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गर्मी से पहले ही देश में जल संकट का खतरा, गंगा में घुला आर्सेनिक का जहर

Wed, 08 Mar 2017 03:04 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Mar 2017 03:04 AM IST
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water crisis in the country Before summer
सांकेतिक चित्र - फोटो : Getty Images

गर्मियों से पहले ही देश में जल संकट के संकेत मिलने लगे हैं। सरकार ने जहां गर्मी शुरू होने से पहले ही देश के प्रमुख 91 जलाशयों के जलस्तर में 41 फीसदी तक कमी आने की जानकारी दी है। वहीं यह भी स्वीकार किया है कि करोड़ों लोगों को जीवन देने वाली गंगा में आर्सेनिक का जहर घुल गया है। 

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केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इन जलाशयों में 2 मार्च को समाप्त सप्ताह में 64.55 अरब क्यूबिक मीटर (बीसीएम) जल उपलब्ध था। कुल 157.799 बीसीएम क्षमता वाले इन जलाशयों में 23 फरवरी तक 44 फीसदी यानी 68.741 बीसीएम जल ही बचा था। पिछले साल के मुकाबले इस साल हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के जलाशयों में कम जल भंडारण हुआ है।
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दस दिनों के अंदर ही इन जलाशयों पानी के स्तर में तीन फीसदी की कमी आई है। वहीं 23 दिसंबर, 2017 तक जल संग्रहण 47 फीसदी था। देश के उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र में पानी का स्तर पिछले दस सालों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत जल संग्रहण का सबसे कम है।
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केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक उत्तरी क्षेत्र के हिमाचल प्रदेश, पंजाब समेत कई राज्यों में जलाशयों की संग्रहण स्थिति 5.18 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 29 फीसदी है। वहीं पिछले साल में जलाशयों की संग्रहण स्थिति 31 फीसदी थी। हालांकि संतोष की बात यह है कि मध्य क्षेत्र के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 22.64 बीसीएम है जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 55 फीसदी है। पिछले साल इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 38 फीसदी थी। 

गंगा में घुला आर्सेनिक का जहर

water crisis in the country Before summer
सांकेतिक चित्र
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक पिछले साल की तुलना में यहां जल संग्रहण बेहतर हुआ है। लेकिन दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना समेत कई राज्यों में पिछले साल की तुलना में जल संग्रहण स्तर में दो फीसदी की गिरावट आई है। साथ ही दस सालों में भी यह स्तर सबसे कम है। पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में भी जल संग्रहण स्तर घटा है। जल आयोग का कहना है कि पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड में जल संग्रहण बेहतर है मगर हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में जलस्तर घटा है।

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा है कि गंगा बेसिन में आर्सेनिक की समस्या से करोड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं और इस समस्या के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए बड़ा आंदोलन चलाने की जरूरत है। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की ओर से गंगा बेसिन के भूजल में आर्सेनिक की समस्या और निराकरण विषय पर आयोजित कार्यशाला में माना गया कि देश की 50 फीसदी जनता आर्सेनिक से दूषित जल का सेवन करने पर मजबूर है।

उमा भारती ने कहा कि भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी जहर के समान है और लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। मंत्रालय इस समस्या को दूर करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करेगा, जिसमें राज्य सरकारों और गैर सरकारी संगठनों का सहयोग भी लिया जाएगा। 
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