समुद्र में बढ़ी भारत की ताकत: नौसेना में शामिल हुए अत्याधुनिक युद्धपोत उदयगिरि और हिमगिरि; जानें खूबियां
उदयगिरि को मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने बनाया गया है, जबकि हिमगिरि को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने तैयार किया है। खास बात यह है कि उदयगिरि नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो का 100वां डिजाइन किया गया जहाज है।
विस्तार
हिंद महासागर में भारत की शक्ति और बढ़ गई है। विशाखापत्तनम स्थित बेस पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को अत्याधुनिक प्रोजेक्ट 17ए मल्टी- मिशन स्टील्थ फ्रिगेट उदयगिरि और हिमगिरि को नौसेना में शामिल किया।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह पहला अवसर है जब दो अलग-अलग शिपयार्डों में निर्मित दो अग्रिम पंक्ति के सतही लड़ाकू जहाजों को एकसाथ कमीशन किया गया। मंत्रालय ने कहा, इन युद्धपोतों के शामिल होने से नौसेना की युद्ध तत्परता बढ़ेगी और युद्धपोत डिजाइन एवं निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के संकल्प की पुष्टि होगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में अपने समुद्री हितों की रक्षा करने की देश की क्षमता मजबूत होगी।
#WATCH | Vishakhapatnam, Andhra Pradesh: Chief of Naval Staff, Admiral Dinesh Kumar Tripathi and Raksha Mantri Rajnath Singh arrive to attend the Commissioning Ceremony of the latest state-of-the-art Project 17A multi-mission stealth frigates Udaygiri and Himgiri.
विज्ञापन विज्ञापन
Source: Indian… pic.twitter.com/69mnWQCa9A — ANI (@ANI) August 26, 2025
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि अनिश्चितताओं और प्रतिस्पर्धा के इस युग में समुद्र में भारी बल प्रदान करने की भारतीय नौसेना की क्षमता भारत के दुश्मनों के खिलाफ एक विश्वसनीय निवारक है। हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसका बखूबी प्रदर्शन किया। हमारी इकाइयों की त्वरित तैनाती और आक्रामक रुख ने पाकिस्तानी नौसेना को एक तरह से बंदी बना लिया और उन्हें हमसे गतिज कार्रवाई बंद करने का अनुरोध करने पर मजबूर कर दिया। कुछ दिन पहले आईएनएस विक्रांत के डेक से रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना को आश्वासन दिया था कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है और यदि फिर से आवश्यकता पड़ी, तो संभावना है कि इसकी शुरुआत भारतीय नौसेना द्वारा की जाएगी।
#WATCH | Visakhapatnam, Andhra Pradesh: Chief of Naval Staff, Admiral Dinesh Kumar Tripathi says, "In this era of uncertainties and competition, Indian Navy's capability to deliver an overwhelming force at sea is a credible deterrence against India's enemies. We demonstrated it… https://t.co/F9ahTPoAFv pic.twitter.com/6LlEy0rY9j
— ANI (@ANI) August 26, 2025
शिवालिक क्लास से बड़े और ज्यादा उन्नत
बता दें कि उदयगिरि को मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने बनाया गया है, जबकि हिमगिरि को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने तैयार किया है। खास बात यह है कि उदयगिरि नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो का 100वां डिजाइन किया गया जहाज है। करीब 6700 टन वजनी ये जहाज शिवालिक क्लास से बड़े और ज्यादा उन्नत हैं।
इनका डिजाइन ऐसा है कि ये रडार को चकमा देने में सक्षम हैं। इनमें डीजल इंजन और गैस टर्बाइन दोनों लगे हैं, आधुनिक मिसाइलें, तोप और पनडुब्बी रोधी हथियार भी हैं। दोनों भारतीय नौसेना के नेक्स्ट-जनरेशन स्टील्थ वॉरशिप हैं, जो प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए हैं। इन युद्धपोत के निर्माण में 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिससे 4,000 से ज्यादा लोगों को सीधी और 10,000 से ज्यादा को अप्रत्यक्ष नौकरियां मिलीं।
'उदयगिरि' और 'हिमगिरि' का जलावतरण जहाज डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नौसेना इसके बाद अन्य स्वदेशी पोतों जैसे विध्वंसक आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि, पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर, एएसडब्ल्यू शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला और डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार का जलावतरण 2025 में करेगी।
स्टील्थ, हथियार और सेंसर प्रणालियों से हैं लैसः
उदयगिरि और हिमगिरि, प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक ) श्रेणी के फ्रिगेट के अनुवर्ती जहाज हैं। इन दोनों जहाजों में डिजाइन, स्टेल्थ, हथियार और सेंसर प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधार शामिल हैं। उदयगिरि को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने तैयार किया है जबकि कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने हिमगिरि का निर्माण किया है।
इनकी खासियतें
- रडार- अवशोषक (रडार एबसॉरबेंट) मैटेरियल और ऐंगल्ड डिजाइन से दुश्मन के रडार पर इन पोत की पहचान करना बेहद मुश्किल।
- वजन : ये पोत लगभग 6,670 टन, लंबाई : 149 मीटर (करीब 15 मंजिला इमारत के बराबर)।
- गति : करीब 52 किमी/घंटा।
- रेंज : एक बार ईंधन भरने के बाद 10 हजार किमी से ज्यादा जा सकता है।
- ये पोत हेलिकॉप्टर ऑपरेशन के लिए सी किंग हेलिकॉप्टर ले जा सकते हैं, जो पनडुब्बी और सतही जहाजों को खोजने-मारने में सक्षम हैं।
- इन पोत पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस होंगे। जो समुद्र और जमीन दोनों लक्ष्यों पर 290+ किमी की दूरी से हमला करने में सक्षम हैं।
- अंतिम चरण में आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की क्षमता, सोनार सिस्टम से लैस हैं, गहरे पानी में पनडुब्बी का पता लगाने में सक्षम।
- अरब सागर में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों और ग्वादर पोर्ट पर चीनी मौजूदगी की निगरानी, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में चीनी युद्धपोतों व पनडुब्बियों पर हर पल रखेंगे नजर।
नौसेना के मुताबिक यह युद्धपोत भारत की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की ताकत दिखाने का मौका है, इन जहाजों के शामिल होने से हिंद महासागर में भारत की पकड़ और मजबूत होगी। इन दोनों युद्धपोत के आने से भारत न सिर्फ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की निगरानी कर सकेगा, बल्कि मलक्का जलडमरूमध्य तक चीनी जहाजों की हर हलचल पर नजर रख पाएगा।
यह हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान को सीधा संदेश भी है। चीन हाल के वर्षों में हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, खासकर श्रीलंका, मालदीव और अफ्रीकी तटों पर बंदरगाहों के जरिये। वहीं पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट पर चीन की नौसैनिक गतिविधियां भारत के लिए चिंता का विषय रही हैं।