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Gyanvapi: ‘ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपें’ विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने अंजुमन इंतेजामिया से की अपील

Sun, 28 Jan 2024 05:48 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 28 Jan 2024 05:48 AM IST
सार

विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, कोर्ट में पेश एएसआई के सबूत एवं निष्कर्ष साबित करते हैं कि इस पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में था और वर्तमान में यह एक हिंदू मंदिर है।

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VHP President Alok Kumar appeals to Anjuman Intejamia to Hand over Gyanvapi complex to Hindus
Gyanvapi case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने एएसआई सर्वेक्षण की रिपोर्ट में मंदिर होने की पुष्टि के बाद मुस्लिम पक्ष से अपील की है कि वह वाराणसी का ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंप दे। साथ ही वजूखाना क्षेत्र में पाए गए शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति देने की भी मांग की। 

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विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, कोर्ट में पेश एएसआई के सबूत एवं निष्कर्ष साबित करते हैं कि इस पूजा स्थल का धार्मिक चरित्र 15 अगस्त, 1947 को अस्तित्व में था और वर्तमान में यह एक हिंदू मंदिर है। उपासना स्थल अधिनियम, 1991 की धारा 4 के अनुसार भी इस संरचना को हिंदू मंदिर घोषित किया जा सकता है। 

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विहिप ने ज्ञानवापी में मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी से आह्वान किया कि वह मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करे और काशी विश्वनाथ के मूल स्थल को हिंदू समुदाय को सौंप दे।

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सर्वे रिपोर्ट में साबित हुआ कि मंदिर तोड़कर बनाई गई मस्जिद
गौरतलब है कि ज्ञानवापी मामले से जुड़ी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है। गुरुवार देर शाम जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्ववेश की अदालत ने सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी। इसके मुताबिक, ज्ञानवापी परिसर में मंदिर की संरचना मिली है। इस पर हिंदू पक्ष ने अपनी जीत बताते हुए कहा है कि सर्वे रिपोर्ट से साफ हो गया कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। अब हिंदुओं को पूजा-पाठ की अनुमति मिलनी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ से मुस्लिम पक्ष ने कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने की घोषणा की है।


एक नजर में

  • 1991: लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ का मुकदमा दाखिल करके पहली बार पूजापाठ की अनुमति मांगी गई। इस पर जिला अदालत ने सुनवाई की और मामला विचाराधीन ही रहा।
  • 1993: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया।
  • 2018: सुप्रीम कोर्ट ने स्टे ऑर्डर की वैधता छह महीने बताई।
  • 2019: वाराणसी की जिला अदालत ने मामले की सुनवाई फिर शुरू की।
  • 2023: जिला जज की अदालत ने सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दिया। सर्वे पूरा हुआ और रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई। इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1991 के लॉर्ड विश्वेश्वर मामले में स्टे ऑर्डर हटाया। एएसआई से सर्वे कराने और रिपोर्ट निचली अदालत में दाखिल करने का आदेश दिया।
  • 2024: जिला जज की अदालत ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पक्षकारों को उपलब्ध कराने का आदेश पारित किया। सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक हुई।



 

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