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गायत्री प्रजापति के दर्शन को तरस रही है पुलिस
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Mar 2017 02:25 AM IST
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नाम गायत्री प्रजापति, राज्य यूपी और ठिकाना समाजवादी पार्टी हो तो क्या कहने। गायत्री प्रजापति आजकल यूपी की राजनीति और प्रशासन में छाए हुए हैं। आजकल कहना उनके साथ अन्याय करना होगा। वे तो लंबे समय से सत्ता के गलियारों और परिवार के बरामदों से लेकर स्वर्णिम खदानों तक छाए हुए हैं।
हाँ, आजकल उनकी पूछ कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। पुलिस उन्हे ढूंढने में लगी हुई है। वे हैं कि सामने होकर भी पुलिस को दर्शन नहीं देते।दरअसल, मध्य फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि गायत्री प्रजापति का स्थान कारागार होना चाहिए। कारागार को धन्य करने के लिए पुलिस प्रजापति की तलाश में है।
वह उनके सरकारी बंगले में जाती है तो सरकारी सुरक्षा गार्ड बताते हैं कि वे महोदय वहां नहीं हैं। विधायक निवास वाले अंगरक्षक कहते हैं कि मंत्री जी अपने चुनाव क्षेत्र में हैं। चुनाव क्षेत्र भी उनका ठहरा - जगप्रसिद्ध अमेठी। अमेठी के गदगद कार्यकर्ता पुलिस को बताते हैं कि गायत्री जी लखनऊ चले गए। लखनऊ में वे अक्सर एक खास ठिकाने पर विराजमान पाए जाते हैं।
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उनकी एक बहुप्रसारित फोटो है जिसमें वे मुलायम के चरण दोनों हाथों से पकड़े हुए कैमरे की तरफ मुस्करा रहे हैं। ये चरण उन्हें पार्टी से परिवार तक शक्तिशाली बनाते रहे। अब पुलिस इस ठिकाने तो जा नहीं सकती।
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हाँ, आजकल उनकी पूछ कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। पुलिस उन्हे ढूंढने में लगी हुई है। वे हैं कि सामने होकर भी पुलिस को दर्शन नहीं देते।दरअसल, मध्य फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि गायत्री प्रजापति का स्थान कारागार होना चाहिए। कारागार को धन्य करने के लिए पुलिस प्रजापति की तलाश में है।
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वह उनके सरकारी बंगले में जाती है तो सरकारी सुरक्षा गार्ड बताते हैं कि वे महोदय वहां नहीं हैं। विधायक निवास वाले अंगरक्षक कहते हैं कि मंत्री जी अपने चुनाव क्षेत्र में हैं। चुनाव क्षेत्र भी उनका ठहरा - जगप्रसिद्ध अमेठी। अमेठी के गदगद कार्यकर्ता पुलिस को बताते हैं कि गायत्री जी लखनऊ चले गए। लखनऊ में वे अक्सर एक खास ठिकाने पर विराजमान पाए जाते हैं।
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उनकी एक बहुप्रसारित फोटो है जिसमें वे मुलायम के चरण दोनों हाथों से पकड़े हुए कैमरे की तरफ मुस्करा रहे हैं। ये चरण उन्हें पार्टी से परिवार तक शक्तिशाली बनाते रहे। अब पुलिस इस ठिकाने तो जा नहीं सकती।
बात इतनी सी है कि एक महिला ने आरोप लगाया कि प्रजापति ने उनके साथ रेप किया। उनकी नाबालिग बेटी से भी रेप की कोशिश की। उनके विरुद्ध मुकदमा लिख लिया जाता तो वे प्रजापति कैसे होते। अंतत: सुप्रीम कोर्ट को उनका स्मरण करना पड़ा। मुकदमा लिखा गया। इस सबके बावजूद प्रजापति जी मंत्री पद पर शोभायमान है।
मुख्यमंत्री महोदय उन्हें मंत्रिमंडल से निष्कासित करने की सोच भी नहीं सकते। एक बार जोश में उन्हें बर्खास्त करके देख लिया था, फौरन वापस लेना पड़ा। मुलायम के चरणों में बैठ कर मुस्कुराते हुए फोटो तभी का है। पार्टी में विवाद के दिनों भी वे शिवपाल के साथ नेता जी के इर्द-गिर्द डटे रहे थे।
निष्कासन और पुन: शपथ ग्रहण के बाद वे अखिलेश के पैर छूना भी नहीं भूलते। हत्या जैसे संगीन आरोपों वाले मुख्तार अंसारी, कई बर्खास्त मंत्री और टिकट वंचित सपा नेता प्रजापति से रश्क करते हैं। अखिलेश ने कभी डीपी यादव को दूर किया तो कभी चचा शिवपाल की सिफारिश के बावजूद मुख्तार अंसारी और उनकी पार्टी को दुत्कार दिया।
मगर रेप के आरोपी प्रजापति अब भी मंत्री पद पर आसीन हैं, सपा की शान बढ़ा रहे हैं और अमेठी से पार्टी के सुयोग्य प्रत्याशी हैं। सपा के नए सुप्रीमो और लोकप्रिय मुख्यमंत्री स्वयं उनके प्रचार के लिए गए।