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Hindi News ›   India News ›   Weather Update: Cloud bursting at two and a half to 3 thousand feet height, is it a sign of great danger?

Weather Update: ढाई से तीन हजार फीट की ऊंचाई पर फट रहे बादल, कहीं यह बड़े खतरे की आहट तो नहीं

Mon, 14 Aug 2023 03:33 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 14 Aug 2023 03:33 PM IST
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सार
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक राजीव तनेजा कहते हैं कि जिस तरीके से हिमाचल प्रदेश में बारिश से तबाही मची हुई है उसका एक बड़ा कारण निचली ऊंचाई पर बादलों का फटना भी है।
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Weather Update: Cloud bursting at two and a half to 3 thousand feet height, is it a sign of great danger?
Weather Report - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिमाचल और उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और तबाही से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। इन हालातों के बीच बादलों के फटने का जो नया ट्रेंड सामने आया है, उससे वैज्ञानिक न सिर्फ चिंतित हैं, बल्कि भारी तबाही की भी आशंका जता रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून के वक्त तकरीबन पांच से छह हजार फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में बादलों के फटने की घटनाएं होती थी। इतनी ऊंचाई वाले पहाड़ों पर शिमला और नैनीताल जैसे शहर शामिल हैं। बीते दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और क्लाउडबर्स्ट में यह ऊंचाई पांच और छह हजार फीट की ऊंचाई से खिसक कर ढाई से तीन हजार फीट पर आ गई है। जो फिलहाल चिंता का कारण बनी हुई है।


मौसम विभाग के वैज्ञानिकों समेत आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञ लगातार पहाड़ों पर हो रही बारिश और बचाव को लेकर अपनी तैयारी और प्रबंधन में लगे हुए हैं। मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक राजीव तनेजा कहते हैं कि जिस तरीके से हिमाचल प्रदेश में बारिश से तबाही मची हुई है उसका एक बड़ा कारण निचली ऊंचाई पर बादलों का फटना भी है। वो कहते हैं कि अमूमन बादलों के फटने की प्रक्रिया छह हजार फीट से गुजरने वाले बादलों में होती थी, लेकिन हिमाचल में रविवार से बिगड़े मौसम के बाद सोमवार को जब बादलों के फटने का सिलसिला शुरू हुआ तो इनकी ऊंचाई महज ढाई से तीन हजार फिट तक पहुंच गई। वह कहते हैं कि हिमाचल के कांगड़ा की ऊंचाई तीन हजार फीट से कम है। सोमवार को कांगड़ा की बलोह पंचायत क्षेत्र में बादल फट गया। इस वजह से यहां पर कुछ मकान गिर भी गए और कई मकान क्षतिग्रस्त भी हो गए। वो कहते हैं कि इतनी कम ऊंचाई पर बादलों के फटने की घटना अमूमन न के बराबर या बहुत कम ही होती हैं।


मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सिर्फ हिमाचल के कांगड़ा जिले ही नहीं बल्कि सोलन जिले के निचले हिस्से में भी बादलों के फटने का सिलसिला जारी है। मौसम वैज्ञानिक राजीव तनेजा बताते हैं कि बादलों के फटने का सिलसिला कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ज्यादा खतरनाक हो सकता है। उनका कहना है कि अमूमन पहाड़ों पर आबादी तो हर हिस्से में होती ही है लेकिन सबसे ज्यादा आबादी पहाड़ के शुरुआती चार हजार फीट की ऊंचाई वाले हिस्सों में भी भी खूब होती है। ऐसे में अगर बादलों के फटने का सिलसिला कम ऊंचाई पर होगा तो ज्यादा से ज्यादा आबादी प्रभावित होगी और खतरा बढ़ेगा। वह बताते हैं कि हिमाचल से लेकर उत्तराखंड में बारिश ने बीते कुछ दिनों में कुछ ऐसे ही बादल फटने के ट्रेंड दिखाने शुरू किए है। उनकी चिंता इस बात को लेकर है अगर यह सिलसिला लगातार चला तो कहीं कोई बड़ी तबाही ना आ जाए। 

मौसम विभाग के आकलन के मुताबिक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत जम्मू कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और बादलों के फटने का अनुमान लगाया गया था। हिमाचल प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट के बीच भारी बारिश से तबाही का दौर शुरू हो गया है। राज्य में जगह जगह बादल फटने व भूस्खलन से अब तक 23 से अधिक लोगों की मौत की सूचना राज्य को मिली है। जबकि कई लापता है। हिमाचल प्रदेश आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार आपदा के कारण राज्य में 752 सड़कें बंद हैं। इसी तरह उत्तराखंड में भी लगातार नदियों का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से यहां की एक दर्जन से ज्यादा नदियां और उनकी सहायक नदियों में पानी खतरे के निशान से बहुत ऊपर बेहतर तबाही मचा रहा है। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में भी अभी अगले कुछ दिनों तक लगातार बारिश का अनुमान बना हुआ है।

