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WB: हिंसा प्रभावित बेलडांगा जा रहे थे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, पुलिस ने बेड़े को बीच में ही रोका, हिरासत में लिया
Wed, 20 Nov 2024 02:54 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 20 Nov 2024 02:54 PM IST
सार
बेलडांगा में दो समुदायों के बीच हुई हिंसा में 17 लोग घायल हुए हैं। यह हिंसा शनिवार रात को तब भड़क उठी थी, जब कार्तिक पूजा के दौरान बनाए गए अस्थायी दरवाजे के बोर्ड पर आपत्तिजनक शब्द लिखे मिले थे। पुलिस ने हिंसा के बाद निषेधाज्ञा लागू कर दी थी और इलाके में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया।
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बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार।
- फोटो : PTI
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में 16 नवंबर को दो समूहों के बीच हुई झड़प का मुद्दा गरमा गया है। खासकर राजनीतिक स्तर पर हर तरफ इसकी चर्चा है। इस बीच बंगाल भाजपा के अध्यक्ष बुधवार को जब बेलडांगा जा रहे थे, तब उनके बेडे़ को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। जब उन्होंने इसे लेकर सड़क पर ही धरना शुरू किया, तो पुलिस ने सुकांत को उनके समर्थकों के साथ हिरासत में ले लिया।
इससे पहले सुकांत ने पुलिस के खिलाफ धरना देते हुए कहा था कि उन्हें अवैध तरीके से रोका गया। उन्हें एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोका गया है, जो कि अवैध है। उन्होंने कहा था कि वह बेलडांगा में भारत सेवाश्रम संघ के महाराज से मिलने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि पुलिस ममता बनर्जी के आदेश पर काम कर रही है।
बेलडांगा में दो समुदायों के बीच हुई हिंसा में 17 लोग घायल हुए हैं। यह हिंसा शनिवार रात को तब भड़क उठी थी, जब कार्तिक पूजा के दौरान बनाए गए अस्थायी दरवाजे के बोर्ड पर आपत्तिजनक शब्द लिखे मिले थे। पुलिस ने हिंसा के बाद निषेधाज्ञा लागू कर दी थी और इलाके में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया।
क्षेत्र के हालात देखने जा रहे भाजपा नेता को पुलिस ने यह कहकर रोका कि वहां अभी प्रतिबंध लागू हैं और उनका दौरा अशांति पैदा कर सकता है। भाजपा नेता के काफिले को रोकने के लिए नादिया जिले के कृष्णानगर में बड़ी संख्या में पुलिसबल मौजूद रहा। इसके बाद सुकांत ने वहीं पर धरना शुरू कर दिया।
मजूमदार ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "पुलिस ने कहा कि वहां निषेधाज्ञा लागू है, इसलिए मैं वहां नहीं जा सकता। उन्होंने मुझे बेलडांगा से 70 किलोमीटर पहले रोक लिया। हम वहां कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति खड़ी करने नहीं जा रहे। मैंने उन्हें कहा है कि हमें डीएम या एसपी ऑफिस तक पहुंचाया जाए। लेकिन वे हमें जाने ही नहीं दे रहे।"
वहीं, कृष्णानगर जिले के एक अधिकारी ने कहा कि मजूमदार को एहतियातन रोका है, क्योंकि यह डर है कि मजूमदार के बेलडांगा जाने से इलाके में शांति भंग हो सकती है।
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इससे पहले सुकांत ने पुलिस के खिलाफ धरना देते हुए कहा था कि उन्हें अवैध तरीके से रोका गया। उन्हें एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोका गया है, जो कि अवैध है। उन्होंने कहा था कि वह बेलडांगा में भारत सेवाश्रम संघ के महाराज से मिलने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि पुलिस ममता बनर्जी के आदेश पर काम कर रही है।
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#WATCH | Nadia: Union Minster and West Bengal BJP President Sukanta Majumdar detained by police while he was on his way to visit the clash-affected area in Murshidabad's Beldanga. https://t.co/lbFSXRuwXZ pic.twitter.com/jCzlwM09A1
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 20, 2024
बेलडांगा में दो समुदायों के बीच हुई हिंसा में 17 लोग घायल हुए हैं। यह हिंसा शनिवार रात को तब भड़क उठी थी, जब कार्तिक पूजा के दौरान बनाए गए अस्थायी दरवाजे के बोर्ड पर आपत्तिजनक शब्द लिखे मिले थे। पुलिस ने हिंसा के बाद निषेधाज्ञा लागू कर दी थी और इलाके में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया।
क्षेत्र के हालात देखने जा रहे भाजपा नेता को पुलिस ने यह कहकर रोका कि वहां अभी प्रतिबंध लागू हैं और उनका दौरा अशांति पैदा कर सकता है। भाजपा नेता के काफिले को रोकने के लिए नादिया जिले के कृष्णानगर में बड़ी संख्या में पुलिसबल मौजूद रहा। इसके बाद सुकांत ने वहीं पर धरना शुरू कर दिया।
मजूमदार ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "पुलिस ने कहा कि वहां निषेधाज्ञा लागू है, इसलिए मैं वहां नहीं जा सकता। उन्होंने मुझे बेलडांगा से 70 किलोमीटर पहले रोक लिया। हम वहां कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति खड़ी करने नहीं जा रहे। मैंने उन्हें कहा है कि हमें डीएम या एसपी ऑफिस तक पहुंचाया जाए। लेकिन वे हमें जाने ही नहीं दे रहे।"
वहीं, कृष्णानगर जिले के एक अधिकारी ने कहा कि मजूमदार को एहतियातन रोका है, क्योंकि यह डर है कि मजूमदार के बेलडांगा जाने से इलाके में शांति भंग हो सकती है।