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SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पीड़ित को निष्पक्ष जांच-सुनवाई का मौलिक अधिकार; MLA के घर पर मारपीट का मामला
Fri, 24 Feb 2023 10:52 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 24 Feb 2023 10:52 PM IST
सार
शीर्ष कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को आदेश दिया कि वह सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड के बंगले पर एक व्यक्ति पर कथित हमले की आगे की जांच करे।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र पुलिस को आदेश दिया कि वह सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड के बंगले पर एक व्यक्ति पर कथित हमले की आगे की जांच करे। कथित घटना पांच अप्रैल, 2020 की रात को हुई थी।
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पीड़ित की शिकायत के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मी भी उनका 'अपहरण' करने और उन्हें महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री के बंगले पर ले जाने में शामिल थे। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने मामले में सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार किया और कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपने से इनकार करके कोई गलती नहीं की है।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा कि जहां तक जांच सीबीआई को सौंपने से इनकार करने का सवाल है तो वह हाईकोर्ट के विचार से पूरी तरह सहमत है। बेंच ने कहा, 'यहां तक कि राज्य की जांच एजेंसी के अनुसार, आगे की जांच की आवश्यकता है, जैसा कि इस कोर्ट ने पहले के फैसलों में कहा है। पीड़ित को निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष सुनवाई का मौलिक अधिकार है।
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बेंच ने कहा, केवल आरोपपत्र दाखिल करना और आरोप तय करना आगे की जांच या पुन: जांच या नए सिरे से जांच का आदेश देने में बाधा नहीं हो सकता है।
शीर्ष कोर्ट ने अधिकारियों को आगे की जांच करने और इसे जल्द से जल्द, आदर्श स्थिति में तीन माह के भीतर, पूरा करने का निर्देश दिया। शिकायत के अनुसार, शहर के एक सिविल इंजीनियर अनंत करमुसे (40 वर्षीय) के घर पर कुछ पुलिसकर्मी आये थे और उन्हें थाने साथ चलने को कहा था, लेकिन उन्हें थाने ले जाने के बजाय आव्हाड के बंगले पर ले जाया गया।
करमुसे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि मंत्री की छेड़छाड़ की गयी तस्वीर फेसबुक पर साझा करने को लेकर बंगले में उन्हें करीब 10-15 लोगों ने बुरी तरह पीटा था।