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Waqf: वक्फ संपत्ति विवाद में कर्नाटक के किसानों से मिले जेपीसी अध्यक्ष, कांग्रेस बोली- उन्हें कोई अधिकार नहीं
Thu, 07 Nov 2024 12:10 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 07 Nov 2024 12:10 PM IST
सार
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा है कि 'पूरी जेपीसी टीम को कर्नाटक से चले जाना चाहिए। उन्हें किसने अधिकार दिया कि वे किसानों से मिलें? एक तरफा तरीके से राजनीतिक फैसले ले लेना ठीक नहीं है।'
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बीजेपी सांसद जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल
- फोटो : ANI
विस्तार
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बनी जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने आज कर्नाटक में किसानों से मुलाकात की। दरअसल इन किसानों की जमीन पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया था। जिसे लेकर कर्नाटक में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। किसानों से मुलाकात के बाद जगदंबिका पाल ने कहा कि 'किसानों ने मुझे एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें बताया गया कि जो जमीन उनकी थी, उस पर वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया है। मैंने उनसे पूछा कि क्या उनके पास इस जमीन के मालिकाना हक होने का कोई सबूत है तो किसानों ने बताया कि बीते 50-70 वर्षों से वो ही इस जमीन पर खेती कर रहे हैं।'
कांग्रेस सांसद बोले- उन्हें किसानों से मिलने का अधिकार किसने दिया?
जगदंबिका पाल का किसानों से मिलना राज्य की कांग्रेस सरकार को पसंद नहीं आया है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा है कि 'पूरी जेपीसी टीम को कर्नाटक से चले जाना चाहिए। उन्हें किसने अधिकार दिया कि वे किसानों से मिलें? एक तरफा तरीके से राजनीतिक फैसले ले लेना ठीक नहीं है। जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पहले ही कह चुकी है कि मामला निपट गया है और किसानों की जमीन उनके पास ही रहेगी फिर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है। उनका कदम देश के संसदीय लोकतंत्र के हित में नहीं है।'
डिप्टी सीएम ने राजनीतिक ड्रामा करार दिया
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने जेपीसी अध्यक्ष के किसानों से मिलने को राजनीतिक ड्रामा करार दिया। उन्होंने कहा कि भूमि, राज्य के अधिकार क्षेत्र में आती है। भाजपा के समय में यानी साल 2019 में ही ये शुरू हुआ था। उनकी सरकार में किसानों को नोटिस दिए गए, लेकिन मेरी सरकार इस बात के लिए समर्पित है कि दस्तावेजों में कोई बदलाव नहीं होगा। हम नहीं चाहते कि किसान प्रभावित हों। ये भाजपा ने शुरू किया और अब हम पर आरोप लगाए जा रहे हैं। जेपीसी के पास अधिकार नहीं है। वे यहां सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए आए हैं।'
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भाजपा का पलटवार
भाजपा नेता और पूर्व सीएम बासवराज बोम्मई ने कहा कि यह सत्ता के दुरुपयोग का मामला है, जहां किसानों की जमीन को वक्फ संपत्ति में बदल दिया गया। वक्फ के अधिकार तय हैं, लेकिन मौजूदा सरकार और इसके मंत्रियों ने ताकत का गलत इस्तेमाल करते हुए किसानों के खिलाफ साजिश रची। इससे पूरा किसान वर्ग प्रभावित हुआ है।
जेपीसी के विपक्षी सदस्य अगले दौर की बैठकों का बहिष्कार करेंगे
इस बीच वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी के अध्यक्ष पर मनमानी और मनमानी कार्रवाई का आरोप लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त संसदीय समिति के विपक्षी सदस्य 9 नवंबर से शुरू होने वाली बैठकों के अगले दौर का बहिष्कार करेंगे। वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी के सदस्य बनर्जी ने कहा कि जेपीसी के अध्यक्ष ने छह दिनों में गुवाहाटी, भुवनेश्वर, कोलकाता, पटना और लखनऊ में बैठकों का व्यस्त कार्यक्रम तय किया है, जिसमें रविवार को छुट्टी है। भविष्य की कार्रवाई का फैसला विपक्ष के सदस्य मिलकर करेंगे।
बनर्जी ने कहा कि जेपीसी के विपक्षी सदस्यों ने 5 नवंबर को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और कार्यक्रम को स्थगित करने तथा जेपीसी की बैठकों की संख्या को सप्ताह में दो दिन से घटाकर सप्ताह में एक दिन या हर पखवाड़े में दो लगातार दिन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने मौखिक रूप से उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और चेयरमैन से बात करने पर सहमति जताई थी, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ।
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कांग्रेस सांसद बोले- उन्हें किसानों से मिलने का अधिकार किसने दिया?
