस्थान आवासीय हैं, निजी तौर पर सहायता प्राप्त हैं या बिना सहायता के चल रहे हैं। इसके साथ ही वहां पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों का पूरा विवरण देना होगा।
नियमों का उल्लंघन होने पर होगी जांच
प्रशासनिक सूत्रों के संकेत के अनुसार, समीक्षा के दौरान यदि कोई अनियमितता या अनधिकृत गतिविधियां पाई जाती हैं, तो उनकी अलग से जांच की जाएगी। हालांकि, मदरसों की ओर से अपनाए जा रहे मौजूदा शैक्षणिक ढांचे या पाठ्यक्रम को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। बंगाल में सत्ता बदलने के बाद से शिक्षा क्षेत्र में लगातार कई नीतिगत पहल की जा रही हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में राज्य भर के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ मदरसों में भी सुबह की प्रार्थना के दौरान 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया है।
विज्ञापन
क्यों हो रहा है यह सर्वे?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि सभी संस्थान मौजूदा नियमों के तहत चल रहे हैं या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं। यह कदम पश्चिम बंगाल में 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासन के अंत और भाजपा के सत्ता में आने के ठीक एक महीने बाद उठाया गया है।
विज्ञापन
अधिसूचना के मुताबिक, जिला प्रशासनों को विभिन्न बिंदुओं पर डाटा एकत्र करने के लिए कहा गया है। इसमें मदरसों के स्थान, स्थापना का वर्ष, पंजीकरण का विवरण और वैध दस्तावेजों की उपलब्धता शामिल है। इसके अलावा छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की संख्या का विवरण भी मांगा गया है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: कर्ज के जाल में कर्नाटक!: बोम्मई ने मांगा श्वेत पत्र, कहा-ठेकेदारों के 23,000 करोड़ अटके; किसान भी बेहाल
भविष्य की नीतियों के लिए नया डाटाबेस
राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कवायद का उद्देश्य एक अद्यतन डाटाबेस तैयार करना है। इससे मदरसा शिक्षा क्षेत्र में भविष्य की योजनाओं को तैयार करने में मदद मिलेगी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य विशुद्ध रूप से प्रशासनिक है। सरकार राज्य में मदरसा शिक्षा की एक व्यापक तस्वीर चाहती है। इसी सत्यापित जानकारी के आधार पर भविष्य की नीतियां, छात्र कल्याण के उपाय और रखरखाव से जुड़े फैसले लिए जाएंगे। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करना होगा कि ये संस्थान आवासीय हैं, निजी तौर पर सहायता प्राप्त हैं या बिना सहायता के चल रहे हैं। इसके साथ ही वहां पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों का पूरा विवरण देना होगा।
नियमों का उल्लंघन होने पर होगी जांच
प्रशासनिक सूत्रों के संकेत के अनुसार, समीक्षा के दौरान यदि कोई अनियमितता या अनधिकृत गतिविधियां पाई जाती हैं, तो उनकी अलग से जांच की जाएगी। हालांकि, मदरसों की ओर से अपनाए जा रहे मौजूदा शैक्षणिक ढांचे या पाठ्यक्रम को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। बंगाल में सत्ता बदलने के बाद से शिक्षा क्षेत्र में लगातार कई नीतिगत पहल की जा रही हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में राज्य भर के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ मदरसों में भी सुबह की प्रार्थना के दौरान 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया है।