WB: 1,200 करोड़ के बैंक फ्रॉड का खुलासा, कोलकाता में ज्वैलरी कंपनी और अकाउंटेंट के ठिकानों पर ED की छापेमारी
न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने ज्वैलरी कंपनी के मालिकों, शीर्ष अधिकारियों और कर्मचारियों के आवासों पर तलाशी ली। एजेंसी का कहना है कि इन छापों का मकसद इस धोखाधड़ी से संबंधित महत्वपूर्ण सबूत जुटाना है।
फर्जी कंपनियों के जरिए किया गया 1200 करोड़ का घोटाला
ईडी के मुताबिक, इस धोखाधड़ी में कम से कम 25 बैंकिंग संस्थान शामिल रहे, जिनसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़े पैमाने पर लोन लिए गए। ज्वैलरी कंपनी के प्रबंधन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों का जाल बिछाकर बैंकिंग सिस्टम को धोखा दिया और बिना सुरक्षा के लोन के रूप में भारी रकम हड़प ली।
ईडी की टीमों ने छापों के दौरान कई वित्तीय रिकॉर्ड, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। एजेंसी का कहना है कि ये दस्तावेज यह साबित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि कैसे यह जाल तैयार किया गया था। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच कर रही है। आने वाले दिनों में कंपनी के अधिकारियों और अकाउंटेंट से पूछताछ की जा सकती है।
गुजरात : 100 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी में ईडी ने चार लोग किए गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई साइबर अपराध मामलों में धन शोधन की जांच के तहत गुजरात से चार लोगों को गिरफ्तार किया। ईडी ने शुक्रवार को कहा कि इन मामलों में लोगों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई थी। धन शोधन का यह मामला सूरत पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) के अक्तूबर 2024 में दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है।
संघीय जांच एजेंसी के सूरत उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मकबूल अब्दुल रहमान डॉक्टर, काशिफ मकबूल डॉक्टर, महेश मफतलाल देसाई और ओम राजेंद्र पांड्या को हिरासत में लिया। ईडी का आरोप है कि मकबूल डॉक्टर, उसके बेटे काशिफ मकबूल, बासम मकबूल, देसाई, पांड्या और कुछ अन्य लोगों ने साइबर धोखाधड़ी से भोले-भाले लोगों को धोखा दिया। आरोपियों ने डिजिटल गिरफ्तारी, विदेशी मुद्रा व्यापार, ईडी जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फर्जी नोटिस भेजकर निर्दोष व्यक्तियों को धमकाया और उनसे पैसे ऐंठे। यही नहीं, आरोपियों ने अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और कुछ भाड़े के लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले ताकि अपराध से हुई 100 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी को इकट्ठा की जा सके। ब्यूरो
ईडी ने बताया कि आरोपियों ने इन बैंक खातों को संचालित करने के लिए पहले से सक्रिय सिम कार्ड हासिल किए और बाद में जांच से बचने के लिए पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदल कर हवाला ऑपरेटरों के जरिए नकदी का धन शोधन किया।