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Kerala: 'हम रक्षा बल के अनुभव की वजह से जिंदा बच पाए', कतर से रिहा नौसेना के पूर्व अधिकारी ने साझा किया दर्द

Wed, 14 Feb 2024 03:49 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम (केरल)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम (केरल) Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 14 Feb 2024 03:49 PM IST
सार

Kerala: गोपाकुमार सोमवार को तिरुवनंतपुरम के उपनगरीय इलाके बलरामपुरम पहुंचे। उन्हें अपने परिजनों को रोते हुए गले लगाया। पूर्व नौसेना कर्मी ने कहा कि जेल और सजा डरावनी थी। 

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We survived only because of our defence training, says Navy veteran released from Qatar
रागेश गोपाकुमार। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केरल के रागेश गोपाकुमार भारतीय नौसेना के उन आठ पूर्व कर्मियों में से एक हैं, जिन्हें हाल ही में कतर की जेल से रिहा किया गया। इन सभी को अदालत ने पहले मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, बाद में इस सजा को कारावस में बदल दिया गया था।  खाड़ी देश में महीनों कैद में रहने के बाद गोपाकुमार ने अपने परिवार से मिलने पर खुशी जाहिर की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। 

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राहत महसूस कर रहे गोपाकुमार ने कहा, "हम बहुत खुश हैं कि जिंदा लौट आए।" उन्होंने बताया कि वह और उनके सहयोगी रक्षा प्रशिक्षण (डिफेंस ट्रेनिंग) के कारण ही बच पाए। कतर ने दो दिन पहले उन्हें अन्य सात पूर्व नौसेना कर्मियों के साथ रिहा किया था। सभी की मौत की सजा को अलग-अलग अवधि की जेल की सजा में बदल दिया गया था।

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परिवार और केंद्र के प्रयासों को दिया रिहाई का श्रेय
गोपाकुमार सोमवार को तिरुवनंतपुरम के उपनगरीय इलाके बलरामपुरम पहुंचे। उन्होंने अपने रोते हुए परिजनों को गले लगाया। उन्होंने बताया कि जेल और सजा डरावनी थी।नौसेना के पूर्व अधिकारी ने अपनी रिहाई का श्रेय परिवार की दुआओं और केंद्र सरकार के प्रयासों को दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके निजी दखल के कारण ही उनकी रिहाई संभव हो सकी। 

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पीएम मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताया
गोपाकुमार ने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि अगर प्रधानमंत्री मोदी दखल देते हैं तो वे जेल से बाहर निकल आएंगे। लेकिन, यह नहीं पता था कि इसमें कितना समय लगेगा।उन्होंने जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों के परिवारों को कतर लाने की व्यवस्था करने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। गोपाकुमार ने कहा, अगर कोई भारतीय विदेश में मुसीबत में फंसा है और निर्दोष है और हमारे प्रधानमंत्री इसके बारे में आश्वस्त हैं, तो वह उनके बचाव में जरूर आएंगे, चाहे वह कोई एक व्यक्ति ही क्यों न हो। हर भारतीय को यह पता होना चाहिए।
 

2017 में नौसेना से सेवानिवृत्त हुए थे गोपाकुमार
जेल में बिताए दिनों को याद करते हुए गोपाकुमार ने बताया कि वह और उनके सहयोगी रक्षा बल के रूप में प्रशिक्षण लेने के कारण बच पाए। उन्होंने बताया कि वह 2017 में भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त हुए थे और बाद में ओमान डिफेंस ट्रेनिंग कंपनी के संचार प्रशिक्षक (कम्युनिकेशन ट्रेनर) के रूप में शामिल हुए थे। 

दोनों देशों ने आरोपों को नहीं किया सार्वजनिक
भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों पर जासूसी के आरोप लगे थे। लेकिन, न तो कतर के अधिकारियों और न ही दिल्ली ने उनके खिलाफ लगे आरोपों को सार्वजनिक किया है। 26 अक्तूबर को उन्हें कतर की अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद खाड़ी देश की अपीलीय अदालत ने 28 दिसंबर को मौत की सजा को कारावास में बदल दिया। फिर उन्हें तीन साल से पच्चीस साल तक की अलग-अलग अवधि के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी। 

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