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Hindi News ›   India News ›   Pune GBS Outbreak: Campylobacter and Norovirus Found in Water and Poultry Samples

पुणे में 12 मौतों वाले जीबीएस प्रकोप का बड़ा खुलासा: दस्त के बाद बढ़ा था खतरा, पानी-मुर्गियों में मिले संक्रमण

Himanshu Mishra हिमांशु अरविंद मिश्र
Updated Tue, 06 Oct 2026 07:49 PM IST
सार

पुणे में 2025 के जीबीएस प्रकोप की जांच में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी और नोरोवायरस संक्रमण की भूमिका सामने आई है। पानी और मुर्गियों के नमूनों में भी दोनों संक्रमण मिले।

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Pune GBS Outbreak: Campylobacter and Norovirus Found in Water and Poultry Samples
गिलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

पुणे में 2025 की शुरुआत में फैले गिलियन-बैरे सिंड्रोम यानी जीबीएस के बड़े प्रकोप का राज खुल गया है। आईसीएमआर की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की जांच में इसके पीछे संक्रमणों की अहम भूमिका सामने आई है। जनवरी से मार्च 2025 के बीच 230 लोगों में जीबीएस मिला था और 12 लोगों की मौत हुई थी। जांच में करीब आधे जांचे गए मरीजों में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी संक्रमण मिला। इसके अलावा पांचवें हिस्से से ज्यादा मरीजों में नोरोवायरस पाया गया।

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शोधकर्ताओं को पानी के नमूनों और मुर्गियों के नमूनों में भी इन संक्रमणों के सबूत मिले। जीबीएस एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से नसों पर हमला करने लगती है। इससे हाथ-पैरों में कमजोरी और लकवे जैसी स्थिति होती है। पुणे में सामने आए मामलों की जांच से पता चला कि प्रकोप से पहले बड़ी संख्या में लोगों को दस्त की समस्या हुई थी।
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63 फीसदी मरीजों को पहले हुई थी बीमारी, सबसे ज्यादा दस्त
जांच में शामिल 230 मरीजों में से 147 यानी 63.9 फीसदी ने जीबीएस से पहले किसी बीमारी की जानकारी दी थी। इनमें सबसे आम समस्या दस्त थी। करीब 37 फीसदी मरीजों में दस्त की शिकायत सामने आई। 193 मरीजों की जांच में 108 यानी 56 फीसदी मामलों में किसी न किसी संक्रमण का संबंध मिला। इनमें कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी सबसे प्रमुख था। 148 मरीजों की जांच में 72 यानी 48.7 फीसदी में इसका संक्रमण मिला। नोरोवायरस भी बड़ी संख्या में मिला। 180 मरीजों की जांच में 40 यानी 22.2 फीसदी में नोरोवायरस पाया गया। इनमें 19 मरीजों में यह किसी दूसरे संक्रमण के साथ मिला, जबकि 21 में यह अकेला संक्रमण था।
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पानी और मुर्गियों की जांच में भी मिले दोनों संक्रमण
शोधकर्ताओं ने सिर्फ मरीजों की जांच नहीं की। संक्रमण के संभावित स्रोत का पता लगाने के लिए पानी और मुर्गियों के नमूने भी लिए गए। 208 पानी के नमूनों में एक में कैम्पिलोबैक्टर और आठ में नोरोवायरस मिला। इसके अलावा 66 मुर्गियों के मल के नमूनों की जांच में 24 में कैम्पिलोबैक्टर और पांच में नोरोवायरस मिला। नौ पानी के नमूनों की अलग से जांच में किसी विषैले पदार्थ का सबूत नहीं मिला। इन नतीजों के आधार पर शोधकर्ताओं ने माना कि जीबीएस का यह प्रकोप एक ही संक्रमण से नहीं, बल्कि कई संक्रमणों से जुड़ा था। कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी सबसे प्रमुख संक्रमण रहा। दूषित पानी में दोनों संक्रमण मिलने और मुर्गियों में भी इनके पाए जाने से पानी और भोजन के रास्ते संक्रमण पहुंचने की संभावना सामने आई है। जीबीएस खुद एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाली बीमारी नहीं है। इसमें कुछ संक्रमणों के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता नसों पर हमला करने लगती है।

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