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सबरीमाला मंदिर में हेराफेरी?: बिना बिल वर्षों से निकाले जा रहे थे पैसे, अब केरल हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
Tue, 19 May 2026 12:27 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
पीटीआई, कोच्चि
पीटीआई, कोच्चि
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 19 May 2026 12:27 AM IST
सार
केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 'अष्टभिषेकम' पूजा से जुड़े वित्तीय घपले पर सख्त रुख अपनाया है। विजिलेंस जांच में सामने आया है कि पिछले एक दशक से पूजा सामग्री के नाम पर बिना बिल के लाखों रुपये निकाले जा रहे हैं। कोर्ट ने पिछले 10 साल के खातों का ऑडिट करने का आदेश दिया है।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में पूजा-पाठ और उससे जुड़े सामान की खरीद में बड़ी पैसों की हेराफेरी का मामला सामने आया है। केरल हाईकोर्ट ने इस मामले को बहुत ही गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने मंदिर प्रशासन और पूजा के काम में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर बड़े सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा है कि यह मामला सीधे तौर पर जनता के पैसे और मंदिर के प्रशासन के गलत इस्तेमाल से जुड़ा है। इसलिए अदालत ने इस पूरे मामले और खातों की बहुत ही गहराई से जांच (ऑडिट) करने के सख्त आदेश दिए हैं।
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अदालत को एक श्रद्धालु ने शिकायत दी थी कि पहाड़ी पर स्थित इस पवित्र मंदिर में कई वर्षों से गलत तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसके बाद मामले की शुरुआती विजिलेंस जांच की गई। इस जांच में पता चला कि 'अष्टभिषेकम' पूजा के नाम पर पिछले एक दशक (दस साल) से ज्यादा समय से सप्लायर के खर्चों का गलत तरीके से पैसा निकाला जा रहा है। बिना किसी पक्के बिल या वाउचर के ही पूजा के सामान के पैसे लिए जा रहे हैं। विजिलेंस रिपोर्ट के मुताबिक यह सब वर्षों से चल रहा है और कई प्रशासनिक अधिकारियों ने सप्लायर खर्च के नाम पर बड़ी रकम अपनी जेब में डाली है।
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अष्टभिषेकम पूजा के सामान में कैसे हुआ बड़ा खेल?
विजिलेंस की जांच में यह साफ हुआ है कि अष्टभिषेकम पूजा के लिए कुल आठ चीजों की जरूरत होती है। इनमें से पांच चीजें देवस्वोम (मंदिर प्रशासन) के स्टोर से ही मिल जाती हैं। बाकी की तीन चीजें जिनमें दूध, नारियल पानी और गुलाब जल शामिल हैं, उन्हें बाहर से खरीदा जाता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी आठ चीजों के लिए 300 रुपये का खर्च दिखाया जा रहा है। स्टोर से पांच चीजें मुफ्त में मिलने के बावजूद, बिना किसी बिल या पक्के कागज के पूरी रकम पूजा के सप्लायर खर्च के रूप में ली जा रही है। केवल अगस्त 2024 से मार्च 2026 तक की छह 'मासा पूजा' के खातों को ही देखें तो यह घपला 5.15 लाख रुपये का है। इसमें बड़े मंडला-मकरविलक्कू सीजन को तो जोड़ा ही नहीं गया है।
सुनील कुमार नाम के शख्स से बिना जांच के क्यों लिया जा रहा सामान?
विजिलेंस ने अपनी जांच में एक और बड़ा खुलासा किया है। सुनील कुमार नाम का एक व्यक्ति (जिसे सुनील स्वामी भी कहा जाता है) मंदिर में पूजा का सामान सप्लाई करता है। यह सामान प्रशासनिक अधिकारी के कमरे में रखा जाता है, लेकिन देवस्वोम के रिकॉर्ड में इसकी कोई एंट्री नहीं होती। इस सप्लायर को कोई रसीद भी नहीं दी जाती। सबसे बड़ी बात यह है कि सुनील कुमार जो सामान देता है, उसकी शुद्धता और क्वालिटी की कभी कोई जांच नहीं की गई। रिपोर्ट बताती है कि सुनील कुमार ने मासा पूजा के दौरान लगभग 3 लाख रुपये और मंडला-मकरविलक्कू सीजन में लगभग 18 लाख रुपये का सामान सप्लाई किया। सबरीमाला जैसे बड़े मंदिर में बिना किसी पारदर्शी तरीके के एक ही व्यक्ति से लगातार सामान लेना भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही को बढ़ावा देता है।
केरल हाईकोर्ट ने टीडीबी को क्या सख्त निर्देश दिए हैं?
अदालत ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के वकील को बहुत कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि बोर्ड ने किस अधिकार और नियम के तहत सुनील कुमार को इतने लंबे समय तक मंदिर में सामान सप्लाई करने की छूट दी। इसके साथ ही, कोर्ट ने बोर्ड से एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में यह बताने को कहा गया है कि स्टोर खरीद नियमों के तहत पूजा का सामान खरीदने की क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हालांकि, टीडीबी ने इन आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि वह इस पर अपना विस्तृत जवाब अदालत में दाखिल करेगा।
अदालत ने सबरीमाला मंदिर में काम कर रहे बड़े अधिकारियों की तैनाती पर भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने टीडीबी से मंदिर में तैनात कार्यकारी अधिकारी, सहायक कार्यकारी अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, विशेष अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यकाल की पूरी रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि यह बात सामने आई है कि कुछ अधिकारी बहुत लंबे समय से 'सन्निधानम' में एक ही पद पर जमे हुए हैं। संवेदनशील पदों पर इस तरह का कब्जा मंदिर के अच्छे, पारदर्शी और साफ-सुथरे प्रशासन के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
28 मई को होगी अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने ऑडिट विभाग को भी कड़े आदेश जारी किए हैं। अदालत ने केरल राज्य ऑडिट विभाग के निदेशक को निर्देश दिया है कि वे पिछले दस वर्षों के दौरान अष्टभिषेकम पूजा से जुड़े सभी खातों की गहराई से जांच करें। ऑडिट विभाग को अदालत में यह रिपोर्ट देनी होगी कि क्या इन गलत तौर-तरीकों की वजह से टीडीबी को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। इसके साथ ही, इस पूरी हेराफेरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने को भी कहा गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 मई को होगी।