Uttarkashi tunnel: पानी के दो इंच पाइप ने बदली लोगों की जिंदगी, टनल में फंसे श्रमिक ने सुनाई पल-पल की दास्तां
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विस्तार
'दीपावली पर जल्दी-जल्दी टनल से काम कर बाहर निकलने की तैयारी थी। लेकिन टनल धंस गई और हम सब फंस गए। शुरुआत के 36 घंटे तो समझ ही नहीं आया क्या करना है। लेकिन जिंदगी और मौत के बीच में टनल में मौजूद पानी की पाइप ने जो सहारा दिया, उससे उम्मीद की ऐसी किरण जगी कि आज हम सब खुली हवा में सांस ले रहे हैं। इसके अलावा हम सभी 41 लोगों में से किसी भी एक आदमी की उम्मीद नहीं टूटी थी। अगर कोई भी एक आदमी का हौसला टूट जाता, तो हम लोग न चाहते हुए भी यह जंग हार जाते।' यह कहते हुए उत्तराखंड के टनल हादसे में 17 दिनों तक अंदर फंसे रहने की पूरी कहानी मनजीत ने अमर उजाला डॉट कॉम से साझा की। 25 साल के मनजीत वही हैं, जिनके पिता का अपने बेटे के टनल से बाहर आने के बाद का वीडियो देश और दुनिया में वायरल हो चुका है।
मनजीत बताते हैं कि 11 तारीख को जब वह काम करने गए, तो उनके साथ सभी लोगों ने यही तय किया कि वापस आकर कुछ दिये और मोमबत्तियां खरीदेंगे। इसके अलावा कुछ पटाखों का इंतजाम करके दीपावली का जश्न मनाएंगे। लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था। काम चल रहा था और अचानक बड़ी तेज तेज सी आवाज आने लगी और टनल का एक हिस्सा पूरी तरीके से धंस कर गिर चुका था। मनजीत कहते हैं कि शुरुआत में तो यह लगा कि शायद थोड़ा हिस्सा गिरा है और बाहर निकालने की कोई गुंजाइश होगी, लेकिन ऐसा नहीं था। घटना के कुछ मिनट बाद ही एहसास हो चुका था की टनल में काम कर रहे हैं सभी 41 लोग फंस चुके हैं। इसके बाद शुरुआत में तो बहुत डर लगा कि आखिर क्या होगा। वह कहते हैं कि सभी लोगों के दिमाग में उनके घर परिवार और बच्चों की तस्वीर एक रील की तरह चलने लगी।
घटना के बाद उनके पास अंदर जितने उपकरण थे, उससे मलवा हटाने की कोशिश की, लेकिन उससे कुछ भी संभव नहीं था। अचानक उनकी टीम के लोगों ने देखा कि एक पानी का पाइप है, जो टनल के आर पार जाता है। मनजीत कहते हैं, उनके पास जो उपकरण मौजूद थे, उन्होंने उस पाइप को खोलकर आवाज देने की कोशिश की ताकि वह तकरीबन पौने तीन सौ मीटर लंबी पाइप के उस पार मौजूद लोगों को बता सकें कि वह लोग अभी जिंदा हैं। चूंकि पाइप के भीतर मलबा और कचरा भरा हुआ था, जिसे सक्शन मशीन के माध्यम से खींचा गया और कुछ ऐसी हलचल की गई, जिससे बाहर मौजूद लोगों को इस बात का अंदेशा हुआ कि अंदर फंसे 41 लोग जीवित हैं। मनजीत कहते हैं कि पानी के पाइप से किया गया यह प्रयास 19 लोगों की जिंदगी की उम्मीद का वह सबसे बड़ा सहारा बना। जिसके बाद हम लोगों की उम्मीदें दिन पर दिन बढ़ती चली गईं। वह कहते हैं कि इस पाइप के माध्यम से जब बातचीत शुरू हुई, तो अंदर फंसे 41 मजदूर और बाहर मौजूद अमले को भरोसा हो गया कि अब सब कुछ देर सबेर अच्छा ही होगा।
