फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   US-Iran War: Fear of Iranian attacks, US troops withdraw from military bases, hide in hotels; find out reason

US-Iran War: ईरानी हमलों का खौफ... सैन्य ठिकानों से हटे अमेरिकी सैनिक, होटलों में छिपे; जानें क्या है वजह

Fri, 27 Mar 2026 07:42 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Pavan Updated Fri, 27 Mar 2026 07:42 AM IST
सार

ईरान ने पश्चिम एशिया में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके चलते कई अमेरिकी सैनिकों को सैन्य ठिकानों छोड़कर होटलों और कार्यालयों में छिपना पड़ा है। कई अमेरिकी सैनिकों को आगे भी ईरानी हमलों का डर सता रहा है।

विज्ञापन
US-Iran War: Fear of Iranian attacks, US troops withdraw from military bases, hide in hotels; find out reason
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जमीन पर मौजूद सेना के बड़े हिस्से को दूरदराज से ही जंग लड़नी पड़ रही है। हालांकि लड़ाकू पायलटों और क्रू सैन्य ठिकानों पर अब भी जमे हैं और ईरान पर बमबारी कर रहे हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने लोगों से अमेरिकी सैनिकों की नई जगहों की जानकारी देने की अपील की है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि खतरे के बावजूद पेंटागन युद्ध जारी रखने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान के 7 हजार से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि सैनिकों को अस्थायी जगहों पर भेजने से ट्रंप प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। -न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
विज्ञापन


युद्ध की शुरुआत में थे 40 हजार सैनिक, कई को यूरोप भेजा गया
अमेरिकी सैन्य अफसरों ने बताया कि जब युद्ध शुरू हुआ, तब करीब 40 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। सेंट्रल कमांड ने उनमें से हजारों सैनिकों को अलग-अलग जगहों पर भेज दिया है। कुछ को तो यूरोप जितनी दूर भी भेजा गया है। कई सैनिक पश्चिम एशिया में ही है पर, अपने मूल ठिकानों पर नहीं।
विज्ञापन


सर्वोच्च नेताओं के मारे जाने के बाद भी ईरान ने दिया जबरदस्त जवाब
ईरान ने अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों का जबरदस्त जवाब दिया। अपने सर्वोच्च नेता और दर्जनों अन्य नेताओं व सैन्य अधिकारियों के मारे जाने के बाद भी ईरान ने न केवल अमेरिकी ठिकानों को, बल्कि पूरे क्षेत्र में दूतावासों तथा तेल और गैस के बुनियादी ढांचों को भी निशाना बनाया। साथ ही, महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को भी काफी हद तक बंद कर दिया। इससे इस युद्ध का असर दुनिया भर के लोगों पर महसूस किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कई ठिकाने रहने लायक ही नहीं बचे
क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों के इस्तेमाल किए जाने वाले 13 सैन्य ठिकानों में से कई तो रहने लायक ही नहीं बचे हैं। कुवैत स्थित ठिकानों को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा है। पोर्ट शुएबा पर हुए एक हमले में अमेरिका के छह सैनिक मारे गए। सेना का एक टैक्टिकल ऑपरेशंस सेंटर तबाह हो गया।
  • ईरानी ड्रोन और मिसाइलों ने अली अल सलेम एयर बेस को भी निशाना बनाया। इसमें विमानों के ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए और कर्मी घायल हो गए।
  • कतर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्रीय हवाई मुख्यालय अल उदीद एयर बेस पर हमला किया, जिससे एक अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा। बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय में संचार उपकरणों पर हमला किया।
  • सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों ने संचार उपकरणों और कई रीफ्यूलिंग टैंकरों को नुकसान पहुंचाया।

बेहतर योजना में कमी...अमेरिका ने माना, ईरान के पास बची है क्षमता
पेंटागन में पिछले हफ्ते हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस मेंर ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्वीकार किया कि जबरदस्त हवाई हमलों के बावजूद, ईरानियों के पास अब भी कुछ क्षमता बची हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की कई परतें अमेरिका को अपने सैनिकों और हितों की रक्षा करने में सक्षम बना रही हैं, लेकिन पेंटागन इसे और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
  • कुछ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, बेहतर योजना की कमी रही। ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ताकत का गलत अंदाजा लगाया। प्रशासन ने युद्ध शुरू होने से पहले क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी दूतावासों और अन्य ठिकानों पर कर्मचारियों की संख्या कम नहीं की और न ही गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों को निकलने का आदेश दिया।
  • मौजूदा और पूर्व सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों को अन्य जगह भेजने से युद्ध लड़ना अब अधिक मुश्किल हो गया है। अमेरिकी वायुसेना के सेवानिवृत्त विशेष ऑपरेशंस टारगेटिंग विशेषज्ञ जे ब्रायंट ने कहा, हमारे पास तेजी से ऑपरेशन सेंटर स्थापित करने की क्षमता है, लेकिन हम सारा साजो-सामान किसी होटल की छत पर यूं ही नहीं रख सकते।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed