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एनआईए का खुलासा: भारत विरोधी गतिविधियों में अमेरिकी समेत छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ सबूत नहीं, जांच जारी

Wed, 09 Sep 2026 09:17 PM IST
शिवम गर्ग एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 09 Sep 2026 09:17 PM IST
सार

म्यांमार ड्रोन युद्ध मामले में एनआईए को अमेरिकी नागरिक समेत छह यूक्रेनी नागरिकों के भारत विरोधी गतिविधियों या भारतीय उग्रवादी संगठनों को प्रशिक्षण देने का कोई निर्णायक सबूत नहीं मिला है। हालांकि, एजेंसी ने इस संभावना को खारिज नहीं किया और विदेश, खासकर म्यांमार में आगे की जांच जारी है।

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NIA Finds No Conclusive Evidence of India-Directed Activities by Seven Foreigner in Myanmar Drone Warfare Case
एनआईए ने कोर्ट में दायर की चार्जशीट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

म्यांमार में ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अब तक ऐसा कोई निर्णायक सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि गिरफ्तार सात विदेशी नागरिक भारत के खिलाफ निर्देशित गतिविधियों में शामिल थे या उन्होंने भारतीय उग्रवादी समूहों को प्रशिक्षण दिया था। हालांकि, एजेंसी ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया है।

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एनआईए ने 8 सितंबर को इस मामले में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। इनमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक (हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर) शामिल हैं। फिलहाल एनआईए की जांच का एक प्रमुख सवाल यही है कि क्या म्यांमार में ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण देने वाले इन सात विदेशी नागरिकों का भारतीय उग्रवादी संगठनों से कोई संपर्क था। एजेंसी को अभी इसका कोई निर्णायक प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन इस पहलू की जांच जारी है।

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भारत के खिलाफ गतिविधियों को लेकर क्या सामने आया?

एनआईए अधिकारियों के मुताबिक, अब तक की जांच में सातों आरोपियों के भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने या भारतीय उग्रवादी संगठनों को प्रशिक्षण देने का कोई निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है। हालांकि, एजेंसी ने कहा है कि इस पहलू को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक और अन्य डेटा की व्यापक जांच के साथ विदेश, खासकर म्यांमार में आगे की जांच की जरूरत होगी। अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया में अभी कुछ समय लग सकता है।

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म्यांमार में क्या कर रहे थे आरोपी?

आरोपपत्र में एनआईए ने आरोपियों के म्यांमार में अवैध तरीके से प्रवेश करने और वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध से जुड़ी ट्रेनिंग देने की बात कही है। जांच के अनुसार, आरोपी दिसंबर 2025 में भारत पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने भारत-म्यांमार सीमा को कथित तौर पर अवैध रूप से पार किया और म्यांमार के विक्टोरिया कैंप पहुंचे।


एनआईए के मुताबिक, वहां उन्होंने म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों के सदस्यों को ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली, ड्रोन युद्ध और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया। इनमें चिन नेशनल फ्रंट (CNF) और काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) जैसे संगठन शामिल बताए गए हैं। जांच में आरोपियों की म्यांमार में संयुक्त सैन्य अभियानों में भागीदारी के संकेत भी मिलने की बात कही गई है।

भारत में कैसे पहुंचे थे और फिर म्यांमार कैसे गए?

एनआईए की एफआईआर के अनुसार, वैन डाइक और उनकी टीम अलग-अलग तारीखों पर पर्यटक वीजा के जरिए भारत आई थी। इसके बाद वे गुवाहाटी पहुंचे और वहां से मिजोरम गए। आरोप है कि उन्होंने जरूरीप्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी) या संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) के बिना आगे बढ़कर भारत-म्यांमार सीमा पार की। जांच एजेंसी का दावा है कि समूह को म्यांमार के चिन नेशनल फ्रंट से लॉजिस्टिक मदद मिली और उनके मिशन के लिए एक म्यांमार स्थित विद्रोही संगठन के कमांडर की ओर से धन की व्यवस्था की गई।

ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त

जांच के दौरान एनआईए ने दिल्ली में सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा रोकी गई ड्रोन और उससे जुड़े उपकरणों की खेप जब्त की। इसके अलावा बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है। इन उपकरणों और डेटा की फिलहाल जांच की जा रही है। एनआईए की UAPA के तहत जांच अभी जारी है, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों का भारतीय उग्रवादी संगठनों से कोई संबंध था या उनकी गतिविधियां भारत की सुरक्षा के लिए नुकसानदेह थीं।

कब शुरू हुई थी जांच?

गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद NIA ने इस मामले में 13 मार्च 2026 को केस दर्ज किया था। इसी दिन वैन डाइक को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर रात करीब नौ बजे गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ छह यूक्रेनी नागरिकों को भी हिरासत में लिया गया। एनआईए की टीम कई महीनों से पूर्वोत्तर क्षेत्र में संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। आरोपियों की गिरफ्तारियां दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता समेत कई हवाईअड्डों पर की गईं।

वैन डाइक की क्या है पृष्ठभूमि?

एनआईए के अनुसार, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक खुद को कॉम्बैट स्पेशलिस्ट बताते हैं और सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) नाम की सुरक्षा कंपनी के संस्थापक हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह सोशल मीडिया और अपनी वेबसाइट के जरिए सैन्य एवं युद्ध संबंधी विशेषज्ञता का प्रचार करता था।



वैन डाइक के ऑनलाइन रिकॉर्ड में सीरिया, लीबिया, अफगानिस्तान और इराक जैसे संघर्ष क्षेत्रों से जुड़े होने के दावे सामने आते हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, समूह 2024 से म्यांमार की बार-बार यात्राएं कर रहा था। इस मामले में 14 लोगों के एक बड़े समूह का भी उल्लेख सामने आया है। इनमें से आठ अन्य यूक्रेनी नागरिक फिलहाल लापता बताए जा रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि वे अभी म्यांमार में हैं या भारत के रास्ते कहीं और चले गए हैं।

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