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Bengal: शांतनु सिन्हा के बाद अब ईडी ने सोना पप्पू को किया गिरफ्तार, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नौ घंटे की पूछताछ
Tue, 19 May 2026 01:02 AM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 19 May 2026 01:02 AM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या प्रभावशाली व्यक्तियों या अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सिंडिकेट से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन को सुविधाजनक बनाया था। गौरतलब है कि सोना पप्पू मामले में ईडी की ओर से लगातार कार्रवाई जारी है।
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार रात दक्षिण कोलकाता में कथित अवैध भूमि सौदों और जबरन वसूली से जुड़े धन शोधन मामले की मैराथन पूछताछ के बाद बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी मामले में कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की ईडी द्वारा गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद हुई है।
लगभग तीन महीने से फरार चल रहे पोद्दार ने सोमवार को सॉल्ट लेक स्थित सी.जी.ओ. कॉम्प्लेक्स में संघीय जांच एजेंसी के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। लगभग नौ घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान सहयोग न करने का मामला भी सामने आया है।
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पोद्दार के खिलाफ जारी किए गए थे पांच समन
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, पोद्दार को पहले भी कोलकाता के कासबा, तिल्जाला और टॉप्सिया जैसे क्षेत्रों में कथित भूमि हड़पने, जबरन वसूली और अवैध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जांच के सिलसिले में पांच समन जारी किए गए थे।
जांचकर्ताओं का दावा है कि उन्हें पोद्दार के साथ गिरफ्तार कोलकाता पुलिस के बर्खास्त डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और व्यवसायी जॉय एस. कामदार के बीच सीधे वित्तीय संबंधों के सबूत मिले हैं। ईडी ने बिस्वास को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया था, जबकि कामदार को अप्रैल में पकड़ा गया था।
पोद्दार ने आरोपों से किया इनकार
ईडी कार्यालय में जाने से पहले पोद्दार ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं किसी भी भूमि-कब्जाने गतिविधि में शामिल नहीं हूं। मेरे खिलाफ कोई पुलिस शिकायत नहीं है।" ईडी अधिकारियों का आरोप है कि 'सोना पप्पू' दक्षिण कोलकाता के कई हिस्सों में जबरन वसूली और भूमि संबंधी धमकियों में शामिल एक संगठित सिंडिकेट का संचालन करता था।
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पोद्दार की क्राइम कुंडली
पोद्दार का नाम पहली बार 2015 में बल्लीगंज रेल यार्ड में हुई एक हिंसक झड़प के संबंध में प्रमुखता से सामने आया था। जांचकर्ताओं ने बताया कि बाद में उनके खिलाफ कई आपराधिक आरोप सामने आए, जिनमें 2017 में एक हत्या का मामला और 2021 में प्रेसीडेंसी जेल के बाहर प्रतिद्वंद्वी मुन्ना पांडे पर कथित हमला शामिल है।
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लगभग तीन महीने से फरार चल रहे पोद्दार ने सोमवार को सॉल्ट लेक स्थित सी.जी.ओ. कॉम्प्लेक्स में संघीय जांच एजेंसी के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। लगभग नौ घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान सहयोग न करने का मामला भी सामने आया है।
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पोद्दार के खिलाफ जारी किए गए थे पांच समन
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, पोद्दार को पहले भी कोलकाता के कासबा, तिल्जाला और टॉप्सिया जैसे क्षेत्रों में कथित भूमि हड़पने, जबरन वसूली और अवैध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जांच के सिलसिले में पांच समन जारी किए गए थे।
जांचकर्ताओं का दावा है कि उन्हें पोद्दार के साथ गिरफ्तार कोलकाता पुलिस के बर्खास्त डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और व्यवसायी जॉय एस. कामदार के बीच सीधे वित्तीय संबंधों के सबूत मिले हैं। ईडी ने बिस्वास को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया था, जबकि कामदार को अप्रैल में पकड़ा गया था।
पोद्दार ने आरोपों से किया इनकार
ईडी कार्यालय में जाने से पहले पोद्दार ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं किसी भी भूमि-कब्जाने गतिविधि में शामिल नहीं हूं। मेरे खिलाफ कोई पुलिस शिकायत नहीं है।" ईडी अधिकारियों का आरोप है कि 'सोना पप्पू' दक्षिण कोलकाता के कई हिस्सों में जबरन वसूली और भूमि संबंधी धमकियों में शामिल एक संगठित सिंडिकेट का संचालन करता था।
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पोद्दार की क्राइम कुंडली
पोद्दार का नाम पहली बार 2015 में बल्लीगंज रेल यार्ड में हुई एक हिंसक झड़प के संबंध में प्रमुखता से सामने आया था। जांचकर्ताओं ने बताया कि बाद में उनके खिलाफ कई आपराधिक आरोप सामने आए, जिनमें 2017 में एक हत्या का मामला और 2021 में प्रेसीडेंसी जेल के बाहर प्रतिद्वंद्वी मुन्ना पांडे पर कथित हमला शामिल है।
West Bengal, ED, Biswajit Poddar, Sona Pappu case, land grabbing, extortion, money