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West Bengal: क्या बंगाल भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं? दिलीप घोष के पोस्ट से गरमाया चर्चाओं का बाजार
Sat, 08 Jun 2024 06:21 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 08 Jun 2024 06:21 PM IST
सार
दिलीप घोष ने हाल ही में कहा था कि पार्टी द्वारा पुराने नेताओं को उनके लोकसभा क्षेत्रों से हटाकर नए क्षेत्रों से चुनाव लड़ाना एक गलती थी। बंगाल में भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा और पिछले लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा ने बंगाल में 18 सीटें जीतीं थी तो इस बार भाजपा के सांसदों का आंकड़ा घटकर 12 ही रह गया है।
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दिलीप घोष
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
पश्चिम बंगाल भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं लग रहा है। दरअसल लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के नेताओं ने ही प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अब पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद दिलीप घोष ने भी एक ऐसा पोस्ट किया है, जिसे उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। दिलीप घोष ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा ओल्ड इज गोल्ड (पुराना ही सबसे अच्छा है)।
दिलीप घोष ने खुलकर जताई नाराजगी
गौरतलब है कि दिलीप घोष ने हाल ही में कहा था कि पार्टी द्वारा पुराने नेताओं को उनके लोकसभा क्षेत्रों से हटाकर नए क्षेत्रों से चुनाव लड़ाना एक गलती थी। बंगाल में भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा और पिछले लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा ने बंगाल में 18 सीटें जीतीं थी तो इस बार भाजपा के सांसदों का आंकड़ा घटकर 12 ही रह गया है। भाजपा को उम्मीद थी कि वह इस बार बंगाल से अच्छी तादाद में सीटें जीतेगी और पार्टी ने राज्य में 30 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। हालांकि पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन को भी दोहराने में नाकामयाब रही और सिर्फ 12 सीटों पर सिमटकर रह गई।
सीटें बदलने का फैसला रहा गलत
दिलीप घोष 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की मेदिनीपुर सीट से सांसद चुने गए थे, लेकिन उन्हें इस बार मेदिनीपुर की जगह बर्धमान-दुर्गापुर सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया। हालांकि यह दांव उल्टा पड़ा और टीएमसी के कीर्ति आजाद के सामने दिलीप घोष को 1.38 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। दिलीप घोष ने खुलकर इस पर नाराजगी जाहिर की और इसे गलत फैसला करार दिया। इसी तरह बर्धमान -दुर्गापुर से पूर्व में जीतने वाले एसएस अहलूवालिया को आसनसोल से चुनाव मैदान में उतारा गया, उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। आसनसोल दक्षिण सीट से चुनाव लड़ने वाली अग्निमित्रा पॉल को मेदिनीपुर से चुनाव लड़ाया गया, लेकिन ये तीनों नेता चुनाव हार गए। दिलीप घोष ने हार को लेकर बंगाल भाजपा के नेतृत्व पर सवाल उठाए। अभी बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार हैं और सुकांत ने दिलीप घोष से ही बंगाल भाजपा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी।
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नवनिर्वाचित सांसदों के साथ ममता बनर्जी की बैठक
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों के साथ बैठक की। बैठक में लोकसभा चुनाव की समीक्षा की गई। इस बार के आम चुनाव में बंगाल में टीएमसी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और पार्टी ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने नवनिर्वाचित सांसदों से मुलाकात की। इस मुलाकात में सांसदों को उनकी भूमिका और लोकसभा में पार्टी की क्या रणनीति रहेगी, इसके बारे में जानकारी दी गई। टीएमसी जल्द ही पार्टी के लोकसभा नेता के नाम का एलान कर सकती है।
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दिलीप घोष ने खुलकर जताई नाराजगी
गौरतलब है कि दिलीप घोष ने हाल ही में कहा था कि पार्टी द्वारा पुराने नेताओं को उनके लोकसभा क्षेत्रों से हटाकर नए क्षेत्रों से चुनाव लड़ाना एक गलती थी। बंगाल में भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा और पिछले लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा ने बंगाल में 18 सीटें जीतीं थी तो इस बार भाजपा के सांसदों का आंकड़ा घटकर 12 ही रह गया है। भाजपा को उम्मीद थी कि वह इस बार बंगाल से अच्छी तादाद में सीटें जीतेगी और पार्टी ने राज्य में 30 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। हालांकि पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन को भी दोहराने में नाकामयाब रही और सिर्फ 12 सीटों पर सिमटकर रह गई।
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सीटें बदलने का फैसला रहा गलत
दिलीप घोष 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की मेदिनीपुर सीट से सांसद चुने गए थे, लेकिन उन्हें इस बार मेदिनीपुर की जगह बर्धमान-दुर्गापुर सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया। हालांकि यह दांव उल्टा पड़ा और टीएमसी के कीर्ति आजाद के सामने दिलीप घोष को 1.38 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। दिलीप घोष ने खुलकर इस पर नाराजगी जाहिर की और इसे गलत फैसला करार दिया। इसी तरह बर्धमान -दुर्गापुर से पूर्व में जीतने वाले एसएस अहलूवालिया को आसनसोल से चुनाव मैदान में उतारा गया, उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। आसनसोल दक्षिण सीट से चुनाव लड़ने वाली अग्निमित्रा पॉल को मेदिनीपुर से चुनाव लड़ाया गया, लेकिन ये तीनों नेता चुनाव हार गए। दिलीप घोष ने हार को लेकर बंगाल भाजपा के नेतृत्व पर सवाल उठाए। अभी बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार हैं और सुकांत ने दिलीप घोष से ही बंगाल भाजपा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी।
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नवनिर्वाचित सांसदों के साथ ममता बनर्जी की बैठक
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों के साथ बैठक की। बैठक में लोकसभा चुनाव की समीक्षा की गई। इस बार के आम चुनाव में बंगाल में टीएमसी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और पार्टी ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने नवनिर्वाचित सांसदों से मुलाकात की। इस मुलाकात में सांसदों को उनकी भूमिका और लोकसभा में पार्टी की क्या रणनीति रहेगी, इसके बारे में जानकारी दी गई। टीएमसी जल्द ही पार्टी के लोकसभा नेता के नाम का एलान कर सकती है।