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Hindi News ›   India News ›   Weather: 2023 was the hottest year since 1880, serious impact of El Nino may be visible in 2024

मौसम: 1880 के बाद 2023 रहा सबसे गर्म साल, 2024 में दिख सकता है अल नीनो का गंभीर प्रभाव

Sun, 17 Sep 2023 04:58 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 17 Sep 2023 04:58 AM IST
सार

Weather: जलवायु परिवर्तन का गंभीर प्रभाव हमारी पृथ्वी और भावी पीढ़ियों के लिए खतरा बन कर उभर रहा है। यह परिस्थिति ऐसे समय में बनी है जब दुनिया के अधिकांश हिस्सों में भारी गर्मी पड़ रही है, जिससे कनाडा और हवाई में घातक जंगल की आग भड़क रही है। दक्षिण अमेरिका, जापान, यूरोप और अमेरिका में लू चरम पर है।

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Weather: 2023 was the hottest year since 1880, serious impact of El Nino may be visible in 2024
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विस्तार

नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस स्टडीज (जीआईएसएस) के वैज्ञानिकों के अनुसार 1880 में मौसम संबंधी वैश्विक रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से 2023 सबसे अधिक  गर्म साल रहा। नासा के रिकॉर्ड में जून, जुलाई और अगस्त के महीने किसी भी अन्य गर्म महीनों की तुलना में 0.23 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रहे और 1951 से 1980 के बीच की औसत गर्मियों की तुलना में 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म दर्ज किए गए।

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इनमें से अगस्त का महीना 0.2 डिग्री सेल्सियस औसत से अधिक गर्म रहा। 

उल्लेखनीय है कि उत्तरी गोलार्ध में जून से अगस्त तक के मौसम को गर्मी का मौसम माना जाता है। नासा के आधिकारिक प्रवक्ता बिल नेल्सन के अनुसार मौजूदा वर्ष  2023  में बढ़ती गर्मी के  दुनिया भर में गंभीर परिणाम दिखाई दिए हैं। एरिजोना में भीषण तापमान से लेकर पूरे कनाडा में भयावह गर्मी,  यूरोप और एशिया में अत्यधिक बाढ़, दुनिया भर में जान-माल और आजीविका के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है।
 

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भावी पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा है जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन का गंभीर प्रभाव हमारी पृथ्वी और भावी पीढ़ियों के लिए खतरा बन कर उभर रहा है। यह परिस्थिति ऐसे समय में बनी है जब दुनिया के अधिकांश हिस्सों में भारी गर्मी पड़ रही है, जिससे कनाडा और हवाई में घातक जंगल की आग भड़क रही है। दक्षिण अमेरिका, जापान, यूरोप और अमेरिका में लू चरम पर है जबकि इटली, ग्रीस, मध्य यूरोप और अमेरिका में भयंकर बारिश हो रही है और विनाशकारी तूफान आ रहे हैं। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार 1951 से 1980 के आधार पर तापमान औसत से काफी पीछे चला गया है।
 

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भीषण गर्मी के लिए अल नीनो जिम्मेदार
नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला के जलवायु वैज्ञानिक जोश विलिस के अनुसार अल नीनो की वापसी के कारण समुद्र की सतह का बढ़ा हुआ उच्च तापमान रिकॉर्ड गर्मी के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने की वजह से होती है। नासा, नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा दशकों से किए गए विश्लेषण से पता चला है कि बढ़ते तापमान के पीछे मुख्य रूप से मानवजनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन है।

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