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परिसीमन के लिए विशेष सत्र की तैयारी तेज: शांति से कैसे हो? उधेड़बुन में सरकार; नीट के बाद एसआईआर पर संग्राम

Fri, 23 Oct 2026 04:39 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Fri, 23 Oct 2026 04:39 AM IST
सार

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार विशेष सत्र बुलाने की संभावनाएं तलाश रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार को जरूरी समर्थन मिलने की उम्मीद है, लेकिन संसद में जारी राजनीतिक टकराव चिंता का विषय बना हुआ है।

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एसआईआर विवाद से संसद में सहमति की राह मुश्किल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संविधान संशोधन विधेयकों के जरिये महिला आरक्षण और परिसीमन को अमली जामा पहनाने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। सूत्रों का दावा है कि इस बार संख्या बल भी उसके पास है। हालांकि, इसके लिए विशेष सत्र की संभावना तलाशने में जुटी सरकार अब तक सदन में शांति बहाल करने का रास्ता नहीं ढूंढ़ पाई है।
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संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इसे पारित कराने के लिए सदन में व्यवस्था बहाल होना सांविधानिक रूप से अनिवार्य है। सरकार ने विशेष सत्र की संभावना तलाशने के लिए ही अब तक मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया है। सूत्र ने कहा कि सत्रावसान नहीं होने के कारण तीन दिन के अल्प समय के नोटिस पर विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। सरकार को उम्मीद थी कि मानसून सत्र के अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद स्थिति में बदलाव आएगा। हालांकि, नीट विवाद के बाद अब एसआईआर पर छिड़े नए सिरे से संग्राम के कारण सदन में शांति बहाली का रास्ता नहीं निकाला जा सका है।
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पहले नीट तो अब एसआईआर पर छिड़ा संग्राम बन रही बाधा
सरकार का दो तिहाई से अधिक संख्या बल का दावा : सूत्र ने कहा कि व्यापक राजनीतिक बदलाव के बाद सरकार ने विधेयक के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल जुटा लिया है। विरोध करने वाले कुछ दल समर्थन के लिए राजी हुए हैं। कुछ दलों के साथ मतदान के दौरान अनुपस्थिति पर सहमति बनी है। हालांकि, मुख्य समस्या एसआईआर पर नए सिरे से छिड़ा सियासी संग्राम है। विशेष सत्र में अगर कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया तो विधेयक का साथ देने वाले कुछ विपक्षी दल इस मुद्दे से दूरी नहीं बना पाएंगे। 
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संविधान संशोधन विधेयक में शांति बहाली अनिवार्य शर्त 
सरकार सामान्य विधेयक को हंगामे के बीच तो ध्वनि मत से पारित करा सकती है, मगर संविधान का अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन विधेयक मामले में इसकी अनुमति नहीं देता। यह अनुच्छेद साफ कहता है कि ऐसे विशेष विधेयकों को पारित कराते समय सदन में हर हाल में व्यवस्था बहाली जरूरी है। साल 1971 में 24वें, 25वें संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान के दौरान विपक्ष ने भारी हंगामा किया था। 
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