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चुनावी वादों पर कानून: उपराष्ट्रपति ने की मामले में बहस की अपील, कहा- वादे लोगों की भलाई के होने चाहिए
Mon, 18 Apr 2022 08:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मछलीपट्टनम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मछलीपट्टनम
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 18 Apr 2022 08:21 PM IST
सार
देश में एक ऐसे कानून की मांग है जो चुनावी वादों पर नजर रखे और वादों को पूरा करने में विफल रहने पर उन दलों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई को करे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कानून को लेकर सभी स्तरों पर राष्ट्रव्यापी बहस की भी जरूरत है।
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एम वेंकैया नायडू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को राजनीतिक दलों द्वारा किे जाने वाले चुनावी वादों को लागू करने के लिए कानून बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस के लिए देशव्यापी बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वादे करते समय राजनीतिक दलों को जिम्मेदार होना चाहिए। उन्हें केवल वही वादे करना चाहिए, जिन्हें लागू किया जा सकता है। साथ ही जो वादे किए गए हों, उसमें लोगों की भलाई के लिए निहित होनी चाहिए।
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वेंकैया नायडू ने सोमवार को यहां जिला परिषद कार्यालय में कृष्णा जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष पिन्नामनेनी कोटेश्वर राव की आदमकद कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं।
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उन्होंने कहा कि देश में एक ऐसे कानून की मांग है जो चुनावी वादों पर नजर रखे और वादों को पूरा करने में विफल रहने पर उन दलों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई को करे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कानून को लेकर सभी स्तरों पर राष्ट्रव्यापी बहस की जरूरत है।
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उन्होंने अफसोस जताया कि राजनीतिक दल न केवल असीमित संख्या में वादे करते हैं, बल्कि वे वादे भी करते हैं, जिन्हें लागू करना अव्यावहारिक होता है। वेंकैया नायडू ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आपको अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के आचरण पर लगातार नजर रखनी चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने खेद व्यक्त किया कि जाति, समुदाय, रुपये पैसे और अपराध, क्षमता और आचरण पर हावी हो रहे हैं। ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। इस दौरान उन्होंने संसद से लेकर स्थानीय निकायों तक राजनीतिक विमर्श के पतन पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वाद-विवाद का स्तर गिर रहा है और गरिमा की कमी हो रही है। सभी को अपनी भाषा, व्यवहार और आचरण की समीक्षा करनी चाहिए।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने ढाई दशक से अधिक समय तक कृष्णा जिला परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले पिन्नामनेनी कोटेश्वर राव के नेतृत्व को याद किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि दिवंगत नेता ने लोगों के मन में एक स्थायी छाप छोड़ी। वे जिस पर विश्वास करते थे, उस पर कायम रहे। कांग्रेस से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने अपने अधिकार का प्रयोग राजनीतिक तरीके से किया और पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक नेतृत्व प्रदान किया।
राज्य मंत्री जे रमेश, कृष्णा जेडपी अध्यक्ष यू हरिका, विजयवाड़ा लोकसभा सदस्य केसिनेनी श्रीनिवास, मछलीपट्टनम के विधायक पेर्नी वेंकटरमैया, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त के वी चौधरी और अन्य भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।