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West Bengal: 20 दिन में तैयार हुआ दूधिया बेली ब्रिज, मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण; शुभेंदु ने की किसकी तारीफ?
सार
राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से दार्जिलिंग और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था अधिक मजबूत होगी, आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेजी से संचालित किए जा सकेंगे तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा।
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दूधिया बेली ब्रिज
- फोटो : डिजिटल ब्यूरो
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विस्तार
उत्तर बंगाल के पर्वतीय क्षेत्रों में हालिया प्राकृतिक आपदा के बाद संपर्क व्यवस्था बहाल करने की दिशा में पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बलासन नदी पर बने दूधिया बेली ब्रिज को जनता को समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कोलकाता स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय नवान्न से इस पुल का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, आपात सेवाओं और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।
इस मौके पर दार्जिलिंग के भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू विष्ट और पहाड़ के विधायक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार भारी बारिश और बलासन नदी के तेज बहाव में पुराना पुल बह जाने के बाद दूधिया, मिरिक और दार्जिलिंग के बीच संपर्क लगभग टूट गया था। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आपात सेवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था तत्काल स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर, राज्य के लोक निर्माण विभाग और दार्जिलिंग जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से महज 20 दिनों के भीतर बेली ब्रिज का निर्माण पूरा कर उसे जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस कार्य में जुटे सेना के इंजीनियरों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए इसे आपदा के समय त्वरित समन्वय और प्रभावी प्रशासन का उदाहरण बताया।
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पहाड़ों के लिए स्थायी आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की तैयारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार स्थायी बचाव एवं राहत दल का गठन करेगी। इसके साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाएगा और दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष मार्च तक सैनिक बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिकों को संविदा के आधार पर नियुक्त कर आपदा और आपात स्थितियों से निपटने के कार्यों में लगाया जाएगा। इसके अलावा भविष्य में सिविल डिफेंस के तहत एक विशेष "अग्निवीर" बल गठित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
दार्जिलिंग के लिए नई सड़क और वैकल्पिक राजमार्ग
मुख्यमंत्री ने दार्जिलिंग शहर की लंबे समय से चली आ रही यातायात समस्या को दूर करने के लिए नई सर्कुलर रोड के निर्माण को मंजूरी देने की घोषणा की। साथ ही दार्जिलिंग के लिए वैकल्पिक राजमार्ग परियोजना पर तेजी से काम चलने की जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि रोहिणी रोड के रखरखाव और उन्नयन की पूरी जिम्मेदारी अब राज्य का लोक निर्माण विभाग संभालेगा, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों की संपर्क व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
सेना और प्रशासन के समन्वय की सराहना
उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने मुख्यमंत्री के त्वरित निर्णय और प्रशासनिक पहल के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बलासन नदी पर संपर्क बहाली के लिए सरकार की तत्परता ने पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को राहत पहुंचाई है। राजू बिस्ता ने भारतीय सेना, विशेष रूप से पूर्वी कमान की इंजीनियरिंग टीमों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना नागरिक प्रशासन और सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग के लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्रों के विकास के लिए यह पहल एक नई दिशा प्रदान करेगी।
आपदा से विकास की ओर
राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से दार्जिलिंग और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था अधिक मजबूत होगी, आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेजी से संचालित किए जा सकेंगे तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि वह शीघ्र ही पर्वतीय क्षेत्रों का दौरा करेंगे और वहां के लिए कुछ और विकास परियोजनाओं की घोषणा करेंगे।
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इस मौके पर दार्जिलिंग के भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू विष्ट और पहाड़ के विधायक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार भारी बारिश और बलासन नदी के तेज बहाव में पुराना पुल बह जाने के बाद दूधिया, मिरिक और दार्जिलिंग के बीच संपर्क लगभग टूट गया था। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आपात सेवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था तत्काल स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
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उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर, राज्य के लोक निर्माण विभाग और दार्जिलिंग जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से महज 20 दिनों के भीतर बेली ब्रिज का निर्माण पूरा कर उसे जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस कार्य में जुटे सेना के इंजीनियरों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए इसे आपदा के समय त्वरित समन्वय और प्रभावी प्रशासन का उदाहरण बताया।
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पहाड़ों के लिए स्थायी आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की तैयारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार स्थायी बचाव एवं राहत दल का गठन करेगी। इसके साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाएगा और दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष मार्च तक सैनिक बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिकों को संविदा के आधार पर नियुक्त कर आपदा और आपात स्थितियों से निपटने के कार्यों में लगाया जाएगा। इसके अलावा भविष्य में सिविल डिफेंस के तहत एक विशेष "अग्निवीर" बल गठित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
दार्जिलिंग के लिए नई सड़क और वैकल्पिक राजमार्ग
मुख्यमंत्री ने दार्जिलिंग शहर की लंबे समय से चली आ रही यातायात समस्या को दूर करने के लिए नई सर्कुलर रोड के निर्माण को मंजूरी देने की घोषणा की। साथ ही दार्जिलिंग के लिए वैकल्पिक राजमार्ग परियोजना पर तेजी से काम चलने की जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि रोहिणी रोड के रखरखाव और उन्नयन की पूरी जिम्मेदारी अब राज्य का लोक निर्माण विभाग संभालेगा, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों की संपर्क व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
सेना और प्रशासन के समन्वय की सराहना
उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने मुख्यमंत्री के त्वरित निर्णय और प्रशासनिक पहल के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बलासन नदी पर संपर्क बहाली के लिए सरकार की तत्परता ने पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को राहत पहुंचाई है। राजू बिस्ता ने भारतीय सेना, विशेष रूप से पूर्वी कमान की इंजीनियरिंग टीमों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना नागरिक प्रशासन और सेना के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग के लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्रों के विकास के लिए यह पहल एक नई दिशा प्रदान करेगी।
आपदा से विकास की ओर
राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से दार्जिलिंग और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था अधिक मजबूत होगी, आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेजी से संचालित किए जा सकेंगे तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि वह शीघ्र ही पर्वतीय क्षेत्रों का दौरा करेंगे और वहां के लिए कुछ और विकास परियोजनाओं की घोषणा करेंगे।