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Corona vaccine: पीएम मोदी को लगे टीके का बच्चों पर भी होगा परीक्षण
Thu, 04 Mar 2021 06:32 AM IST
Jeet Kumar
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 04 Mar 2021 06:32 AM IST
सार
- 18 से कम और पांच साल से अधिक बच्चों पर होगा परीक्षण
- भारत बायोटेक ने देश भर के अस्पतालों में तीसरे चरण का परीक्षण करने का लिया है फैसला
- विशेषज्ञ समिति ने कंपनी ने विस्तृत प्रस्ताव मांगा, अगली बैठक में मिल सकती है अनुमति
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पीएम मोदी ने ली कोरोना की पहली खुराक
- फोटो : AmarUjala
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विस्तार
दुनिया में पहली बार भारत कोरोना वायरस को लेकर बच्चों में वैक्सीन का असर पता लगाने जा रहा है। दो दिन पहले ही दिल्ली एम्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी कोवाक्सिन की पहली खुराक ली है। अब हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इसी कोवाक्सिन का परीक्षण छोटे बच्चों पर भी करने जा रही है। हालांकि इसके लिए पांच वर्ष से कम आयु को शामिल नहीं किया है।
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जानकारी के अनुसार भारत बायोटेक ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के अधीन विशेषज्ञ समिति (एसईसी) को प्रस्ताव भेजा है कि वह कोवाक्सिन का परीक्षण बच्चों पर करना चाहते हैं। चूंकि कोवाक्सिन पर मानव परीक्षण पहले हो चुके हैं।
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इसलिए बच्चों में वह सीधे तीसरा परीक्षण करना चाहते हैं। इसके लिए 18 से कम और पांच साल से अधिक आयु के बच्चे रहेंगे। समिति ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है लेकिन अभी अनुमति प्रदान नहीं की है।
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विशेषज्ञ समिति के अनुसार कोवाक्सिन के तीसरे चरण के परीक्षण परिणाम अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। ऐसे में बच्चों पर परीक्षण की अनुमति देने से पहले कंपनी को वयस्कों पर किए परीक्षण परिणाम सौंपने होंगे। इसके आधार पर ही अनुमति दी जा सकेगी।
दरअसल भारत सहित पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से बचने के लिए टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। अभी तक 12 से अधिक टीकों पर खोज पूरी हो चुकी है और यह सभी टीके 12 वर्ष से अधिक आयु वालों को ही दिए जा रहे हैं। इससे कम आयु वालों के लिए टीके की खोज नहीं हो पाई है।
नाक से दिए जाने वाले टीके की परीक्षण की तैयारी
हाल ही में भारत बायोटेक ने नाक से दिए जाने वाले वैक्सीन पर परीक्षण करने की शुरूआत भी की है। अगर इसमें सफलता मिलती है तो यह देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की पहली नाक से दिए जाने वाली कोरोना वैक्सीन होगी।
साथ ही आधा घंटे में ही किसी भी स्कूल की एक पूरी क्लास को वैक्सीन दिया जा सकेगा। इसी तरह भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन का भी बच्चों पर असर जानने के लिए यह परीक्षण की तैयारी की गई है।
कंपनी के अनुसार 12 वर्ष तक की आयु में कोवाक्सिन के काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि इससे कम आयु पर भी परीक्षण किया जाए।
इसके लिए आईसीएमआर के वैज्ञानिकों के साथ भी उनकी चर्चा हुई है। हालांकि वयस्कों पर किए तीसरे चरण के परीक्षण परिणाम अब तक सामने नहीं आने के सवाल पर कंपनी ने कहा है कि जल्द ही यह परिणाम सार्वजनिक होने वाले हैं।
एक साथ दो करने होंगे परीक्षण
समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों पर कोवाक्सिन का परीक्षण करने के लिए कंपनी को एकसाथ दूसरे और तीसरे चरण को संचालित करने के लिए कहा है। इसके लिए व्यवस्थित प्रस्ताव भी मांगा है। अगली बैठक में इस प्रस्ताव की समीक्षा और व्यस्कों के परीक्षण से जुड़े सुरक्षा और असर का डाटा मिलने के बाद ही आगे की कार्यवाही होगी।