नक्सलियों की राह पर घाटी के आतंकी
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घाटी के आतंकी नक्सलियों की राह पर चल पड़े हैं। हमला कर हथियार लूटने के नक्सलियों के ट्रेंड को आतंकियों ने अपना लिया है। इसके लिए उन्होंने साफ्ट टारगेट के रूप में नेताओं तथा रसूख वालों के सुरक्षाकर्मियों को चुना है। ज्यादातर घटनाएं दक्षिणी कश्मीर में हुई हैं। आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद इस ट्रेंड में बढ़ोतरी हुई है।
सूत्रों का कहना है कि पिछले दो महीने में आतंकियों ने 70 से अधिक हथियार लूटे हैं। इनमें थाने पर हमले तथा सुरक्षाकर्मियों से लूट के हथियार शामिल हैं। कुलगाम जिले के दमहाल हांजीपोरा थाने से हिंसा के दौरान लूटे गए हथियारों का अब तक पता नहीं चल सका है।
सुरक्षा एजेंसियों के पास इस बात के इनपुट हैं कि दक्षिणी कश्मीर से 300 से अधिक युवा पिछले कुछ महीनों में गायब हैं। माना जा रहा है कि इन्होंने आतंकी संगठन का दामन थाम लिया है।
बुरहान ग्रुप ने की थी शुरुआत
सुरक्षा बलों की सख्ती के कारण हथियारों की सप्लाई लाइन लगभग बंद हो गई है। इस वजह से हथियारों के अभाव से जूझ रहे आतंकी संगठनों ने लूट की साजिश पर काम करना शुरू कर दिया।
हिजबुल मुजाहिदीन के बुरहान ग्रुप ने घाटी में हथियार लूट ट्रेंड की शुरुआत की थी। इसके पीछे वजह यह बताई जाती है कि वे युवाओं से इस साजिश के तहत लूट कराते थे कि एक बार इसमें फंसने के बाद वे दोबारा आतंक की राह को नहीं छोड़ सकेंगे।
साथ ही पाकिस्तान या अन्य कहीं से मदद की बजाय बुरहान ग्रुप अपने बलबूते पर आतंक की राह पर चलता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह नया ट्रेंड चिंता का विषय है।