दक्षिण चीन सागर पर चीन की मनमर्जी को भारत के सामने रखेगा वियतनाम
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भारत के साथ आगामी वार्षिक सुरक्षा बैठक में वियतनाम दक्षिण चीन सागर पर मौजूदा स्थिति को सामने रखेगा। इस साल जुलाई से अब तक चीनी पोत चार बार वियतनाम के विशेष आर्थिक जोन (ईईजेड) में घुसपैठ कर चुके हैं।
भारत उन तीन देशों में से एक है, जिसके साथ वियतनाम की व्यापक रणनीतिक साझेदारी है। इसी महीने ची मिन्ह सिटी में भारत के साथ वार्षिक बैठक का आयोजन होगा। वियतनाम के राजदूत फाम सं छौ ने बुधवार को एक अंग्रेजी वेबसाइट से बातचीत में कहा कि ताजा घटना में 30 सितंबर को 28 चीनी पोतों ने घुसपैठ की। करीब तीन महीने पहले चीनी पोतों ने पहली बार घुसपैठ की थी। तब से अब तक 40 से ज्यादा चीनी पोत यहां घुस चुके हैं। हमने उनसे कहा कि उन्हें हमारी जल सीमा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए और उन्हें तुरंत लौट जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'उम्मीद है कि बैठक में न सिर्फ दोनों देशों की बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर बात हो सकेगी। हम दक्षिण चीन सागर की मौजूदा स्थिति को भी भारत के समक्ष रखेंगे।' यह मुद्दा इसलिए भी खास है क्योंकि पिछली तीन बार चीनी पोतों ने जहां घुसपैठ करने की कोशिश की है, वहां ओएनजीसी विदेश उर्जा उत्पादन में लगा हुआ है। चीनी पोत गत 3 जुलाई को ओएनजीसी विदेश के काफी करीब पहुंच गए थे।
कई अन्य क्षेत्र में भी सहयोग
वियतनाम के राजनयिक ने दोनों देशों के बीच रक्षा व सुरक्षा सहयोग, व्यापार व निवेश और विज्ञान व तकनीक में साझेदारी जैसे मुद्दे प्राथमिक हैं। दोनों देशों के बीच 500 मिलियन डॉलर की लाइन आफ क्रेडिट पर भी बात चल रही है। भारत द्वारा दी जाने वाली मदद से वियतनाम रक्षा उपकरण खरीदेगा।
कोलकाता से सीधे हनोई तक फ्लाइट :
फाम शं छौ ने यह भी बताया कि भारत की विमानन कंपनी इंडिगो और वियतनाम की सस्ती एयरलाइन वियतजेट दोनों देशों के बीच सीधी फ्लाइट शुरू करने जा रही है। तीन अक्तूबर से हनोई से कोलकाता और दिल्ली व अन्य शहरों को जोड़ने वाली सीधी विमान सेवा शुरू होगी। इसके अलावा सात दिसंबर से हो ची मिन्ह सिटी से दिल्ली के लिए हफ्ते में तीन दिन विमान सेवा शुरू होगी।