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जिस दिन भाजपा छोड़ूंगा उसी दिन राजनीति से संन्यास ले लूंगा : वरुण गांधी
Tue, 16 Apr 2019 07:22 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 16 Apr 2019 07:22 PM IST
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वरुण गांधी
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लोकसभा चुनाव 2019 में पीलीभीत से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य वरुण गांधी सुलतानपुर से भाजपा सांसद हैं। वहीं उनकी मां और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी सुलतानपुर से चुनाव लड़ रही हैं। अहम सवाल यह है कि ऐसा क्या हुआ कि मां-बेटे को अपनी सीट अदला-बदली करनी पड़ी।
राजनीति के गलियारों में ऐसी चर्चाएं भी सुनी जा रही थी कि वरुण गांधी कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। लेकिन वरुण ने इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा है कि जरुरत पड़ी तो वो अपने चचेरे भाई और बहन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ प्रचार भी कर सकते हैं। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में वरुण गांधी ने विस्तार से इन सभी सवालों के जवाब दिए हैं।
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राजनीति के गलियारों में ऐसी चर्चाएं भी सुनी जा रही थी कि वरुण गांधी कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। लेकिन वरुण ने इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए कहा है कि जरुरत पड़ी तो वो अपने चचेरे भाई और बहन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ प्रचार भी कर सकते हैं। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में वरुण गांधी ने विस्तार से इन सभी सवालों के जवाब दिए हैं।
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...इसलिए की मां के साथ सीट की अदला-बदली
इस बार पीलीभीत से चुनाव लड़ने के सवाल पर वरुण गांधी बताते हैं कि वे यहां से पहले भी सांसद रह चुके हैं। पीलीभीत हो या सुलतानपुर दोनों ही निर्वाचन क्षेत्रों में उन्हें अपने घर जैसा प्यार मिलता है। पीलीभीत से जब उनकी मां मेनका गांधी पहली बार चुनाव जीती थीं तब वे सिर्फ नौ साल के थे। इस बार पार्टी नेतृत्व ने जो फैसला लिया उसका पालन किया है।
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कांग्रेस में शामिल होने पर यह बोले वरुण
वरुण 15 साल पहले भाजपा में शामिल हुए थे। वे कहते हैं कि जिस दिन उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी, उसी दिन कह दिया था कि अगर भाजपा छोड़ी तो वह राजनीति में मेरा आखिरी दिन होगा। वरुण कहते हैं कि उस समय जो कहा था, वही आज भी सत्य है।यूपी सीएम पद की उम्मीदवारी पर बोले
वरुण गांधी का मानना है कि वे उत्तर प्रदेश की राजनीति की बजाए केंद्र की राजनीति में ज्यादा बेहतर भूमिका अदा कर सकते हैं। हालांकि उनकी भूमिका क्या होगी इसका फैसला नेतृत्व करेगा। बता दें कि साल 2017 में वरुण का नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए काफी चर्चा में था।गठबंधन से कोई नुकसान नहीं : वरुण
वरुण गांधी
- फोटो : amar ujala
'सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन से भाजपा को कोई नुकसान नहीं'
वरुण गांधी का मानना है कि 80 फीसदी लोग ऐसी राजनीति का समर्थन करते हैं जिससे उम्मीद जगती हो। इसलिए भारत में उम्मीद की राजनीति हमेशा से ही गुणा गणित की राजनीति को पछाड़ती रही है।वरुण कहते हैं कि गांवों में प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपार समर्थन देखने को मिलता है। वे कहते हैं कि सरकार की सामाजिक सुधार योजनाओं ने लोगों के जिंदगी में बहुत अहम तरीके से प्रभावित किया है।
सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन का पूरा जोर जाति आधारित राजनीति पर है। वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जनता उम्मीद पर वोट करती है।
राहुल और प्रियंका गांधी के खिलाफ कर सकते हैं प्रचार
वरुण गांधी
- फोटो : amar ujala