Manipur: राज्य छोड़ने को मजबूर हुए मणिपुर के लोग, लोकसभा चुनाव से पहले बोले- हम बाहरी नहीं, हमें मतदान करना है
Manipur: मणिपुर में हिंसा की वजह से राज्य छोड़ चुके लोग मतदान करना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनके साथ बाहरी लोगों जैसा बर्ताव किया जा रहा है।
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मणिपुर के हिंसाग्रस्त इलाकों से कई लोग राज्य छोड़कर देश के दूसरे हिस्सों में बसने को मजबूर हो गए थे। अब उन लोगों ने एक भावुक अपील की है। उनका कहना है कि उनके साथ बाहरी लोगों जैसा व्यवहार न करें क्योंकि उन्हें भी मतदान करना है। संघर्ष प्रभावित मणिपुर में राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोग 19 अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी चुनावों में मतदान कर सकेंगे, लेकिन राज्य के बाहर जा चुके जो लोग घर वापस लौटने में असमर्थ हैं, उनके लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। दरअसल उन लोगों को लगता है कि उनका वापस लौटना अभी भी सुरक्षित नहीं है और अधिकारियों का कहना है कि उन्हें वोट दिलाना संभव नहीं है।
विधायकों ने चुनाव आयोग के सामने रखी थी यह बात
इससे पहले कुकी और मैतेई समूहों के नेताओं ने चुनाव आयोग के साथ यह मुद्दा उठाया। जिन लोगों ने राज्य के बाहर शरण ली है, उनका कहना है कि अगर मतदान की व्यवस्था नहीं हो सकती है तो उन्हें डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए। मणिपुर के कुकी समुदाय से जुड़े दस विधायकों ने इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग से कहा था कि राज्य के बाहर रह रहे विस्थापित लोगों को वहां से मतदान करने की अनुमति दी जाए, जहां वो रह रहे हैं। विधायकों ने कहा कि अगर देश के विभिन्न हिस्सों में शरण ले चुके हमारे लोगों के लिए मतदान की व्यवस्था नहीं की गई तो हमारे कई वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो जाएंगे।
उधर एक मैतेई समूह ने भी इस बारे में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्य के बाहर रहने वाले मणिपुर के मतदाताओं के लिए डाक मतपत्र की व्यवस्था की जाए। समूह से जुड़े लोगों ने कहा कि राज्य के बाहर रहने वाले मतदाताओं के लिए महंगी उड़ानें लेना असंभव है और सड़क यात्रा पूरी तरह से असुरक्षित है।
‘हमारे साथ बाहरी लोगों जैसे बर्ताव किया जा रहा’
बता दें कि मणिपुर में 2019 के चुनावों में 82 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। इस बार, जातीय हिंसा की वजह से हालात बदल गए हैं। ऐसे में विस्थापित हो चुके लोगों के मतदान को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। मणिपुर छोड़कर दिल्ली में रह रहे एक युवक बीरेन चंदम का कहना है कि मैं दिल्ली आ गया और यहां नौकरी ढूंढ ली, जबकि मेरा परिवार पड़ोसी राज्य मिजोरम चला गया। हम अपने घर वापस जाने के लिए उत्सुक हैं लेकिन हम अपने राज्य में वोट क्यों नहीं दे सकते? बीरेन ने कहा कि हमारे लिए कुछ ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि हम जहां भी हों, वहां से मतदान कर सकें। हमारे साथ बाहरी लोगों जैसा बर्ताव किया जा रहा है।
मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा?
मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुमार झा ने कहा कि राज्य में राहत शिविरों में रहने वाले 24,000 से अधिक विस्थापित व्यक्तियों को आगामी चुनावों में मतदान करने के लिए पात्र पाया गया है। उन्होंने कहा कि हिंसा के बाद राज्य छोड़ने वाले लोगों के लिए मतदान की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मणिपुर में जातीय संघर्ष के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए लगभग 18,000 लोगों के लिए मतदान सुविधाओं की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने वकील से कहा है जल्दी ही सुनवाई के लिए तारीख दी जाएगी।
बता दें कि मणिपुर में दो लोकसभा सीटें हैं। मतदान के पहले चरण में 19 अप्रैल को इनर मणिपुर सीट के लिए मतदान होगा, और आउटर मणिपुर में दो चरणों में 19 अप्रैल और 26 अप्रैल को मतदान होगा।