राजधानी में नाक का सवाल बन गई पानी की लड़ाई, जल मिलने के पहले ही श्रेय की जंग शुरू
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देश की राजधानी दिल्ली की आबादी दो करोड़ से ऊपर है। एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में एक व्यक्ति की जरूरत के लिए रोजाना लगभग 240 लीटर पानी की जरूरत होती है। इस तरह दिल्ली की पूरी आबादी की जरूरत के लिए रोजाना लगभग 114 करोड़ गैलन पानी की जरूरत रोजाना होती है।
लेकिन राजधानी की प्यास बुझाने के लिए काम कर रहे दिल्ली जल बोर्ड से केवल 93.6 करोड़ गैलन पानी की ही आपूर्ति हो पाती है। यानी रोजाना लगभग 20.4 करोड़ गैलन। टैंकर माफिया करोड़ों रुपये की काली कमाई कर रहे हैं। बावजूद इसके केंद्र और राज्य सरकार इसके लिए कोई उपाय नहीं कर सकी हैं।
पीने के पानी का संकट
दिल्ली के लगभग 81 फीसदी लोगों को पीने का पानी नल के जरिए मिल पाता है। यानी लगभग 19 फीसदी आबादी अभी भी ऐसी है जिसे पीने के पानी के लिए अन्य साधन पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी बीच दिल्ली सरकार ने चंद्रावल में नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरु किया है।
सरकार का दावा है कि इस प्लांट के पूरी तरह काम करना शुरू करने के बाद इससे 47.7 करोड़ लीटर पानी का रोजाना शोधन किया जा सकेगा। इसका लाभ दिल्ली के लगभग 22 लाख लोगों को मिलेगा। सरकार का दावा है कि प्लांट तीन साल के अंदर पूरी तरह काम करने लगेगा। इसमें लगभग 599 करोड़ की लागत आएगी।
राजनीतिक दलों के बीच लड़ाई का अहम मुद्दा
दिल्ली में पानी का मुद्दा धीरे-धीरे राजनीतिक दलों की नाक की लड़ाई बनता दिख रहा है। अरविंद केजरीवाल सरकार का दावा है कि उसने पानी की व्यवस्था में सुधार किया है, वहीं भाजपा और कांग्रेस मटका फोड़ प्रदर्शन कर यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि दिल्ली में पीने के पानी का घोर संकट है।
भाजपा का कहना है कि राज्य सरकार लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने में असफल रही है। दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव फरवरी माह के पहले होने हैं। इस तरह चुनाव में महज छह से सात महीने का ही समय रह गया है। ऐसे समय में इस तरह के प्रदर्शन सरकार के लिए मुसीबत बन सकते हैं।
2024 तक सबके घर में पानी
परेशानी को भांपते हुए दिल्ली सरकार ने इसके लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में सभी लोगों को 2024 तक टोंटी जल के द्वारा पानी सप्लाई करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसके बारे में जानकारी देते हुए दावा किया कि उनके 2015 में सत्ता में आने के समय दिल्ली में केवल 58 फीसदी घरों तक में ही नल के जल की सप्लाई होती थी, लेकिन आज 88 फीसदी घरों में पेय जल की सप्लाई होती है।
अरविंद केजरीवाल का दावा झूठा
दिल्ली भाजपा के नेता मनीष सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार आंकड़ों के मामले में भी झूठ बोल रही है। सच्चाई यह है कि दिल्ली की बड़ी संख्या में आबादी को पानी नहीं मिल रहा है। अवैध कालोनियों के अलावा उच्च कालोनियों में भी लोगों को जल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। 2024 तक के सरकार के दावे पर मनीष सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही पूरे देश के लोगों तक नल से जल देने की योजना की शुरुआत कर दी है।
उन्होंने कहा कि साल 2024 तक इस योजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केजरीवाल सरकार केवल उसी काम का श्रेय लेने के लिए अभी से योजना बनाकर चल रही है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल को बताना चाहिए कि पिछले पांच साल में उन्होंने कितने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए हैं।