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West Bengal: सीएए लागू होते ही प. बंगाल के मतुआ समुदाय ने मनाया जश्न, कहा-हमारे लिए स्वतंत्रता दिवस

Tue, 12 Mar 2024 07:21 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: यशोधन शर्मा Updated Tue, 12 Mar 2024 07:21 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल में इस समुदाय के लोगों की अनुमानित आबादी करीब 30 लाख है। नादिया और बांग्लादेश की सीमा से सटे उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिलों की 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर यह समुदाय किसी भी राजनीतिक दल की किस्मत का फैसला करता है।

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West Bengal CAA implemented Matua community of Bengal
मतुआ समुदाय ने मनाया जश्न - फोटो : ANI

विस्तार

नागरिकता संशोधन कानून लागू होने के बाद सबसे अधिक खुशी पश्चिम बंगाल के मतुआ समुदाय और असम व पूर्वोत्तर में बांग्लादेश से आए बंगाली समुदाय में मनाई जा रही है। बंगाल के मतुआ समुदाय ने सीएए लागू होने पर सोमवार को उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर स्थित अपने मुख्यालय में जश्न मनाया। समुदाय के लोगों ने कहा, हमारे लिए तो यह एक तरह से ‘दूसरा स्वतंत्रता दिवस’ है।
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समुदाय के सदस्यों ने ढोल बजाकर और एक-दूसरे का अभिवादन कर जश्न मनाया तथा सीएए लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के रहने वाले मतुआ समुदाय के लोग विभाजन और बांग्लादेश के निर्माण के बाद भारत आ गए थे। मतुआ समुदाय को हिंदुओं का एक कमजोर तबका माना जाता है।
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पश्चिम बंगाल में इस समुदाय के लोगों की अनुमानित आबादी करीब 30 लाख है। नादिया और बांग्लादेश की सीमा से सटे उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिलों की 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर यह समुदाय किसी भी राजनीतिक दल की किस्मत का फैसला करता है। कभी टीएमसी के समर्थक रहे मतुआ समुदाय के सदस्यों ने 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन किया था। 
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सीएए से संबंधित खास बातें
  • दिसंबर, 2019 में संसद में पारित हुआ, राष्ट्रपति ने मंजूरी दी, किसी भी कानून के नियम राष्ट्रपति की मंजूरी के छह महीने में तैयार किए जाने चाहिए।
  • देशभर में विरोध प्रदर्शन के चलते तब कानून लागू नहीं हुआ, नियमों को अंतिम रूप देने में गृह मंत्रालय ने नौ बार समय ली।
  • गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिखाना होगा।
  • आवेदन करने वालों को 31 दिसंबर, 2014 से कम से कम पांच साल पहले से भारत में होना चाहिए।

भारतीयता और करुणा का सच्चा प्रतिबिंब: प्रधान
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सीएए लागू कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि जो वो कहते हैं, वो करते हैं। यही मोदी गारंटी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट में प्रधान ने कहा कि सीएए को लागू करना भारतीयता और उसके करुणा, सद्भाव, का सच्चा प्रतिबिंब है।


मानवता के कल्याण के लिए ऐतिहासिक: योगी
नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करने का केंद्र सरकार का कदम पीड़ित मानवता के कल्याण के लिए ऐतिहासिक निर्णय है। इससे मजहबी बर्बरता से पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के सम्मानजनक जीवन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

1,414 विदेशियों को नागरिकता
गृह मंत्रालय की 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एक अप्रैल 2021 से 31 दिसंबर 2021 तक इन तीन देशों के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के कुल 1,414 विदेशियों को भारतीय नागरिकता दी गई। वे नौ राज्य जहां पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत पंजीकरण या देशीयकरण द्वारा भारतीय नागरिकता दी जाती है उनमें गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र शामिल हैं।
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