जगदंबिका पाल का किसानों से मिलना राज्य की कांग्रेस सरकार को पसंद नहीं आया है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा है कि 'पूरी जेपीसी टीम को कर्नाटक से चले जाना चाहिए। उन्हें किसने अधिकार दिया कि वे किसानों से मिलें? एक तरफा तरीके से राजनीतिक फैसले ले लेना ठीक नहीं है। जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पहले ही कह चुकी है कि मामला निपट गया है और किसानों की जमीन उनके पास ही रहेगी फिर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है। उनका कदम देश के संसदीय लोकतंत्र के हित में नहीं है।'
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डिप्टी सीएम ने राजनीतिक ड्रामा करार दिया
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने जेपीसी अध्यक्ष के किसानों से मिलने को राजनीतिक ड्रामा करार दिया। उन्होंने कहा कि भूमि, राज्य के अधिकार क्षेत्र में आती है। भाजपा के समय में यानी साल 2019 में ही ये शुरू हुआ था। उनकी सरकार में किसानों को नोटिस दिए गए, लेकिन मेरी सरकार इस बात के लिए समर्पित है कि दस्तावेजों में कोई बदलाव नहीं होगा। हम नहीं चाहते कि किसान प्रभावित हों। ये भाजपा ने शुरू किया और अब हम पर आरोप लगाए जा रहे हैं। जेपीसी के पास अधिकार नहीं है। वे यहां सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए आए हैं।'
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भाजपा का पलटवार
भाजपा नेता और पूर्व सीएम बासवराज बोम्मई ने कहा कि यह सत्ता के दुरुपयोग का मामला है, जहां किसानों की जमीन को वक्फ संपत्ति में बदल दिया गया। वक्फ के अधिकार तय हैं, लेकिन मौजूदा सरकार और इसके मंत्रियों ने ताकत का गलत इस्तेमाल करते हुए किसानों के खिलाफ साजिश रची। इससे पूरा किसान वर्ग प्रभावित हुआ है।
जेपीसी के विपक्षी सदस्य अगले दौर की बैठकों का बहिष्कार करेंगे
इस बीच वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी के अध्यक्ष पर मनमानी और मनमानी कार्रवाई का आरोप लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त संसदीय समिति के विपक्षी सदस्य 9 नवंबर से शुरू होने वाली बैठकों के अगले दौर का बहिष्कार करेंगे। वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी के सदस्य बनर्जी ने कहा कि जेपीसी के अध्यक्ष ने छह दिनों में गुवाहाटी, भुवनेश्वर, कोलकाता, पटना और लखनऊ में बैठकों का व्यस्त कार्यक्रम तय किया है, जिसमें रविवार को छुट्टी है। भविष्य की कार्रवाई का फैसला विपक्ष के सदस्य मिलकर करेंगे।
बनर्जी ने कहा कि जेपीसी के विपक्षी सदस्यों ने 5 नवंबर को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और कार्यक्रम को स्थगित करने तथा जेपीसी की बैठकों की संख्या को सप्ताह में दो दिन से घटाकर सप्ताह में एक दिन या हर पखवाड़े में दो लगातार दिन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने मौखिक रूप से उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और चेयरमैन से बात करने पर सहमति जताई थी, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ।
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