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सियासत: क्या केंद्र की नाराजगी खत्म करने में कामयाब हुए योगी, जानें पार्टी में अब कैसी है छवि?

Sun, 27 Jun 2021 05:13 PM IST
Tanuja Yadav शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 27 Jun 2021 05:13 PM IST
सार

सीएम योगी आदित्यनाथ से नाराज चलने वाले राज्य सरकार के एक मंत्री भी अब इस ओर ही इशारा कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में सियासी हालात काफी तेजी से बदल गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच भ्रम दूर होने का असर है, जिससे विधायकों और पार्टी नेताओं की सोच में परिवर्तन आया।

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uttar pradesh chief minister yogi adityanath fight for his position internally in state and become more popular among mlas and leaders
पीएम मोदी, अमित शाह, सीएम योगी और जेपी नड्डा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच करीब एक महीने तक रस्साकसी चलती रही। हालात यहां तक पहुंचे कि योगी को मुख्यमंत्री पद से हटाने की अटकलें भी लगने लगीं। इसके बाद सीएम योगी ने आनन-फानन में दिल्ली का दौरा किया, जिससे मिशन 2022 में उनकी दावेदारी एक बार फिर मजबूत होती नजर आ रही है। केंद्र से नाराजगी खत्म करने में कैसे कामयाब हुए योगी और अब पार्टी में क्या है उनका कद, जानते हैं इस रिपोर्ट में...

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एक महीने से चल रही थी योगी को हटाने की आंधी

पूर्वांचल के 16 जिलों में जनसंपर्क प्रभारी रह चुके ज्ञानेश्वर शुक्ला इस पूरे मामले को अलग ही नजर से देखते हैं। उनका कहना है कि करीब एक महीने पहले तक सीएम योगी आदित्यनाथ को हटाने की आंधी चल रही थी। हालांकि, योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से बातचीत करके हालात बदल दिए। जौनपुर के एक विधायक मानते हैं कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के भाजपा का एक ही नारा होगा, 'देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

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विरोधियों ने भी बदला अपना रुख

सीएम योगी आदित्यनाथ से नाराज चलने वाले राज्य सरकार के एक मंत्री भी अब इस ओर ही इशारा कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में सियासी हालात काफी तेजी से बदल गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच भ्रम दूर होने का असर है, जिससे विधायकों और पार्टी नेताओं की सोच में परिवर्तन आया। इसके अलावा सीएम योगी का प्रतिद्वंद्वी खेमा माने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य की टीम के भी चुप्पी साधने की बात कही जा रही है। उधर, स्वामी प्रसाद मौर्य के एक करीबी नेता का कहना है कि अब पार्टी का पूरा फोकस मिशन 2022 पर है। 

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कोविड प्रबंधन की खामियों से ऐसे पाया पार

राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा इस वक्त मिशन 2022 की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में पार्टी का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने पर है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के प्रभारी राधामोहन सिंह, राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और संगठन मंत्री सुनील बंसल में एकजुटता बढ़ी है। सूत्रों का दावा है कि कोविड प्रबंधन की खामियों को दूर करने में सीएम योगी ने काफी हद तक कामयाबी हासिल की, जिसका उन्हें फायदा मिला। 

बंगाल के नतीजे से बदले हालात

भाजपा के एक विधायक नाम न छापने के अनुरोध के साथ कहते हैं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हाई टैम्पो पर लड़ा गया। उस दौरान कोरोना की दूसरी लहर भी आई। दोनों के नतीजों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को बैकफुट पर ला दिया। इससे संघ एक बार फिर प्रभावी भूमिका में आ गया, जिसका सीधा फायदा सीएम योगी को मिला। पिछले सवा चार साल के कार्यकाल में सीएम योगी को ट्रांसफर, पोस्टिंग के धंधे पर लगाम लगाने समेत माफिया राज से निपटने के लिए वाहवाही मिल रही है। हालांकि, उन पर ब्राह्मण बनाम ठाकुरवाद के आरोप भी लगे। अब देखना यह होगा कि 2022 में विधानसभा चुनाव होने तक और उसके बाद योगी राजनीतिक समीकरण को साधने में कितने सफल रहते हैं। 

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