सियासत: क्या केंद्र की नाराजगी खत्म करने में कामयाब हुए योगी, जानें पार्टी में अब कैसी है छवि?
सीएम योगी आदित्यनाथ से नाराज चलने वाले राज्य सरकार के एक मंत्री भी अब इस ओर ही इशारा कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में सियासी हालात काफी तेजी से बदल गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच भ्रम दूर होने का असर है, जिससे विधायकों और पार्टी नेताओं की सोच में परिवर्तन आया।
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उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच करीब एक महीने तक रस्साकसी चलती रही। हालात यहां तक पहुंचे कि योगी को मुख्यमंत्री पद से हटाने की अटकलें भी लगने लगीं। इसके बाद सीएम योगी ने आनन-फानन में दिल्ली का दौरा किया, जिससे मिशन 2022 में उनकी दावेदारी एक बार फिर मजबूत होती नजर आ रही है। केंद्र से नाराजगी खत्म करने में कैसे कामयाब हुए योगी और अब पार्टी में क्या है उनका कद, जानते हैं इस रिपोर्ट में...
एक महीने से चल रही थी योगी को हटाने की आंधी
पूर्वांचल के 16 जिलों में जनसंपर्क प्रभारी रह चुके ज्ञानेश्वर शुक्ला इस पूरे मामले को अलग ही नजर से देखते हैं। उनका कहना है कि करीब एक महीने पहले तक सीएम योगी आदित्यनाथ को हटाने की आंधी चल रही थी। हालांकि, योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से बातचीत करके हालात बदल दिए। जौनपुर के एक विधायक मानते हैं कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के भाजपा का एक ही नारा होगा, 'देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
विरोधियों ने भी बदला अपना रुख
सीएम योगी आदित्यनाथ से नाराज चलने वाले राज्य सरकार के एक मंत्री भी अब इस ओर ही इशारा कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में सियासी हालात काफी तेजी से बदल गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच भ्रम दूर होने का असर है, जिससे विधायकों और पार्टी नेताओं की सोच में परिवर्तन आया। इसके अलावा सीएम योगी का प्रतिद्वंद्वी खेमा माने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्य की टीम के भी चुप्पी साधने की बात कही जा रही है। उधर, स्वामी प्रसाद मौर्य के एक करीबी नेता का कहना है कि अब पार्टी का पूरा फोकस मिशन 2022 पर है।
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बंगाल के नतीजे से बदले हालात
भाजपा के एक विधायक नाम न छापने के अनुरोध के साथ कहते हैं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हाई टैम्पो पर लड़ा गया। उस दौरान कोरोना की दूसरी लहर भी आई। दोनों के नतीजों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को बैकफुट पर ला दिया। इससे संघ एक बार फिर प्रभावी भूमिका में आ गया, जिसका सीधा फायदा सीएम योगी को मिला। पिछले सवा चार साल के कार्यकाल में सीएम योगी को ट्रांसफर, पोस्टिंग के धंधे पर लगाम लगाने समेत माफिया राज से निपटने के लिए वाहवाही मिल रही है। हालांकि, उन पर ब्राह्मण बनाम ठाकुरवाद के आरोप भी लगे। अब देखना यह होगा कि 2022 में विधानसभा चुनाव होने तक और उसके बाद योगी राजनीतिक समीकरण को साधने में कितने सफल रहते हैं।