फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   water crisis and famine in india

भयंकर सूखे की ओर जा रहा देश, न संभले तो मुश्किल होंगे हालात?

Wed, 13 Apr 2016 05:59 PM IST
Updated Wed, 13 Apr 2016 05:59 PM IST
विज्ञापन
water crisis and famine in india

अकाल में पैदो ले चार ही वंश

विज्ञापन

सासी, कुत्ता, गिद्ध और सरपंच।

बुंदेलखंड में कही जाने वाली ये लोकोक्ति कभी सूखे की त्रासदी को बयां करने के लिए कही गई होंगी। उस सूखे के लिए जिसके कारण आधे से ज्यादा भारत की आबादी पिछले तीन सालों से जूझ रही है। इस साल भी मानसून आने से पहले ही आधे भारत में सूखे के हालात बन रहे हैं। 

महाराष्ट्र के लातूर में पानी को बचाने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है तो मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में एक नहर के पानी की रखवाली के लिए दस से ज्यादा बंदूकधारी 24 घंटे तैनात रहते हैं। 
विज्ञापन


मध्यप्रदेश के ही छतरपुर में लोग शाम होते ही घर छोड़ देते हैं और कई कई किलोमीटर का सफर करने के बाद एक पहाड़ से बहने वाले झरने से बूंद बूंद पानी इकट्ठा कर सुबह घर लौटते हैं। हमेशा पानी से लबालब रहने वाला नासिक का पवित्र रामकुंड 130 सालों में पहली बार पूरी तरह सूख गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पानी को लेकर यह मारामारी मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में ही नहीं है उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड और पूर्वी इलाका, उड़ीसा, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलाडु, राजस्‍थान और गुजरात के तटवर्ती इलाकों में भी आसार अच्छे नजर नहीं आते। 

उत्तर प्रदेश का गंगा यमुना का दोआब क्षेत्र जहां दस साल पहले तक 30-40 फुट गहराई पर ही पर्याप्त पानी मिल जाता था वहां अब 100 फुट से ज्यादा खुदाई करने पर भी पानी नजर नहीं आता।

मौसम विज्ञानी इसका कारण इन इलाकों में बढ़ते सूखे के प्रभाव को मानते हैं। जिसकी वजह से जमीन के नीचे मौजूद जल तो तेजी से सूख ही रहा है पर्याप्त वर्षा न होने के कारण धरती भी लगातार बंजर होती जा रही है। 

बर्बाद फसल के बाद पीने के पानी को भी तरस रहे लोग

water crisis and famine in india

लोगों पर इसकी दोहरी मार पड़ रही है एक ओर जहां देश की आधे से ज्यादा आबादी पीने के पानी के लिए तरस रही है वहीं साल दर साल खेती भी चौपट होती जा रही है। मोटे मोटे अनुमान के मुताबिक पिछले तीन सालों में देश में दस फीसदी कम वर्षा हुई है। 

जिसका परिणाम अनाज की आसमान छूती कीमतों के रूप में हम देख चुके हैं। पानी की यह किल्लत सरकारी फाइलों में बेशक अभी उतनी विकराल नजर न आ रही हो लेकिन तमाम सर्वेक्षण और शोध साफ तौर पर इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि हम समय रहते न सुधरे तो साल 2025 तक देश की 50 फीसदी आबादी भयंकर जल संकट झेलने को मजबूर होगी। 

हालांकि पानी को लेकर यह स्थिति भारत ही नहीं तमाम देशों में देखने को मिल रही है लेकिन भारत जैसे विकासशील देश में इस संकट से निपटना ज्यादा मुश्किल होगा। भारत में बढ़ती आबादी का दबाव, आर्थिक विकास और लचर सरकारी नीतियों ने जल स्त्रोतों के अत्याधिक प्रयोग और प्रदूषण को बढ़ावा दिया है। 

पुनर्भरण से दुगनी दर पर जमीन के पानी को बाहर निकाला जा रहा है जिससे जलस्तर हर साल 1 से 3 मीटर नीचे गिर जाता है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की बीस बड़ी नदियों में से पांच का नदी बेसिन पानी की कमी के मानक 1000 घन मीटर प्रति वर्ष से कम है और अगले तीन दशकों में इसमें पांच और नदी बेसिन भी जुड़ेंगे। 

