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यूपी पंचायत चुनाव: भाजपा पर भारी पड़ा किसानों का गुस्सा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से साफ, पूर्वांचल में भी कमजोर  

Tue, 04 May 2021 11:22 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 04 May 2021 11:22 PM IST
सार

किसानों ने भाजपा के खिलाफ मतदान कर जताया अपना गुस्सा, मेरठ, सहारनपुर, शामली, बागपत जैसे जिलों में आरएलडी-समाजवादी पार्टी को मिली भारी जीत, पूर्वांचल में गोरखपुर और वाराणसी से लेकर लखनऊ-अयोध्या तक में भाजपा हुई कमजोर
 

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UP Panchayat elections: farmers anger over BJP, party clean from western Uttar Pradesh, weak in Purvanchal too
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव परिणामों से साफ हो गया है कि किसानों की नाराजगी भाजपा पर भारी पड़ी है। अप्रत्याशित बहुमत हासिल कर केंद्र और राज्य की सत्ता पर काबिज भाजपा को पंचायत चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। 

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, अलीगढ़, आगरा, बागपत और शामली जैसे इलाकों में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने झंडा बुलंद कर दिया है तो भाजपा का पत्ता साफ हो गया है। ज्यादातर जगहों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है।
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पूर्वांचल को भाजपा अपने गढ़ के रूप में देखती रही है। यहां वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गोरखपुर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनकर आते हैं, लेकिन इन दोनों ही क्षेत्रों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वाराणसी और गोरखपुर के आलावा यूपी की राजधानी लखनऊ तक में भाजपा को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा है।
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फेल हुई ट्रिपल इंजन की थ्योरी
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन चुनाव परिणामों को भाजपा की नीतियों की हार बताया है। उन्होंने कहा है कि अब जनता यह समझ चुकी है कि भाजपा केवल लोगों को सांप्रदायिक सोच में भटका कर मूर्ख बनाने का काम करती है। कोरोना के इलाज के दौरान भी लोगों को यह समझ आ गया है कि ये लोगों को इलाज नहीं दे सकते, बल्कि सहायता मांगने पर पीड़ित के ऊपर ही कानूनी कार्रवाई कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों से पूर्व भाजपा केंद्र, राज्य के बाद पंचायत स्तर पर भी बीजेपी को लाकर ट्रिपल इंजन की थ्योरी लागू करना चाहती थी। लेकिन चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया है कि जनता ने उसकी यह थ्योरी मानने से इनकार कर दिया है।  

आरएलडी बनी बड़ी ताकत
लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में लगभग साफ हो गए राष्ट्रीय लोकदल ने किसान आंदोलन के बीच तेजी से किसानों के बीच अपनी पैठ बनाई है और उसे इसका खासा फायदा मिला है। राष्ट्रीय लोकदल के जनरल सेक्रेटरी तारिक मुस्तफा ने अमर उजाला को बताया कि उनके 870 उम्मीदवारों ने पंचायत चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि वे इसका श्रेय पार्टी के नेता जयंत चौधरी के साथ-साथ किसानों को देते हैं जिन्होंने पार्टी को अपना पूरा समर्थन दिया।

उन्होंने कहा कि किसानों की अनदेखी भाजपा पर भारी पड़ रही है। इन चुनाव परिणामों से सीख लेते हुए भाजपा को विवादित कृषि कानूनों को वापस ले लेना चाहिए। किसानों ने धर्म-जाति के नाम से ऊपर उठकर केवल किसान के रूप में वोटिंग किया है जिसका परिणाम इस रूप में दिखाई पड़ा है।

जारी रहेगा आंदोलन
पहले पश्चिम बंगाल और अब यूपी पंचायत चुनावों में भाजपा को हुए राजनीतिक नुकसान को किसान नेता अपने आन्दोलन का परिणाम मानते हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता डॉक्टर आशीष मित्तल ने कहा कि किसानों ने भाजपा को सबक सिखाया है। अगर अभी भी वह इन चुनाव परिणामों को कुछ सीखकर कृषि कानूनों को वापस ले ले तो बात बन सकती है, लेकिन अगर उसने अभी भी अपनी जिद नहीं छोड़ी तो उसे इसका भारी नुकसान सहना पड़ेगा।


डॉक्टर आशीष मित्तल ने कहा कि कोविड के खतरे के बीच भी किसानों का आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। किसान खुले में बैठे हुए हैं। उनकी वजह से कोई कोरोना नहीं  फैल रहा है। आंदोलन स्थलों पर कोरोना नियमों का पालन किया जा रहा है।

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