पहाड़ों पर बादल फटने और लगातार बारिशों के साथ मची तबाही को लेकर मौसम विभाग ने राज्यों में एक बार फिर से सोमवार को अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के ऊपरी हिस्से समेत नॉर्थ ईस्ट के कुछ पहाड़ी इलाकों पर साइक्लोनिक परिस्थितियों की वजह से बादल फटने और ज्यादा से ज्यादा बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा है। पहाड़ों पर मौसम को लेकर बिगड़े हालातों के चलते केंद्रीय गृह मंत्रालय की आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां न सिर्फ अलर्ट पर हैं, बल्कि लगातार राज्यों से संपर्क में आ गई हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, बीते कुछ सालों में यह पहला मौका है जब लगातार 'क्लाउडबर्स्ट' की घटनाएं न सिर्फ बढ़ रही हैं बल्कि राज्यों को चेतावनियां जारी की जा रही हैं।

मौसम विभाग एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा और शिमला समेत सोलन जिले के ऊपरी हिस्से में लगातार बारिश और बादल फटने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन इन जिलों के ऊपरी हिस्सों के अलावा कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि बीते कुछ सालों में यह पहला मौका है, जब हिमाचल प्रदेश के इन इलाकों में बीते कुछ महीनो के दौरान लगातार गंभीर परिस्थितियों की एडवाइजरी जारी की गई है ऊंचाई पर बादल फटने लगे। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा कहते हैं कि पहाड़ों में जिस तरीके के हालात बने हैं, उसको लेकर पहले से ही आगाह किया जा चुका है। खासतौर से हिमालयन रीजन में मौसम की ऐसी मार अगले तीन दिनों तक बनी रहने की संभावना है। 

मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रविवार को जारी की गई एडवाइजरी के बाद सोमवार को भी यह चेतावनी जारी की गई है कि अभी अगले तीन दिनों में कुछ जगहों पर बादल फटने जैसी बड़ी घटनाओं की संभावना बनी हुई है। महापात्रा कहते हैं कि इसको लेकर सभी पहाड़ी राज्यों को अलर्ट जारी कर दिया गया है। फिलहाल यह चेतावनी अगले तीन दिनों के लिए जारी हुई है। उसके बाद मानसून की सक्रियता को देखते हुए मौसम विभाग अगला अनुमान जारी करेगा। मौसम विभाग के महानिदेशक का कहना है कि जिस तरीके से मानसून के हिट करते ही अचानक सक्रियता से पहाड़ों पर तबाही मच रही है वह पहले से अनुमानित था। अनुमान यही लगाया जा रहा है कि अगस्त में भी इस तरीके की घटनाएं हो सकती हैं। फिलहाल मौसम विभाग और संबंधित राज्य लगातार संपर्क में बने हुए हैं।

इसको कहते हैं बादल का फटना
मौसम वैज्ञानिक सुरेंदर देसाई कहते हैं कि बादल फटने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि आकाश में बना हुआ बादल एकदम से गुब्बारे की तरह फट कर पूरा पानी एक जगह पर उड़ेल दे। सुरेंद्र देसाई कहते हैं बादल फटने की घटना तब होती है जब एक साथ बहुत ज्यादा नमी वाले बादल एक जगह पर ही रुक जाते हैं। चूंकि बादलों में इतनी ज्यादा नमी होती है और बादलों के रुकने से बूंदों का वजन बढ़ने लगता है। ऐसी दशा में बादलों का घनत्व भी बढ़ जाता है। इन हालातों में मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है, जिसको बादल फटना या क्लाउडबर्स्ट कहते हैं। मौसस वैज्ञानिक सुरेंद्र देसाई कहते हैं कि पहाड़ों पर यह घटनाएं इसलिए सबसे ज्यादा होती है क्योंकि उनकी ऊंचाई के बीच में बादल फंस जाते हैं और अपनी इसी प्रक्रिया की वजह से बादल फट जाते हैं। वह कहते हैं कि बादल फटने की घटना के दौरान 100 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बरसता है। हालांकि देसाई कहते हैं कि जिस तरीके से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में बादलों के फटने की घटनाएं बढ़ी हैं उससे बहुत ज्यादा प्राकृतिक आपदा और जान माल के नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
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