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Vishnu Deo Sai: 'आदिवासी मिशन' को आगे बढ़ाएंगे विष्णुदेव साय; सीएम पद की दौड़ में दूसरों से क्यों निकले आगे?

Sun, 10 Dec 2023 07:03 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 10 Dec 2023 07:03 PM IST
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सार
चुनावों में आदिवासी समुदाय का भाजपा को समर्थन लगातार बढ़ता गया है। लोकसभा चुनावों, गुजरात, मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों में भी यह क्रम बरकरार रहा है। विष्णुदेव साय के सामने इस समर्थन को बढ़ाते हुए अपनी उपयोगिता साबित करने की चुनौती होगी। 
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Vishnu Deo Sai will take forward the Tribal Mission Why did he come ahead of others in the race for CM post
Vishnu Deo Singh - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मिशन आदिवासी समाज' को अब विष्णुदेव साय आगे बढ़ाएंगे। केंद्र के इशारे को भांपते हुए छत्तीसगढ़ में भाजपा विधायकों की बैठक में उन्हें इस आदिवासी बहुल राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए चुन लिया गया है। आरएसएस के स्वयं सेवक से सांसद, विधायक और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष होते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पद तक की यात्रा तय करने वाले विष्णुदेव साय के ऊपर आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को आदिवासी समुदाय की बहुलता वाली सीटों पर जीत दिलाने की जिम्मेदारी होगी। 



भाजपा के जानकारों के अनुसार, आदिवासी मतदाताओं पर साय की जबरदस्त पकड़ इस रेस में आगे निकलने की सबसे बड़ी वजह बन गई। जिस आदिवासी बहुल क्षेत्र सरगुजा में पिछले चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया था, साय ने इस चुकाव में बाजी पलट दी। बघेल सरकार के आदिवासी समाज के लिए विकास के तमाम दावे करने के बाद भी उन्होंने इस क्षेत्र से कांग्रेस को उखाड़ फेंका। इसे उनकी करिश्माई सफलता के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद की रेस में बाकी दावेदारों से आगे निकलने के पीछे यह अहम कारण रहा। 


साय के सामने सबसे पहली चुनौती बदहाल अर्थव्यवस्था वाले राज्य छत्तीसगढ़ में लोककल्याणकारी योजनाओं को बरकरार रखने की होगी। केवल चार महीने के बाद लोकसभा के चुनाव होंगे। इतने कम समय में उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता को यह भरोसा दिलाना होगा कि उसने उन्हें मुख्यमंत्री चुनकर कोई गलत काम नहीं किया है। अजित जोगी के बाद आदिवासी समुदाय के दूसरे व्यक्ति के मुख्यमंत्री बनने से इस समुदाय में एक गर्व का एहसास होगा। 

विष्णुदेव साय को इस आदिवासी स्वाभिमान की सोच को एक नई ऊंचाई देते हुए उन्हें 'मोदी की गारंटी' के प्रति आश्वस्त करना होगा। महतारी वंदन योजना को सफलतापूर्वक चलाकर मतदाताओं को पूरी तरह भाजपा के पक्ष में एकजुट करते हुए लोकसभा की सभी दस सीटों को जीतना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस भरोसे के साथ राज्य की बागडोर उनके हाथ सौंपी है, उस पर खरा उतरकर वे केंद्र की निगाह में अपनी उपयोगिता साबित कर सकते हैं।  

पिछले चुनावों में आदिवासी समुदाय का भाजपा को समर्थन लगातार बढ़ता गया है। लोकसभा चुनावों, गुजरात, मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों में भी यह क्रम बरकरार रहा है। विष्णुदेव साय के सामने इस समर्थन को बढ़ाते हुए अपनी उपयोगिता साबित करने की चुनौती होगी। 

इसी समय आदिवासी समाज की बहुलता वाले एक अन्य राज्य झारखंड में राजनीतिक भूचाल आया हुआ है। कांग्रेस नेता और सांसद के घर 300 करोड़ रुपये की बरामदगी हुई है। यदि विष्णुदेव साय बेहतर कामकाज कर आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर काम करके एक मानक गढ़ पाते हैं तो झारखंड के आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को यह मुद्दा सूट कर सकता है। तमाम आकांक्षाओं की नाव पर सवार विष्णुदेव साय इनमें कितना खरे उतर पाते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी। 

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