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UP Nikay Chunav: सुप्रीम कोर्ट को सौंपी आयोग की रिपोर्ट, मिलीं कई विसंगतियां, 24 को होगी सुनवाई
Thu, 16 Mar 2023 05:46 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 16 Mar 2023 05:46 AM IST
सार
सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि आयोग ने 5 दिसंबर, 2022 को अधिसूचित शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर कई विसंगतियां पाई और उन्हें दूर करने की सिफारिश की है।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूपी शहरी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट 24 मार्च को सुनवाई करेगा। प्रदेश सरकार ने बुधवार को शीर्ष अदालत को बताया कि निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के मुद्दे की जांच के लिए गठित आयोग ने अंतिम रिपोर्ट दे दी है। राज्य में चुनाव कराने के लिए नई अधिसूचना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। पीठ ने मामले को 24 तारीख को विचार के लिए रखा। मेहता ने कहा, इस महीने की शुरुआत में आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (रि.) राम अवतार सिंह ने तीन महीने से भी कम समय में राज्य के सभी 75 जिलों का दौरा करने के बाद रिपोर्ट सीएम को सौंप दी है। गौरतलब है कि शीर्ष कोर्ट ने चार जनवरी, 2023 को ओबीसी आरक्षण दिए बिना शहरी स्थानीय निकाय चुनावों पर रोक लगा दिया था।
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मिलीं कई विसंगतियां
सॉलिसिटर जनरल ने बताया, आयोग ने 5 दिसंबर, 2022 को अधिसूचित शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर कई विसंगतियां पाई और उन्हें दूर करने की सिफारिश की है।
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ट्रिपल टेस्ट की शर्त को पूरा करना था जरूरी
मई, 2022 में शीर्ष अदालत ने सांविधानिक पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि ओबीसी आरक्षण से पहले 'ट्रिपल टेस्ट' की शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके तहत पिछड़ेपन पर अनुभवजन्य डाटा एकत्र करने के लिए समर्पित आयोग बनाने, आयोग की सिफारिशों के आलोक में स्थानीय निकाय में आरक्षण के अनुपात को निर्दिष्ट करने और आरक्षण एससी, एसटी व ओबीसी को मिलाकर 50 फीसदी से अधिक नहीं होने की शर्तें हैं।