कर्नाटक का कृष्णा सागर बांध सूख चुका है जिससे बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में भी पानी का संकट हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के साप्ताहिक आंकडे तो और डराने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश भर के 91 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर पिछले 10 सालों में सबसे कम है। पूर्व के जलाशयों में 44 फीसदी, दक्षिण भारत में 20 फीसदी, मध्य भारत में 36 फीसदी, पश्चिमी में 26 फीसदी और उत्तर के जलाशयों में मात्र 27 फीसदी पानी शेष है।

1943 में बंगाल में पड़े अकाल में मारे गए थे 30 लाख लोग

water crisis and famine in india

देश में पानी की मार कई स्तर पर पड़ रही है जिनमें भूजल स्तर घटना, वर्षा का लगातार कम होना, हिमालयन ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और मौजूदा जल स्रोतों का दूषित होना प्रमुख है। इसकी वजह से हम हर रूप में पेयजल और अन्य जरूरत योग्य जल को खोते जा रहे हैं।

बारिश की कमी जहां सूखे को और सूखा अकाल को बुलावा देता है वहीं घटता भूजलस्तर पीने के पानी को भी तरसा देता है। सूखे की मार से कैसे लाखों लोग बेमौत मारे जाते हैं इसका नजारा देश बंगाल में 1943 में आए अकाल में देख चुका है। 

जब 30 लाख से ज्यादा लोगों ने भूख और प्यास से तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था। उस समय एक करोड़ की जनसंख्या वाले बंगाल की बड़ी आबादी अकाल की बलि चढ़ गई थी। देश में 1860 के बाद 25 बड़े अकाल आए। 

इन अकालों की चपेट में तमिलनाडु, बिहार और बंगाल जैसे प्रमुख राज्य ज्यादा रहे। दुनियाभर की बात करें तो 1876, 1899, 1943-44, 1957, 1966 में पड़े अकालों के दौरान 7 करोड़ से ज्यादा लोग मारे गए थे। इनमें से अकेले 3 करोड़ लोगों की मौत चीन में 1958-61 के अकाल के दौरान हुई थी। 

अपने देश में बुंदेलखंड और महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में शायद ही कोई साल बीतता हो जब फसल की बर्बादी के कारण हर साल हजारों किसान अपनी जान न दे देते हों, भूख से मरने वालों का तो सरकारें भी कोई आंकड़ा नहीं रखती। 

बेहिसाब भूजल दोहन और पानी की बर्बादी से बिगड़ रहे हालात

water crisis and famine in india

हालांकि सूखे और अकाल की समस्या के लिए सारा दोष प्रकृति के सिर मढ़ना भी सही नहीं है, यह समस्‍या कुछ हद तक मानवजनित भी है। पानी की बेहिसाब बर्बादी, भूजल का अकूत दोहन, जल का उचित प्रबंधन न होना और जल स्रोतों का लगातार दूषित होना भी इस समस्या को और बढ़ावा दे रहा है। 

भारत में आधे से ज्यादा नदियां सूखकर जहां आज गंदे नाले का रूप ले चुकी हैं वहीं सदा नीरा कही जाने वाली गंगा और यमुना अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। वर्ल्ड वॉटर इंस्टिट्यूट के अनुसार गंगा नदी में हर मिनट 11 लाख लीटर गंदा नाले का पानी गिराया जाता है। 

यह हाल तब है जब गंगा नदी भारत में 50 करोड़ से अधिक लोगों को पेयजल और खेती के लिए पानी उपलब्ध कराती है। यूनेस्को द्वारा दी गई विश्व जल विकास रिपोर्ट में भारतीय पानी को दुनिया के सबसे प्रदूषित पानी में तीसरे स्थान पर रखा गया है। 

खुद जल मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि भारत का 70 फीसदी सतही जल जैविक व जहरीले रसायनों से प्रदूषित है। इसके अलावा सूखे से बचाने और भूजल स्तर को नियंत्रित रखने में सबसे बड़े मददगार कहे जाने वाले तालाब और पोखर तो अब अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। 

ये सरकारी विभागों के नक्‍शे में तो हैं लेकिन धरती के नक्‍शे में नहीं। केन्द्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में दायर रिपोर्ट में मान चुकी है कि देश में 80 फीसदी से ज्यादा तालाबों पर कब्जे हो चुके हैं। 

अगर यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम अपनी पीढ़ियों को विरासत में ऐसी धरती देकर जाएंगे जहां जीवन जीने की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed