VHP ने 54 साल बाद वोटिंग से चुना अध्यक्ष, आखिरकार हारे प्रवीण तोगड़िया
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विश्व हिन्दू परिषद की कभी रीढ़ कहे जाने वाले प्रवीण भाई तोगड़िया आखिरकार पस्त हो ही गए। आरएसएस के चहेते विष्णु सदाशिव कोकजे विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। तोगड़िया के विश्व हिन्दू परिषद पर दबदबे के कारण विश्व हिन्दू परिषद में अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की नौबत आई और इस चुनाव में तोगड़िया के प्रिय राघव रेड्डी सांगठनिक चुनाव में कोकजे से हार गए। कोकजे के साथ संघ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत तमाम शुभ चिंतक खड़े थे। इसके आगे बगावती तेवर अख्तियार करने वाले तोगड़िया की नहीं चल पाई।
विष्णु सदाशिव कोकजे हिमाचल के राज्यपाल रह चुके हैं। वह संघ के अनुषांगिक संगठन भारत विकास परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं। मौजूदा समय में विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे। अब अध्यक्ष चुने गए हैं। संघ के चहेते हैं। संघ उन्हें इस पद पर पहले भी बिठाना चाहता था, ताकि विश्व हिन्दू परिषद में प्रवीण भाई तोगड़िया के लगातार बढ़ रहे वर्चस्व को कमजोर किया जा सके। तोगड़िया के बारे में आम है कि सांगठनिक क्षमता से भरपूर हैं। उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व प्रमुख स्व. अशोक सिंघल के साथ विहिप को काफी दमदार बनाया था। तोगड़िया आसानी से हार मानने वालों में नहीं हैं।उनको यह मंजूर नहीं था।
तोगड़िया इस पूरे प्रयास के पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदार मानकर चल रहे थे। कभी प्रधानमंत्री मोदी के बेहद करीबी और रणनीतिक साझीदार रहे तोगड़िया की वैसे भी एक दशक से अधिक समय से अच्छी नहीं निभ रही है। पिछले कुछ महीने से तोगड़िया प्रधानमंत्री पर खुद को खत्म करवाने की साजिश रचने तक का आरोप लगा चुके हैं।
चुनाव से पहले रार
विहिप में चुनाव को लेकर भी तोगड़िया का गुट आक्रामक था। विहिप के महासचिव चंपत राय यही आरोप लगाते हैं। चंपत राय का कहना है कि तोगड़िया के साथ आए लोगों ने चुनाव के दौरान धक्का मुक्की की। हालांकि तोगड़िया के समर्थक इसे ध्यान भटकाने की साजिश मान रहे हैं। कुछ समय पहले चंपत राय ने विहिप में चल रहे इस घमासान को लेकर अमर उजाला से बात की थी। तब चंपत राय को उम्मीद थी की चुनाव की नौबत नहीं आएगी। माना जा रहा था संघ का दबाव मानकर तोगड़िया अपना पद खुद छोड़ देंगे। कोकजे को भी राघव रेड्डी के खिलाफ चुनाव में नहीं उतरना पड़ेगा। राय ने कहा भी था कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन आखिरकार पहली बार आम सहमति की बजाय चुनाव की नौबत आ ही गई। इसमें कोकजे को 131 तो राघव रेड्डी को 60 मत मिले। यह प्रवीण भाई तोगड़िया के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
चुनाव पर भी प्रवीण का आरोप
विहिप में कार्यकारी परिषद और ट्रस्टी कमेटी में 260 सदस्य हैं। विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल के मुताबिक शनिवार को संपन्न हुए चुनाव के लिए तीन बूथ पर हुआ। इसमें 192 लोगों ने मतदान किया। मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुआ। हालांकि इस चुनाव को लेकर प्रवीण भाई तोगड़िया ने धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतदान सूची में 37 लोगों का नाम इस चुनाव को प्रभावित करने के लिए जोड़ा गया। चंपत राय ने भी इस चुनाव के निष्पक्ष तरीके से संपन्न होने की बात कही है। हालांकि राय के मुताबिक तोगड़िया समर्थक चुनाव को इस तरीके से संपन्न नहीं होने देना चाहते थे। उन्होंने गड़बड़ी की कोशिश की।
तीसरी बार के लिए थे रेड्डी मैदान में
राघव रेड्डी दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वह तीसरी बार इस पद के लिए मैदान में थे। विहिप का अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष काफी महत्वपूर्ण पद होता है। विहिप के संविधान के अनुसार इसका अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ही संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, तथा कई महासचिवों की नियुक्ति करता है। ऐसे में प्रवीण भाई तोगड़िया के विहिप के भीतर दिन लदने के पूरे संकेत हैं।
कौन हैं कोकजे
अवकाश प्राप्त न्यायाधीश विष्णु सदाशिव कोकजे 2003-2008 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल थे। संघ और विहिप से पुराना नाता है। मूलत: इंदौर, मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। एलएलबी की डिग्री लेने के बाद कोकजे ने इंदौर में वकालत शुरू की था। वे जुलाई 1990 से अप्रैल 1994 तक म.प्र. हाईकोर्ट के और अप्रैल 1994 से सितंबर 2001 तक राजस्थान हाईकोर्ट के जज थे। इस तरह से कोकजे के अध्यक्ष बनने के बाद विहिप पर संघ का प्रभाव बढ़ गया है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र में भाजपा की मौजूदा सरकार ने भी इससे राहत की सांस ली है।
क्यों था चुनाव जरूरी
कोकजे पहले भी विहिप के अध्यक्ष हो गए होते। संघ के अंदरुनी मामलों के जानकारों के अनुसार काफी समय से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रवीण भाई तोगड़िया के बीच दरार तल्ख होती जा रही थी। तोगड़िया इस मामले में किसी की नहीं सुन रहे थे। वहीं अगले साल लोकसभा चुनाव होना है। आक्रामक रुख से हिन्दुत्व को सधे अंदाज में बढ़ाने की रणनीति पर चलने वाले तोगड़िया की क्षमता से संघ और बाजपा के नेता वाकिफ थे। इसलिए संघ को प्रवीण भाई को कमजोर किया जाना जरूरी लग रहा था। इधर तोगड़िया जहां विहिप में चुनाव प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे वहीं उन्होंने केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भी हमला तेज कर दिया था। राम मंदिर को लेकर भी काफी तल्ख बयान दे रहे थे।