Vande Bharat Train: सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सबको अपने क्षेत्र में चाहिए यह ट्रेन, खरगे भी कर रहे हैं मांग
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विस्तार
संसद के मानसूत्र सत्र में एक तरफ जहां मणिपुर हिंसा को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष आर पार की लड़ाई में नजर आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ देश की पहली हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेन न केवल देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ रही है, बल्कि विरोधी दलों के नेताओं को भी सरकार के करीब ला रही है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन की दिवानगी का आलम यह है कि इस ट्रेन की चाह सत्ता पक्ष से लेकर विपक्षी दलों के नेताओं में भी है।
सांसद हो या मंत्री, विधायक हो या विपक्षी पार्टियों के नेता हर कोई अपने-अपने क्षेत्र के लिए वंदे भारत ट्रेनों की डिमांड करते हुए नजर आ रहे है। भारतीय रेलवे के पास 200 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेनों को लेकर आवेदन पहुंच चुके हैं। केंद्र सरकार के मंत्रियों के अलावा सांसद- पूर्व सांसद अपने संसदीय क्षेत्रों के लिए वंदे भारत ट्रेनों की मांग करते हुए नजर आ रहे हैं। कोई अपने इलाके में वंदे भारत ट्रेन का स्टॉपेज चाहता है, तो कोई नई ट्रेन।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रियों में प्रह्लाद जोशी, आरके सिंह, अनुप्रिया पटेल, राव इंद्रजीत सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वंदे भारत ट्रेन के लिए रेल मंत्रालय से अनुरोध किया है। जहां तक विपक्ष के प्रमुख चेहरों की बात है तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तक की ओर से अपने चुनाव क्षेत्रों के लिए वंदे भारत ट्रेन सेवा की मांग की गई है। इस ट्रेन की मांग करने वाले सांसदों में अधिकतर तो भाजपा के हैं, लेकिन विपक्षी दलों के सांसदों की भी लंबी कतार है। विपक्षी दलों में राकांपा, द्रमुक, सपा-बसपा, आप और जदयू के सांसद भी अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए ऐसी ट्रेनों की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दलों में सबसे ज्यादा 16 मांगें कांग्रेस की ओर से आई हैं। वहीं शिवसेना उद्धव और शिंदे गुट से 10 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से 6 मांगें आई हुई हैं।
रेल मंत्रालय के अफसरों का कहना है कि सभी राज्यों से इस ट्रेन की भारी मांग है। पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सांसदों और विधायकों ने इसके लिए अनुरोध भेजे हैं। किसी भी रूट पर इस ट्रेन की सेवा शुरू करने का फैसला एक समिति करती है, जो कई बातों को ध्यान में रखती है। जैसे-जैसे अधिक ट्रेनें चलाई जाएंगी, हम उन्हें नई रूटों पर शुरू करेंगे।'
वंदे भारत ट्रेनों की 99.6 प्रतिशत है ऑक्यूपेंसी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले ही संसद में बताया था कि इस ट्रेन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लग सकता है कि इसकी ऑक्यूपेंसी 99.6 फीसदी तक रहती है। इसकी वजह ये है कि दूसरी ट्रेनों से ज्यादा किराया होने के बावजूद यह ज्यादा आरामदायक और इससे यात्रा में दूसरी ट्रेनों के मुकाबले काफी कम समय लगता है।