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Defence: रूस-यूक्रेन युद्ध ने समझाई रक्षा विनिर्माण के स्वदेशीकरण की जरूरत, नौसेना अधिकारी ने की अहम टिप्पणी

Tue, 11 Apr 2023 07:31 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 11 Apr 2023 07:31 PM IST
सार

अपने संबोधन के दौरान नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय महिंद्रा ने अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों ने भारतीय रक्षा बलों के लिए हथियार और उपकरणों की अनउपलब्धता को और बढ़ा दिया है। 
 

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Vice Admiral Sanjay Mahindru says Russia-Ukraine war underscored need for indigenisation of defence mfg
वाइस एडमिरल संजय महेंद्रु - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय महेंद्रु ने  भारत में सैन्य हथियारों के निर्माण पर जोर दिया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने रक्षा विनिर्माण के स्वदेशीकरण की भारत की आवश्यकता को रेखांकित किया है। दोनों देशों के बीच एक साल से भी जारी युद्ध के कारण रूस से मंगाए जाने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों की उपलब्धता में देरी हो रही है। ऐसे में हमें इनके स्वदेशीकरण की अहमियत समझनी चाहिए।  

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भारत में हथियारों की उपलब्धता पर रूस-यूक्रेन युद्ध का असर 
कोलकाता में नौसैनिक उड्डयन उद्योग के स्वदेशीकरण के लिए एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने ये बयान दिए। संजय महेंद्रु ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग का हानिकारक  प्रभाव हमारे हथियारों के लिए उपकरणों की उपलब्धता पर पड़ा है। इसके अलावा, देश की सुरक्षा को अपने सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए हमारीकई योजनाएं इस अभूतपूर्व स्थिति के कारण बाधित या विलंबित हुई हैं।  
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अपने संबोधन के दौरान नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय महिंद्रा ने अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों के कारण भारतीय रक्षा बलों के लिए हथियार और उपकरणों की अनउपलब्धता को और बढ़ा दिया है। 
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 भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक है। रूस और यूक्रेन की जंग से पहले ही हम अपने देश में हथियार और उपकरणों के निर्माण में लगे थे। बीते सात से आठ सालों से हम अपने  आवश्यकताओं के अनुसार उपकरण बनाने के लिए विकास योजनाएं चला रहे हैं। 

नौसेना लगातार इस क्षेत्र में कर रही काम
स्वदेशी हथियारों के निर्माण में नौसेना के कामों के बारे चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नौसेना जहाज और पनडुब्बी निर्माण में कई दशकों से स्वदेशीकरण में सबसे आगे रही है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि स्वदेशी हथियारों और उपकरणों के निर्माण के लिए नौसेना शिपयार्ड और उद्योगों के लगातार संपर्क में है। साथ ही सैन्य उद्योग की जरूरतों को लेकर और इस क्षेत्र में विचारों के आदान-प्रदान के लिए भी देश के विभिन्न हिस्सों में संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।


स्वदेशी सैन्य तकनीक पर डीआरडीओ का जोर
इस कार्यक्रम में डीआरडीओ की वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विकास कोष योजना (टीडीएफ) की निदेशक निधि बंसल भी शामिल थी। उन्होंने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि अगर भविष्य में भारतीय सेना को कोई युद्ध लड़ना है तो यह महत्वपूर्ण है कि यह स्वदेशी सैन्य तकनीक से लड़ा जाए।

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