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Hindi News ›   India News ›   Uzbek FM Bakhtiyor Saidov arrived in Delhi to participate in 4th edition of the India-Central Asia Dialogue

India-Central Asia Dialogue: भारत पहुंचे उज्बेक के विदेश मंत्री, चौथे भारत-मध्य एशिया संवाद में लेंगे हिस्सा

Thu, 05 Jun 2025 05:59 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 05 Jun 2025 05:59 PM IST
सार

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सईदोव और अन्य केंद्रीय एशियाई विदेश मंत्री भारत के दौरे पर पहुंचे हैं। जो चौथे भारत-मध्य एशिया संवाद में हिस्सा लेंगे। ये संवाद भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को और गहरा करेगा। भारत इस मंच के जरिए एशिया के हृदय क्षेत्र से अपने रिश्तों को और मजबूत कर रहा है।

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Uzbek FM Bakhtiyor Saidov arrived in Delhi to participate in 4th edition of the India-Central Asia Dialogue
उज़्बेक विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव दिल्ली पहुंचे - फोटो : X @MEAIndia

विस्तार

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सईदोव बुधवार को भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे। वे यहां चौथे भारत-मध्य एशिया संवाद में भाग लेने आए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह जानकारी दी। रणधीर जायसवाल ने अपने पोस्ट में लिखा, 'उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सईदोव का भारत में स्वागत है। अपने आधिकारिक दौरे के दौरान वे चौथे भारत-मध्य एशिया संवाद में भाग लेंगे और कई द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।'
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अन्य केंद्रीय एशियाई देश भी शामिल
इस संवाद में हिस्सा लेने के लिए ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन, किर्गिज गणराज्य के विदेश मंत्री झीनबेक कुलुबाएव, और तुर्कमेनिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव भी बुधवार को दिल्ली पहुंचे।

क्या है भारत-मध्य एशिया संवाद?
भारत-मध्य एशिया संवाद की शुरुआत 2019 में समरकंद (उज्बेकिस्तान) में हुई थी। यह एक मंत्रीस्तरीय मंच है, जिसका उद्देश्य भारत और मध्य एशिया के पांच देशों - कजाखस्तान, किर्गिज गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान - के बीच संबंधों को मजबूत बनाना है।


संवाद के मुख्य विषय क्या होंगे?
अब तक के संवादों में मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, संपर्क और व्यापार पर चर्चा हुई है। इस साल की बैठक में व्यापार, इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा), टेक्नोलॉजी, और संयुक्त विकास परियोजनाओं पर फोकस रहने की संभावना है।

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भारत-मध्य एशिया का ऐतिहासिक रिश्ता
भारत और मध्य एशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध हैं। बौद्ध धर्म भारत से तिब्बत होते हुए मध्य एशिया पहुंचा और वहां के प्रसिद्ध स्थलों जैसे करा तेपे, फयाज तेपे और अजीना तेपे में उसकी छाप देखी जा सकती है। भारतीय भिक्षुओं ने वहां जाकर ग्रंथों का अनुवाद किया और मठों की स्थापना की।

पीएम मोदी की बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में पांचों मध्य एशियाई देशों का दौरा कर इस रिश्ते को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। साथ ही उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठकों में ताशकंद, बिश्केक और समरकंद में भाग लेकर भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को मजबूती दी।

दिल्ली घोषणा और भविष्य की योजनाएं
जनवरी 2022 में पहला भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन वर्चुअल रूप में हुआ था, जिसमें सभी पांच देशों के राष्ट्रपतियों ने भाग लिया। इसमें दिल्ली घोषणा पारित की गई, जिसमें हर दो साल में शिखर सम्मेलन और नियमित मंत्रीस्तरीय संवाद की योजना को औपचारिक रूप दिया गया।

 
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