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पश्चिम एशिया में तनाव: खामेनेई की मौत के बाद भी नहीं बदलेगा ईरान, भारत के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर कई मुश्किलें

Mon, 02 Mar 2026 04:25 AM IST
हिमांशु मिश्र हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्र Updated Mon, 02 Mar 2026 04:25 AM IST
सार

West Asia Tensions: विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई की मौत के बाद भी अमेरिका व इस्राइल की इच्छा के अनुरूप ईरान में सत्ता में बदलाव की संभावना नहीं है। ऐसे में नई व्यवस्था में भारत के लिए ईरान से तालमेल बैठाना भी बड़ी चुनौती होगी।

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West Asia Tensions: Iran remains unchanged even after Khamenei's death, India faces many diplomatic challenges
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से भारत के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर कई मुश्किलें पैदा हो गई हैं। भारत की सबसे बड़ी चुनौती रक्षा भागीदार इस्राइल और क्षेत्रीय संपर्क के लिए बेहद अहम के ईरान के साथ कूटनीतिक संतुलन की होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि खामनेई की मौत के बाद भी अमेरिका व इस्राइल की इच्छा के अनुरूप सत्ता में बदलाव की संभावना नहीं है। ऐसे में नई व्यवस्था में भारत के लिए ईरान से तालमेल बैठाना भी बड़ी चुनौती होगी।
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कूटनीति विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि ईरान पर अमेरिका-इस्राइल के हमले का मुख्य मकसद कब्जा नहीं बल्कि शासन बदलना है। हालांकि यह पूरा होता नहीं दिख रहा। दरअसल, खामेनेई ने अपने तीन दशक के शासन में बहुस्तरीय उत्तराधिकार व्यवस्था बनाई है। इसलिए  अहम लोगों की मौत से ईरान की नियंत्रण व्यवस्था में खालीपन दिख सकता है पर आगे यह और अधिक सख्त रूप में सामने आ सकता है। जेएनयू के प. एशियाई अध्ययन के एसोसिएट डा. मुदस्सिर कमर ने कहा, इन हालात में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस्राइल-ईरान के बीच कूटनीतिक संतुलन बैठाना होगा। इस्राइल हमारा बड़ा रक्षा भागीदार है जबकि ईरान क्षेत्रीय संपर्क की दृष्टि से अहम है। चाबहार पोर्ट के अलावा होर्मुज समुद्री मार्ग बंद होने से भारत के व्यापार पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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ट्रंप के कारण ठंडे पड़े रिश्ते
अमेरिका में ट्रंप के शासन में भारत और ईरान के रिश्तों में धीरे-धीरे नरमी आती गई। पहले कार्यकाल में अमेरिकी प्रतिबंध के कारण ईरान से तेल आयात पर प्रभाव पड़ा। दूसरे कार्यकाल में बढ़ी तनातनी के कारण ईरान स्थित चाबहार पोर्ट परियोजना लटक गई। बेहद महत्वपूर्ण मार्ग होने के बावजूद इस पोर्ट से बीते छह वर्षों में महज 450 जहाज ही वहां गए। इसके कारण दोनों देशों का द्विपक्षीय कारोबार अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया।

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भारत की सधी प्रतिक्रिया
ईरान पर इस्राइल-अमेरिका की कार्रवाई की निंदा करने के बदले भारत ने कूटनीति और बातचीत से विवाद का हल निकालने का आह्वान किया है। यहां तक कि ईरानी दूतावास की खामेनेई की हत्या के मामले में दुनिया से निंदा की अपील के बावजूद भारत ने प्रतिक्रिया नहीं दी है।


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