संसद शुरू होते ही उत्तराखंड मुद्दे पर घिरी केन्द्र सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से का आगाज सोमवार को हो गया। सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से सहयोग की अपील की। लेकिन जैसे की आशंका जताई जा रही थी सत्र की शुरूआत में ही उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मुद्दे को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने एक सुर में सरकार की आलोचना करते हुए केन्द्र और भाजपा को घेर लिया।
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की, इसके बाद उप नेता आनंद शर्मा ने तीखे शब्दों में इस मामले में केन्द्र सरकार पर हमला बोला। आजाद ने कहा कि सालभर से देख रहे हैं कि रुलींग पार्टी की तरफ से प्रयास किया जाता है कि सदन न चले। हमने देखा है कि इसी प्रकार से चुनी हुई सरकार अरुणाचल प्रदेश में गिराई गई। जानबूझकर केन्द्रीय सरकार तंग करती है प्रदेश सरकारों को।
इस पर भाजपा सदस्य और केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा जिन मुद्दों पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है उन्हें सदन में उठाना सही नहीं है। नकवी के इस बयान पर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। लगातार हंगामे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे फिर 2.10 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
कांग्रेस ने 88 बार किया अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल : नकवी
इससे पूर्व हुई सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का मुद्दा विपक्ष का सबसे अहम एजेंडा होगा। इस मुद्दे पर विधानसभा, अदालत और सड़क पर सियासी लड़ाई के बाद विपक्ष का इरादा अब संसद में सरकार से मुठभेड़ करने का है। खड़गे ने कहा कि केंद्र ने ऐसा कर लोकतंत्र की हत्या की है।
इस कारण उसे हाईकोर्ट की फटकार झेलनी पड़ी है। उन्होंने संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देने की बात कही। हालांकि, स्पीकर महाजन ने कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार नहीं करने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में यह मुद्दा उठा है, मगर सबको पता है कि मामला अदालत के विचाराधीन है।
संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा अगर कांग्रेस उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का मुद्दा संसद में उठाती है तो उसे इस बात का जवाब देना होगा कि बीते वर्षों में चुनी गई सरकारों को हटाने के लिए उसने अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल क्यों किया।
जिन चुनी गई सरकारों को बर्खास्त किया गया वे बहुमत में थीं और कोई संवैधानिक संकट भी नहीं था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 88 बार अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 50 बार इसका इस्तेमाल किया गया था।