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Gujarat: केंद्र सरकार के प्रयासों पर ISA का बयान, कहा- हिंद महासागर के खनिज बनाएंगे भारत को आत्मनिर्भर
Wed, 15 Feb 2023 06:05 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 15 Feb 2023 06:05 AM IST
सार
माइकल डब्ल्यू लॉज ने गांधीनगर में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित समुद्रतल खनन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि 1980 के दशक से भारत गहरे समुद्र में खनन के क्षेत्र में शुरुआती अग्रणी निवेशकों में से एक था।
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हिंद महासागर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
विस्तार
हिंद महासागर में खनिजों का विशाल भंडार भारत को निकेल और कोबाल्ट के मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण (आईएसए) के महासचिव माइकल डब्ल्यू लॉज ने डीप ओशन मिशन के माध्यम से इस दिशा में भारत सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत गहरे समुद्र में खनन में वैश्विक भूमिका निभा सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग की जाने वाली लिथियम-आयन बैटरी में निकेल और कोबाल्ट बेहद अहम तत्व हैं। माइकल डब्ल्यू लॉज ने गांधीनगर में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित समुद्रतल खनन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि 1980 के दशक से भारत गहरे समुद्र में खनन के क्षेत्र में शुरुआती अग्रणी निवेशकों में से एक था। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में भारी प्रगति हुई है। डीप ओशन मिशन के तहत भारत की प्रगति अभूतपूर्व रही है। भारत में गहरे समुद्र में खनिज अन्वेषण और दोहन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता है।
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इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग की जाने वाली लिथियम-आयन बैटरी में निकेल और कोबाल्ट बेहद अहम तत्व हैं। माइकल डब्ल्यू लॉज ने गांधीनगर में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित समुद्रतल खनन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि 1980 के दशक से भारत गहरे समुद्र में खनन के क्षेत्र में शुरुआती अग्रणी निवेशकों में से एक था। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में भारी प्रगति हुई है। डीप ओशन मिशन के तहत भारत की प्रगति अभूतपूर्व रही है। भारत में गहरे समुद्र में खनिज अन्वेषण और दोहन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता है।
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