मुर्शिदाबाद: वाम मोर्चा का गढ़ है 75 फीसदी मुस्लिम आबादी वाला यह जिला, भाजपा-टीएमसी कैसे पाएंगे पार?
मुर्शिदाबाद में वाम दलों की अच्छी पकड़ है, लेकिन 34 साल सत्ता पर काबिज रहने के बावजूद भी वह यहां अपना वर्चस्व नहीं बना पाई।
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बंगाल में शनिवार को पहले चरण का मतदान समाप्त हो गया। पांच जिलों की 30 सीटों पर 79.79 फीसदी मतदान हुआ। दरअसल, यहां कुल आठ चरणों में चुनाव होने वाले हैं। वहीं, दूसरे चरण का मतदान 1 अप्रैल को होगा, इसके तहत 30 सीटों पर लोग वोट डाले जाएंगे। इससे पहले कभी बंगाल की राजधानी रही मुर्शिदाबाद चर्चा में हैं। यहां 29 अप्रैल यानी आठवें चरण में चुनाव होना है। इससे पहले कहा जा रहा है कि 75 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले गढ़ मुर्शिदाबाद में दिलचस्प लड़ाई होगी।
मुर्शिदाबाद में वाम दलों की अच्छी पकड़ है, लेकिन 34 साल सत्ता पर काबिज रहने के बावजूद भी वह यहां अपना वर्चस्व नहीं बना पाई। यहां 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वामदलों ने साथ चुनाव लड़ा था। इसका नतीजा यह था कि की 22 विधानसभा सीटों में 18 में जीत मिली थी, इसमें से 14 सीटें कांग्रेस के खाते में गई थी। टीएमसी यहां सिर्फ चार सीट ही जीत पाई थी। भाजपा को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। इसबार यहां दिलचस्प लड़ाई देखने को मिल सकती है। वहीं, 2019 लोकसभा चुनाव में हालात बदले। कांग्रेस और वामदल अलग-अलग चुनावी मैदान में थे। टीएमसी ने जिले की तीन में दो लोकसभा सीटों पर कब्जा कर लिया।
मुर्शिदाबाद में आज यहां लोग गरीबी में जीने को मजबूर हैं। यहां रोजगार के समुचित साधन नहीं हैं। ज्यादातर घरों में बीड़ी बनाने का काम होता है। भागीरथी नदी इस जिले को दो भागों में बांटती है। इस नदी का कटाव यहां की मुख्य समस्या है। हर वर्ष नदी के तटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को अत्यधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उनके घर नष्ट हो जाते हैं, फसल नष्ट हो जाती है। किसी सरकार ने अभी तक इसका समाधान नहीं ढूंढा।