मनजीत कहते हैं कि शुरुआत के कुछ घंटों तक तो सब कुछ शून्य दिख रहा था। लेकिन जब दो इंच पानी के पाइप से संपर्क स्थापित होना शुरू हुआ, तो फिर हम लोगों की अंदर की जिंदगी सामान्य होने लगी। मनजीत कहते हैं कि यह तो शुक्र है कि टनल के धंसने के बाद भी अंदर बिजली नहीं गई थी। रोशनी के चलते एक बड़ी उम्मीद हम लोगों की कायम थी और हौसला भी बरकरार था। पहली बार इस पाइप के माध्यम से खाने-पीने का सामान भेजा गया। उसके बाद 6 इंच पाइप को मलबे के बीच से निकालकर हम लोगों तक पहुंचाया गया। यहां मौजूद लोगों के मोबाइल को चार्ज करने के लिए व्यवस्था की गई, ताकि हम लोग कुछ एंटरटेनमेंट भी कर सकें। वह कहते हैं कि जब तक उम्मीद नहीं दिखी, तब तक तो उनके पास मौजूद खाने की व्यवस्था होने के बाद भी उस ओर उनका ध्यान नहीं गया। लेकिन जगी हुई उम्मीद के साथ वह लोग मनोरंजन भी करने लगे और हंसने खेलने के साथ-साथ आगे की प्लानिंग और एक दूसरे की हौसला अफजाई भी करने लगे।
मनजीत कहते हैं कि 17 दिनों तक यही हौसला रहता था कि बस टनल से बाहर निकलने का वक्त आ गया है। क्योंकि बाहर मौजूद अधिकारी और देश दुनिया के करोड़ों लोगों की दुआओं की जानकारियां अंदर 41 लोगों तक लगातार मिल रही थीं। वह कहते हैं कि इसी से इतनी ऊर्जा मिलती थी कि हम लोग जिंदगी के सबसे कठिन दौर में भी बहुत उत्साह के साथ अंदर रह रहे थे। वह बताते हैं कि सभी लोगों के पास अपने मोबाइल थे और मोबाइल में गाने और फिल्में भी थीं। टनल में फंसे लोगों ने बाहुबली और पुष्पा जैसी दक्षिण भारत की कई फिल्में देखीं और नए-नए गाने सुनकर उस वक्त का इंतजार करने लगे, कब टनल से बाहर निकलने का खूबसूरत दिन आएगा।
वह कहते हैं कि टनल में 20 साल से लेकर 50 साल तक के लोग मौजूद थे। लेकिन इनमें से कोई भी शख्स ऐसा नहीं था, जिसने 17 दिनों में एक बार भी यह उम्मीद छोड़ी हो कि वह बाहर नहीं निकल सकेंगे। 17 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझ रहे मनजीत कहते हैं कि दो दिन पहले जब अंदर मौजूद 41 लोगों के कान में टनल के धंसे हुए मलबे में तेज आवाज आने लगी, तो उन्हें अपनी जिंदगी का सबसे खुशियों भरा दिन महसूस होने लगा। वह बताते हैं कि उनके पास लगातार बाहर से सूचनाएं आ रही थीं कि पाइप 5 मीटर 4 मीटर और 2 मीटर की दूरी तक पहुंच चुका है। एक वक्त ऐसा आया, जब उन लोगों को बाहर निकालने का पाइप पूरी तरीके से उनके सामने था और इसे देखकर वहां मौजूद सभी 41 लोग फफक-फफक कर रोने लगे। ये आंसू खुशियों के थे। क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े टनल रेस्क्यू ऑपरेशन की जंग जीत ली गई थी।
मनजीत कहते हैं कि वह अभी अस्पताल में हैं और पूरी तरह फिट हैं। उनका कहना है कि थोड़े दिन बाद वह एक बार फिर से अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत करना शुरू करेंगे और फिर से काम करेंगे। लेकिन उनका कहना है कि 17 दिनों के इस दुनिया के सबसे बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन से एक बात तो साफ हो जाती है कि कितनी भी विपरीत परिस्थितियां हों, इंसान को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। मनजीत ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन सभी लोगों से बात की और उनकी हिम्मत की तारीफ करते हुए पूरे देश की ओर से की गई प्रार्थनाओं का जिक्र किया।