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Hindi News ›   India News ›   US Ambassador SAID India will be 'shop floor' for world in renewable energy sector in next 30 years:

US: 'अगले 30 साल में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे बड़ा बाजार होगा भारत', US के राजदूत गार्सेटी ने की तारीफ

Mon, 16 Dec 2024 07:26 PM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 16 Dec 2024 07:26 PM IST
सार

अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने अक्षय ऊर्जा के लिए भारत के लक्ष्यों की विशेष तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि आने वाले 30 साल में भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा बाजार होगा।

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US Ambassador SAID India will be 'shop floor' for world in renewable energy sector in next 30 years:
एरिक गार्सेटी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने एक बार फिर भारत और अमेरिका के संबंधों पर बात की। उन्होंने कहा कि 'सबसे भयंकर तूफान' और 'तेज हवा' के बावजूद उगने वाले खजूर के पेड़ के लचीलेपन की तरह भारत-अमेरिका संबंध लगातार बढ़ते रहेंगे और दुनिया को फायदा पहुंचाते रहेंगे।

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भारत के लक्ष्यों की तारीफ की
एक कार्यक्रम में राजदूत ने अक्षय ऊर्जा के लिए भारत के साहसिक लक्ष्यों की विशेष तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि आने वाले 30 साल में भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा बाजार होगा। उन्होंने यह भी कहा, 'भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य और नीतियां उसे सौर व पवन ऊर्जा क्षमता में अग्रणी बना रही हैं। न केवल इस देश के लिए, बल्कि दुनिया के लिए लागत पर विनिर्माण करने में सक्षम बना रही हैं।'
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उन्होंने कहा, 'मेरे शब्द हैं कि आने वाले 30 साल में भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा बाजार होगा।'

पेड़ से नारियल आने में कितना समय लगेगा?
बता दें, राजदूत गार्सेटी अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित 'साउथ एशिया वीमेन इन एनर्जी लीडरशिप' शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने केरल के एक होटल का वाकया बताया, जिसमें उनसे उनके प्रवास के अंत में एक नारियल का पौधा लगाने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा, 'मैंने कहा कि इस पेड़ से नारियल आने में कितना समय लगेगा। इस पर उन्होंने बताया कि करीब आठ साल बाद।'
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भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक संदर्भ में उन्होंने कहा, 'काश हम हर दिन उस नारियल के पेड़ को लगाएं और हम हर दिन चीजों को थोड़ा बेहतर बनाने का तरीका खोज पाएं।'

अमेरिका-भारत संबंध उस पौधे की तरह...
उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि अमेरिका-भारत संबंध उस पौधे की तरह है, जो निरंतर बढ़ता रहेगा, जो खजूर के पेड़ की तरह लचीला रहेगा, जिसे सबसे शक्तिशाली तूफान भी नहीं गिरा सकता, सबसे बड़ी हवा भी उसे उखाड़ नहीं सकती।' 
 
गार्सेटी ने चार पी (P) का मंत्र दिया। उन्होंने अमेरिका और भारत के रिश्ते पर कहा कि चार पी (शांति, स्थिरता, प्लेनेट और लोग) पर भाषण देंगे। 

अमेरिकी राजदूत 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शपथ लेने से पहले पद छोड़ने वाले हैं, ताकि नए प्रशासन को अपनी पसंद चुनने में सुविधा हो। उन्होंने कहा, यहां की केंद्र सरकार ने साहसिक लक्ष्य निर्धारित किए हैं और मैं देख रहा हूं कि भारत दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अक्षय ऊर्जा में अधिक निवेश कर रहा है। लेकिन यह हमारे द्वारा किए जाने वाले सामुदायिक कार्य पर निर्भर करेगा। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न पहलों को भी सूचीबद्ध किया और कहा कि साझेदारी बढ़ती रहेगी। 

क्या ट्रंप नहीं देंगे ध्यान?
ऐसी आशंकाएं हैं कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता है। गार्सेटी ने कहा, 'चिंता न करें, अमेरिका आपका भागीदार बनने जा रहा है, चाहे कुछ भी हो; और हम प्रतिबद्ध हैं, जैसा कि हमने दिखाया है, सौर और पवन परियोजनाओं, इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन, ऊर्जा भंडारण समाधानों में अरबों डॉलर का हरित निवेश प्रवाहित हो रहा है।'


उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत और अमेरिका द्वारा की गई विभिन्न पहलों पर भी प्रकाश डाला और विशेष रूप से अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्रवाई मंच (RETAP) का उल्लेख किया। 

 

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