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Power shortage: इस बार गर्मी में हो सकती है दिक्कत, देश में बिजली कटौती से निपटने के लिए तैयार हुआ ये प्लान

Wed, 22 Mar 2023 04:21 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 22 Mar 2023 04:21 PM IST
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सार
Power shortage: जानकारी के मुताबिक, गर्मी के दिनों में किसी भी प्रकार के संकट से निपटने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। विद्युत अधिनियम का हवाला देकर सभी पारंपरिक थर्मल पावर प्लांट्स के मेंटेनेंस का काम अगले तीन माह तक टालने का निर्देश दिया गया है...
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We may have to face severe power shortage from the month of April itself
Power shortage - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश के कई राज्यों में अभी मौसम खुशनुमा बना हुआ है। जबकि कुछ हिस्सों में गर्मी ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया हैं। आने वाले वक्त में गर्मी बढ़ने के साथ साथ बिजली खपत में भी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसे लेकर बिजली उत्पादन की पर्याप्त क्षमता और उसके मैनेजमेंट की तैयारियां शुरू हो गई हैं। लेकिन इसी बीच नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर ने भी अनुमान जताया है कि आने वाले अप्रैल माह से ही बिजली की गंभीर कमी से जूझना पड़ सकता है।

इस वर्ष बिजली की अनुमानित पीक डिमांड में आठ फीसदी ज्यादा बढ़ोतरी रिकॉर्ड किए जाने का अनुमान है। इस साल देश में बिजली की अनुमानित पीक डिमांड 230 गीगावाट में बढ़ोत्तरी रिकॉर्ड होने के अनुमान है। इसी चलते अभी से समर एक्शन प्लान पर काम शुरू हो गया है। भारत के बिजली ग्रिड भी गर्मी के संकट से निपटने की तैयारी में जुट गए हैं। ग्रिड सिस्टम ऑपरेटर अप्रैल में 18 अलर्ट डेज पर काम करने की तैयारी में हैं। पिछले साल जुलाई में 211.6 गीगावाट सर्वाधिक मांग दर्ज की गई थी। लेकिन इस साल पीक डिमांड 230 गीगावाट होने का अनुमान जताया गया है।

जानकारी के मुताबिक, गर्मी के दिनों में किसी भी प्रकार के संकट से निपटने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। विद्युत अधिनियम का हवाला देकर सभी पारंपरिक थर्मल पावर प्लांट्स के मेंटेनेंस का काम अगले तीन माह तक टालने का निर्देश दिया गया है। वहीं, इन प्लांट्स को 16 मार्च से 30 जून तक फुल कैपेसिटी के साथ बिजली का उत्पादन करने के आदेश दिए गए हैं।

इधर, एनटीपीसी ने भी अपने प्लांट्स के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा राज्य के स्वामित्व वाली एनटीपीसी लिमिटेड के करीब 5000 मेगावाट गैस आधारित उत्पादन (1ए000 मेगावाट एक गीगावॉट ) के बराबर है, को चालू करने के आदेश जारी किए गए हैं। इन स्टेशनों से उत्पन्न बिजली पीपीए धारकों को बेची जानी है। जबकि बाकी उत्पादित बिजली को मार्केट में बेचा जा सकेगा।

दक्षिण के मुकाबले उत्तरी क्षेत्र में जलाशय स्तर अच्छा है। दक्षिण में जल विद्युत उत्पादन अपेक्षित स्तर से नीचे रहने की संभावना है। इसके लिए दक्षिण क्षेत्र में अप्रैल माह में शाम के वक्त बिजली के उत्पादन पर बल देने का निर्देश दिया गया है। घरेलू आपूर्ति की किसी भी संभावित कमी से निपटने के लिए पारंपरिक थर्मल संयंत्रों में आयातित कोयले का 6 फीसदी सम्मिश्रण सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है।

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