महाराष्ट्र: विधान परिषद चुनाव में एनडीए के सभी नौ उम्मीदवारों की जीत, कांग्रेस के एक प्रत्याशी को मिली विजय
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में एनडीए के सभी नौ उम्मीदवारों की जीत हुई है। उधर, कांग्रेस के एक उम्मीदवार की जीत हुई है। भारतीय जनता पार्टी के चार, एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के दो और अजित पवार नीत राकांपा के दो उम्मीदवारों की जीत हुई है।
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महाराष्ट्र एमएलसी चुनाव में अब तक दस उम्मीदवारों की जीत हुई है। इनमें से एनडीए के सभी उम्मीदवारों की जीत हुई है। उधर, कांग्रेस के एक उम्मीदवार की विजय मिली है। भारतीय जनता पार्टी के पांच, एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के दो और अजित पवार नीत राकांपा के दो उम्मीदवारों की जीत हुई है। विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल न होने पर भी विपक्षी गठबंधन, महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने विधान परिषद चुनाव में तीन प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को नया मोड़ दे दिया। जबकि, सत्ताधारी गठबंधन, महायुति ने नौ प्रत्याशी उतारे।
पांच विधायकों ने हमें समर्थन दिया- अजित पवार
जीत के बाद राकांपा प्रमुख अजित पवार ने कहा, ‘पांच विधायकों ने हमें समर्थन दिया है, मैं उनका धन्यवाद अदा करता हूं। चुनाव जब रहता तो आरोप लगते रहे हैं और उनके बारे में ज्यादा नहीं सोचता। मैं विकास के काम करने पर ध्यान देता हूं। महायुति के विधानसभा चुनाव में भी ऐसी ही जीत मिलनी चाहिए। हम जीत के लिए जी-जान लगा देंगे।’
किसने कितने उम्मीदवार मैदान में उतारे
कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने एक-एक उम्मीदवार मैदान में उतारा, जबकि महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की सहयोगी एनसीपी (शरद चंद्र पवार) पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के उम्मीदवार का समर्थन किया। विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल न होने पर भी विपक्षी गठबंधन, महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने विधान परिषद चुनाव में तीन प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है। जबकि, सत्ताधारी गठबंधन, महायुति ने नौ प्रत्याशी उतारे हैं। उधर, एनसीपी (शरद चंद्र पवार) ने दावा किया था कि अजित पवार के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी खेमे के कुछ विधायक लोकसभा चुनावों में एमवीए के बेहतर प्रदर्शन के बाद संभावित वापसी के लिए उनकी पार्टी के संपर्क में हैं।
विधान परिषद चुनाव से पहले तीन विधायकों ने अहम बैठक में नहीं लिया हिस्सा
महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव से पहले कांग्रेस खेमे में अजीबोगरीब स्थिती देखी गई। दरअसल, क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने एक बैठक बुलाई थी। सियासी गलियारों में उस समय हलचल मच गई, जब उसके 37 में से तीन विधायक बैठक से नदारद रहे।